Amul and Nandini: जानें कितना बड़ा है अमूल और नंदिनी का कारोबार?
अमूल भारत की सबसे बड़ी दूध आपूर्ति कंपनी है। वहीं नंदिनी भारत की दूसरी सबसे बड़ी दूध आपूर्ति कंपनी है।

कर्नाटक में दूध को लेकर राजनीति तेज हो गई है। ताजा मामला अमूल और नंदिनी के बीच खड़े किए गए विवाद का है। दरअसल, अमूल ने बीते 5 अप्रैल को यह घोषणा की थी कि वह बेंगलुरु में दूध और दही के उत्पादों की आपूर्ति करेगा। इस घोषणा के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर यह आरोप लगाया कि वह कर्नाटक के लोकप्रिय ब्रांड नंदिनी को खत्म करना चाहती है। कांग्रेस ने कहा कि जब राज्य के पास अपना दूध का ब्रांड है, तो उसे गुजरात के मिल्क प्रोडक्ट की क्या आवश्यकता है? वहीं जेडीएस भी अमूल प्रोडक्ट को बाजार में उतारने का विरोध कर रही है।
दूध को लेकर राजनीति
कांग्रेस की दूध की इस राजनीति का जवाब देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि विपक्ष राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को तूल दे रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में नंदिनी के अलावा 18 अलग-अलग ब्रांड के मिल्क प्रोडक्ट्स बेचे जा रहे हैं और इससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन अमूल के नाम पर कांग्रेस सिर्फ राजनीति कर रही है।
गौरतलब है कि बेंगलुरु के बाजार में दूध की खपत की 70 प्रतिशत की मांग को अकेले नंदिनी पूरी करता है। अमूल के मुकाबले नंदिनी के दूध की कीमतों में भी भारी अंतर है। नंदिनी के एक लीटर दूध की कीमत ₹39 प्रति लीटर है, तो अमूल के टोंड दूध की कीमत ₹54 प्रति लीटर है। नंदिनी के मूल्य में कमी के पीछे का कारण यह है कि उसे राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी भी मिलती है।
वहीं, अमूल के प्रबंध निदेशक जयन मेहता ने कहा है कि जैसे अमूल गुजरात में किसानों की एक सहकारी संस्था है। वैसे ही नंदिनी कर्नाटक मिल्क फेडरेशन का एक ब्रांड है और दोनों में कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है। उन्होंने कहा कि अमूल कर्नाटक के नंदिनी प्लांट में पहले से ही अपनी आइसक्रीम बना रहा है।
कितना बड़ा है अमूल का बाजार?
अमूल का पूरा नाम आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड है। यह देश की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी समिति है। इसकी स्थापना साल 1946 में हुई थी। तब यह कंपनी मात्र 247 लीटर दूध प्रतिदिन आपूर्ति करती थी। जबकि अब यह आपूर्ति बढ़कर 260 लाख लीटर से भी अधिक हो गई है। फिलहाल अमूल के उत्पादों की पहुंच देश के लगभग सभी राज्यों में है।
अमूल की वेबसाइट के अनुसार, गुजरात में अमूल से 18,600 दुग्ध सहकारी समितियां और 18 जिला सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ के सदस्य जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त, इन समितियों से 36 लाख से ज्यादा दूध उत्पादक सदस्य जुड़े हुए हैं। इस कंपनी का साल 2021-22 में कारोबार ₹46,481 करोड़ का रहा। जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में अमूल का कारोबार ₹39,248 करोड़ का था।
नंदिनी का बाजार
नंदिनी कर्नाटक मिल्क फेडरेशन का ब्रांड नाम है। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन की स्थापना साल 1974 में हुई थी। यह देश की दूसरी और दक्षिण भारत की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी समिति है। इसकी पहुंच देश के सात राज्यों तक है। यह कंपनी प्रतिदिन 84 लाख लीटर दूध की आपूर्ति करती है। इस कंपनी के साथ 22 हजार गांवों से 24 लाख दूध उत्पादक सदस्य जुड़े हुए हैं।
कर्नाटक मिल्क फेडरेशन की वेबसाइट के अनुसार इस कंपनी से 14 हजार दुग्ध सहकारी समिति के सदस्य जुड़े हुए हैं और दुग्ध संघों की संख्या 14 है। इस कंपनी का वित्त वर्ष 2021-22 का कारोबार ₹19,784 करोड़ का रहा। जबकि 2020-21 में इसका कारोबार ₹16,656 करोड़ का था।
कुछ अन्य दूध आपूर्ति करने वाली कंपनियां
मदर डेयरी: मदर डेयरी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की पूर्ण स्वामित्व वाली एक सहायक कंपनी है। इसकी स्थापना साल 1974 में हुई थी। यह दिल्ली-एनसीआर में दूध की आपूर्ति करती है। यह कंपनी प्रतिदिन 30 लाख लीटर से ज्यादा दूध की आपूर्ति करती है। यह दूध के साथ-साथ दही, पनीर, घी, सब्जी, दाल और तेल भी बेचती है। वित्त वर्ष 2021-22 में इस कंपनी का कारोबार ₹12,500 करोड़ का था। वहीं दिल्ली के बाजारों में डीएमएस का दूध भी बिकता है।
इसके अतिरिक्त राजस्थान में सरस, उत्तर प्रदेश में पराग, पंजाब और हरियाणा में विरका, बिहार में सुधा, मध्य प्रदेश में सांची, पश्चिम बंगाल में हरिनघाटा और तमिलनाडु में आविन जैसे सहकारी दुग्ध ब्रांड लोकप्रिय हैं।












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