कंगना की जिस साड़ी को संभालने में लगे कई असिस्टेंट, जानिए उसकी खास बात

खास बात यह है कि कंगना ने मूवी के पोस्‍टर लॉन्चिंग के मौके पर बनारसी परंपरा का खास ध्‍यान रखा और बनारसी साड़ी पहनकर ही अपनी मूवी की पोस्‍टर लॉन्चिंग की।

वाराणसी। हाल ही में ग्‍लैमर दीवा कंगना रनोट अपनी अपकमिंग मूवी "मणिकर्णिका द क्‍वीन आफ झाँसी" की पोस्‍टर लॉन्चिंग करने के लिए बनारस के दशाश्‍वमेघ घाट पहुंचीं। खास बात यह है कि कंगना ने इस मौके पर बनारसी परंपरा का खास ध्‍यान रखा और बनारसी साड़ी पहनकर ही अपनी मूवी की पोस्‍टर लॉन्चिंग की। कंगना जब बनारसी साडि़यां पहनकर दशाश्‍वमेघ घाट पहुंची तो उन्‍होंने लोगों को अपनी ओर इस ट्रेडिशनल लुक में खूब आकर्षित किया। यह साड़ियां इतनी भारी हैं कि इसे संभालने के लिए उन्‍हें असिस्‍टेंट लगाने पड़े। आइए जानते हैं कि क्‍या है उनके गेट-अप्‍स की खास बात..

कंगना की जिस साड़ी को संभालने में लगे कई असिस्टेंट

कंगना ने पोस्‍टर लॉन्चिंग में पहनीं ये बनारसी वेराइटीज

बनारस की साड़ी पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखती हैं। दो घंटे तक चलने वाले इस इवेंट में कंगना ने बनारस की साडि़यों की तीन अलग-अलग वेराइटी पहनी थीं। वोनेट बनारसी साड़ी, टिशू बनारसी, कतान सिल्‍क जैसे महंगे कपड़े की सा‍ड़ी पहनी थी। मनीष का कहना है कि बनारस की यह साडि़यां विश्‍व भर में पहचानी जाती हैं ।

ट्रेडिशनल अंदाज में किया गंगा का पूजन

ट्रेडिशनल अंदाज में किया गंगा का पूजन

कंगना ने अपनी अपकमिंग मूवी म‍णिकर्णिका द क्‍वीन ऑफ झांसी के पोस्‍टर लॉन्चिंग के मां गंगा का विशेष पूजन किया। यहीं नहीं कंगना को बतौर ग्‍लैमरस एक्‍ट्रेस होने के नाते अपनी मूवी के साथ-साथ अपनी ब्रांडिंग करनी भी बखूबी आता है। तभी तो उन्‍होंने गंगा पूजन के दौरान काशी के लोगों का प्‍यार पाने के लिए उन्‍होंने बनारसी साड़ी पहनीं। यही वजह थी कि कंगना के इस अंदाज को देखने के लिए दशाश्‍वमेघ घाट पर फैन्‍स की भारी भीड़ उमड़ी।

साड़ियों की खासियत और कीमत

साड़ियों की खासियत और कीमत

नेट बनारसी साड़ी----पोस्टर लांचिंग के लिए होटल से पहन कर कंगना जिस साड़ी निकली थी उसे नेट बनारसी साड़ी कहा जाता हैं। इस किस्‍म की साड़ी की खास बात यह है कि इसमें जरी का काम खूब बारीकी से किया जाता है। लेकिन सबसे भारी इंब्रॉयडरी वर्क पल्‍लू पर देखने को मिलता है। वजन में भी यह साड़ियां दूसरी बनारसी साड़ी से भारी होती है।

कीमत- आम तौर पर इसकी कीमत 30 से 40 हजार रूपये होती है पर यदि साड़ी में कॉपर (चाँदी ) और गोल्ड ( सोने) के प्योर तारो का इस्तेमाल किया जाये तो कीमत कई गुना बढ़ जाती हैं।

समय- यह साड़ी किसी भी किसी मशीन से नहीं बल्कि हाथ के सहारे इसकी बुनाई की जाती है। इसलिए इस साड़ी को बनाने में 25 दिनों का समय लगता है।

टिशू साड़ी की खासियत

टिशू साड़ी की खासियत

टिशू बनारसी ----कंगना गंगा के विशेष पूजन और अनुष्ठान से लेकर स्नान के लिए जिस साड़ी को पहना था उसे टिशू बनारसी साड़ी के नाम से जाना जाता हैं। साथ ही साथ इसमें प्योर सिल्क का भी इस्तेमाल किया जाता है यही इस साडि़यों की खासियत होती है। हम आप को बता दे की इस साड़ी को कंगना ने पूजन के दौरान मराठी स्टाइल में पहना था।

कीमत- इस साड़ी की कीमत 30 हजार रूपए से शुरू होती है और इसके बाद इसकी कीमत इसके वर्क पर डिपेंड करती है। इसमें अगर सोने की तारों का इस्‍तेमाल किया जाए तो इसके दाम कई गुना ज्‍यादा होंगे। हालांकि ऐसा माना जाता है कि पहले यह साडि़यां शादीयों में खूब दी जाती थी।

समय- इस साड़ी को बनाने में भी 25 से 30 दिनों का समय लग जाता है। यह भी हैंड मेड वर्क होता है।

कतान साडी में खूब फबीं कंगना

कतान साडी में खूब फबीं कंगना

कतान सिल्क ---- कतान सिल्क और बनारस का पुराण रिश्ता हैं दरसल कतान का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आज भी बनारस में ही होता हैं इससे साड़ियों के साथ साथ कुर्ते, और रईस लोग पूजन में धोती के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसमें एंटिक डिजाइन में कापर वर्क होता है । हैण्ड वर्क के साथ प्लेट्स पर बारीक डिजाइन होता है। प्योर सिल्क पर जरी का शानदार वर्क होता है ।
कीमत- इसकी कीमत 15 हजार से 25 हजार तक पहुंचती है। सिल्‍वर और गोल्‍ड जरी का काम होने से इसकी कीमत ज्‍यादा भी पहुंच सकती है।
समय- इसका इस्‍तेमाल शादी विवाह और पारंपरिक अनुष्‍ठानों में खूब होता है इसलिए इसे बनाने में काफी बारीकी काम होता है जिसमें समय भी काफी लगता है।

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