Jayaram Banan: वो शख्स जो पिता की मार के डर से घर से भागा और 300 करोड़ का व्यापार खड़ा कर दिया
Jayaram Banan: एक ऐसा शख्स जो फेल होने पर पिता की मार के डर से घर छोड़ देता है। फिर बर्तन साफ करने का काम करता है। छह साल तक तनख्वाह मिलती है मात्र 18 रुपये। पर आज वो शख्स 300 करोड़ रुपये का मालिक है।
उस व्यक्ति ने ये सब अपनी मेहनत और लग्न से कमाया है और उस शख्सियत का नाम है जयराम बानन। आज हम बताएंगे कैसे जयराम बानन ने 18 रुपये से लेकर 300 करोड़ का सफर तय किया और डोसा किंग के नाम से मशहूर हो गया।

13 साल की उम्र में छोड़ा घर
जयराम बानन का जन्म कर्नाटक के उडुपी में स्थित एक छोटे से गांव करकला में हुआ था। इनके पिता एक ड्राइवर थे। हर छोटी सी बात पर जयराम को पिता से डांट और मार पड़ती थी। ऐसे में जब वे 13 साल के थे, तो परीक्षा में फेल हो गए। पिता की मार के डर से जयराम ने घर छोड़ दिया और मुंबई भाग गए।
यहां जयराम होटल में प्लेटें धोने और टेबल साफ करने का काम करते थे। करीब 6 साल तक होटल में काम किया और पहले वेटर फिर उसी होटल में मैनेजर की पोस्ट तक पहुंच गए। लेकिन वे कुछ अलग करना चाहते थे।
मुंबई से दिल्ली आने का किया फैसला
फिर उन्होंने 1974 में दिल्ली जाने का फैसला किया। यहां पहले उन्होंने गाजियाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की कैंटीन चलाई। इसके बाद उन्होंने 1986 में साउथ दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में अपना पहला रेस्टोरेंट खोला जिसका नाम उन्होंने "सागर" रखा। पहले दिन मात्र 500 रुपये की कमाई हुई लेकिन जयराम डटे रहे।
ऐसे हुई 'सागर रत्न' की शुरुआत
डिफेंस कॉलोनी में चार साल तक काम करने के बाद उन्होंने दिल्ली की लोधी मार्किट में एक और रेस्टोरेंट खोला और नए रेस्टोरेंट के नाम में सागर के साथ रत्न नाम भी जोड़ दिया। इस तरह से उन्होंने अपने स्टार्टअप "सागर-रत्न" की शुरुआत की।
समय के साथ सागर रत्न बड़ा ब्रांड बनता चला गया। आज न सिर्फ भारत में, बल्कि सिंगापुर, कनाडा और बैंकॉक में भी सागर रत्न के आउटलेट्स हैं। आज जयराम बानन 300 करोड़ रुपये से अधिक का बिजनेस चलाते हैं। इनके पूरे विश्व में लगभग 100 आउटलेट्स हैं, अकेले नार्थ इंडिया में इनके लगभग 30 आउटलेट्स हैं।












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