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Israel War Machinery: इजरायल की वो तकनीकें जो उसे बनाती है, दुनिया का सबसे सुरक्षित देश

इजरायल के पास ऐसी बैलेस्टिक मिसाइलें और युद्धक तकनीक हैं, जो शायद ही अन्य किसी देश के पास हो। इन्हीं तकनीकों के सहारे यह देश चारों तरफ से दुश्मनों से घिरा होने के बावजूद भी सुरक्षित रहता है।

Israel War Machinery Iron Dome technologies that make it the safest country in the world

Israel War Machinery: इजरायल केवल 22,145 स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ छोटा सा देश है। पूरी दुनिया में एकमात्र यह यहूदी देश क्षेत्रफल में इतना छोटा है कि राजस्थान का जैसलमेर जिला (38,401 वर्ग किलोमीटर) भी उससे बहुत बड़ा है और कहें तो अमेरिका के कैलिफोर्निया में लगभग 20 इजरायल समा सकते हैं।

इजरायल की भौगोलिक स्थिति को देखें तो पश्चिम में भूमध्य सागर है तो तीन तरफ मुस्लिम देश हैं। उत्तर में लेबनान, उत्तर-पूर्व में सीरिया, पूर्व में जॉर्डन, दक्षिण पश्चिम में मिस्र है। इतना छोटा देश होने के बावजूद इजराइल ने अपनी विकसित तकनीकों में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है।

आयरन डोम

इजराइल के पास आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Iron Dome Missile Defence System) नाम की एक ऐसी तकनीक है जो आसमान में ही पटाखों की तरह किसी भी मिसाइल को खत्म कर देती है। इसका डिटेक्शन-ट्रैकिंग रडार, वेपन कंट्रोल सिस्टम और मिसाइल फायरिंग यूनिट से मिलकर अचूक मानी जाती है। जहां रडार 4 से 70 किलोमीटर की दूरी तक के टारगेट की पहचान कर उन पर नजर रखता है।

गौर करने वाली बात ये है कि आयरन डोम के चार से पांच लॉन्चर में एक बार में 20 मिसाइलें लगती हैं। यह मिसाइल गर्मी और इलेक्ट्रिक सेंसर वाली होती हैं और दूसरी मिसाइल से टकराकर उन्हें पलक झपकते ही नष्ट कर देती है। इस एंटी मिसाइल सिस्टम का सक्सेस रेट 90 प्रतिशत है।

आयरन बीम लेजर मिसाइल सिस्‍टम

साल 2022 के अप्रैल महीने में इजरायल ने दुनिया में पहली बार लेजर मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम (Laser air defense system) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम का नाम 'आयरन बीम' दिया गया है। लेजर आधारित मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम मोर्टार, रॉकेट और एंटी टैंक मिसाइलों को अपने एक ही वार में ही तबाह कर देता है। यह तकनीक 90 प्रतिशत रॉकेट हमलों को तबाह कर देती है।

एरो, एरो-2 और एरो-3

मॉडर्न मिसाइलों और रॉकेट से लैस एरो इजरायल का एक शील्ड सिस्टम है। इसकी कई कैटेगरी (टियर) हैं। इसके शॉर्ट रेंज 'आयरन डोम इंटरसेप्टर' को डिप्लॉय किया जा चुका है। बता दें कि साल 2014 में गाजा में जंग के दौरान हमास आतंकियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया गया था।

एरो-2 सिस्टम मिसाइल वह है जो एटमॉस्फियर (वायुमंडल) के अंदर ही हमलावर मिसाइल को खत्म करने की क्षमता रखती है। यदि लेबनान और ईरान जैसे देश जो मध्यम दूरी से इजरायल को टारगेट करेंगे तो उसका जवाब इससे दिया जा सकता है। वहीं बात एरो-3 सिस्टम की करें तो एरो-3 सिस्टम में मिसाइल स्पेस में भेजी जाएगी। वहां से वह टारगेट को ट्रैक कर उसे खत्म कर देगी। एरो-3 के जरिए इजरायल को ऐसा सुरक्षा कवच मिला है, जिससे उस पर न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल या फिर केमिकल हमले का खतरा लगभग खत्म हो गया है।

डेविड्स स्लिंग

इजरायल के पास मीडियम रेंज की रक्षा प्रणाली 'डेविड्स स्लिंग' भी है। इसके जरिए कम दूरी की मिसाइलों को नष्ट किया जा सकता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक साल 2006 में ईरान के समर्थन वाले लेबनानी आतंकी गुट हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल इस मीडियम रेंज रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर चुका है।

ये तकनीक भी है इजरायल की ताकत

जावेर 1000 : इजरायल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करने वाली हाईटेक 'आंख' बनाई है। यह आंख दीवार के पार देखने में सक्षम है। इससे पता लग जाता है कि दिवार अथवा किसी चीज की आड़ में कोई व्‍यक्ति मौजूद है या नहीं। यह तकनीक इतनी आधुनिक है कि वह यहाँ तक बता देती है कि वह तस्वीर किसी मनुष्य की है या किसी पशु की।

ELM-2238 स्टार रडार: इसकी खासियत यह है कि हवा और जमीन में दुश्मनों के हथियार आसानी से इसकी पकड़ में तुरंत आ जाते हैं। दुनिया में सबसे तेज राडारों में से एक माना जाता है।

फाल्कन एयर वार्निंग सिस्टम: इसकी खासियत है कि हवा में किसी भी तरह के खतरे की चेतावनी यह तुरंत सिस्टम को देती है। जिससे इजरायल के बैलेस्टिक मिसाइल और एजेंसियां सतर्क हो जाती है।

सर्चर एयरक्राफ्ट: इजरायल का सबसे श्रेष्ठ मानव रहित विमान (ड्रोन) माना जाता है।

डर्बी मिसाइल: यह इजरायल की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। लड़ाकू विमानों में इस मिसाइल का खूब प्रयोग किया जाता है। हवा से हवा में मार करने वाली सबसे बेहतरीन मिसाइलों में से ये एक है।

स्पाइक आर एंटी टैंक गाइडेड वीपेन: इजरायल के पास 1970 से स्पाइक आर एंटी टैंक गाइडेड वीपेन है। इस मिसाइल को एंटी टैंक मिसाइल के रूप में प्रयोग किया जाता है। बता दें कि यह पुरानी तकनीक है पर काम बहुत ही ज्यादा प्रभावी है। इसे 15 सेकेंड रिलोड होने में लगते हैं और 30 सेकेंड के भीतर दागी जा सकती है।

इजरायल को इतनी तकनीक की क्या जरूरत?

दरअसल साल 1948 में जब इजरायल का गठन हुआ तब फिलिस्तीन समेत आस-पास के मुस्लिम देशों मिस्त्र, जॉर्डन, सीरिया, ईरान और सऊदी अरब ने इजरायल का विरोध किया था। उसके बाद फिलिस्तीन और आस-पास के मुस्लिम देशों के साथ इजरायल कई छोटे बड़े युद्ध 1948, 1956, 1967, 1973, 1982, 2008, 2014, 2021 में लड़ चुका है।

साल 1967 में इजरायल ने अरब देशों के साथ 6 दिन का युद्ध लड़ा जिसमें उसने इलाके के पूरे भौगोलिक नक्शे को ही बदल दिया और इस जंग में इजरायल को जीत मिली। उसने मिस्र से सिनाई प्रायद्वीप, गाजा पट्टी, जॉर्डन से वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और सीरिया से गोलान हाइट्स छीन लिया। छह दिन चला यह युद्ध संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप और संघर्षविराम समझौते के बाद खत्म तो हुआ, लेकिन तब तक बहुत कुछ बदल चुका था।

वहीं फिलिस्तीन में साल 1987 के जनआंदोलन के दौरान हमास नाम के एक संगठन का जन्म हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीनी क्षेत्रों से इजरायल का प्रभाव समाप्त करना है। 2007 से फिलिस्तीन के गाजा पट्टी वाले इलाके पर हमास का कब्जा है और जब तब इस इलाके से इजरायल पर रॉकेट हमले होते रहते हैं। अभी ताजा हमला भी यही से हुआ था, जिसके जवाब में इजरायल ने भी हवाई हमले किए।

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