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G-20 Presidency: क्या है जी-20 का इतिहास, भारत को अध्यक्षता मिलने का क्या है महत्त्व?

जी-20 का मूल उद्देश्य वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करना है। भारत की अध्यक्षता में कोविड और यूक्रेन युद्ध के बाद उत्पन्न संकटों के समाधान खोजने पर विचार होगा।

 G20 Presidency: What is the history of G20, what is the importance of India getting presidency

1 दिसंबर 2022 से भारत दुनिया के महत्वपूर्ण संगठन जी-20 का एक वर्ष तक नेतृत्व करेगा। इस दौरान 200 छोटी-बड़ी बैठकों का भी आयोजन भारत के अनेकों शहरों में होगा। इससे भारतीय पर्यटन को काफी फायदा होगा। जी-20 देशों के समूह की अध्यक्षता संभालते हुए पीएम ने कहा कि "भारत दुनिया में एकता की सार्वभौमिक भावना को बढ़ावा देने के लिए काम करेगा। भारत 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के मंत्र के साथ आगे बढ़ेगा।"

जी-20 देशों के सामने भारतीय संस्कृति
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार भारत की अध्यक्षता में 9 और 10 सितंबर 2023 को जी-20 के देशों के शीर्ष नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। पहली बैठक 4-7 दिसंबर को उदयपुर में होगी। इस सम्मेलन में भारत जी-20 देशों के सामने अपनी संस्कृति, सांस्कृतिक विरासत, विविधता और 75 वर्षों की उपलब्धियां बताएगा।

क्या है जी-20?
जी-20, जी-7 और कुछ विकासशील देशों के सहयोग से बना एक संगठन है, इसमें 20 देशों के विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, सेंट्रल बैंक के अधिकारी व देशों के प्रमुखों द्वारा विश्व के प्रमुख वित्तीय, पर्यावरण और स्थिर विकास विषयों पर चर्चा की जाती है। जी-20 देशों के पास विश्व के घरेलू सकल उत्पाद का 80 प्रतिशत, अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 60 से 75 प्रतिशत और विश्व की 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या है।

जी-20 में ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, जापान, फ्रांस, जर्मनी, चीन, भारत, रूस, इटली, इंडोनेशिया, साउथ अफ्रीका, सऊदी अरब, टर्की, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, साउथ कोरिया, मेक्सिको और यूरोपीय यूनियन शामिल है। जबकि स्पेन को स्थायी आमंत्रित अतिथि का दर्ज़ा प्राप्त हैं तथा आसियान देशों में से एक तथा दो अफ्रीकी देश भी आमंत्रित किए जाते हैं।

जी-20 की परिकल्पना जी-7 द्वारा 1999 में बड़े पैमाने पर ऋण संकटों की श्रृंखला के जवाब में की गई थी, जो 1990 के दशक के अंत में उभरते बाजारों में फैल गया था। इसकी शुरुआत मैक्सिकन पेसो संकट 1994 से हुई थी, इसके बाद 1997 का एशियाई वित्तीय संकट, 1998 का रूसी वित्तीय संकट, और अंततः 1998 की शरद ऋतु में लॉन्ग-टर्म कैपिटल मैनेजमेंट (एलसीटीएम) के पतन के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका को प्रभावित किया।

जी-20 का मूल उद्देश्य मध्यम आय वाले देशों को शामिल करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करना है। बाद में इसके एजेंडे को जलवायु परिवर्तन शमन, सतत विकास और अन्य वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए बढ़ाया गया है।

जी-20 कैसे करता है काम?
जी-20 का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है। इसके एजेंडे और काम का समन्वय जी-20 देशों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है, जो राजनीतिक जुडाव, भ्रष्टाचार का विरोध, विकास, उर्जा जैसे मुद्दे पर ध्यान देते हैं, जिन्हें 'शेरपा' के रूप में जाना जाता है। भारतीय जी-20 शेरपा, नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत हैं। जबकि केंद्रीय बैंकों के गवर्नर, वित्त मंत्रियों के साथ मिलकर वित्तीय विनिमय, राजकोषीय मुद्दों एवं मुद्रा पर काम करते हैं।
जी-20 में वार्षिक रूप से, शेरपा बैठक, विशेषज्ञ समूह की बैठक, वित्त मंत्रियों की बैठक, केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक, विदेश मंत्रियों की बैठक और देशों के प्रमुखों का शिखर सम्मेलन और विशेष कार्यक्रम भी पूरे वर्ष आयोजित किए जाते हैं।
जी-20 की अध्यक्षता हर साल सदस्य देशों के बीच घूमती है। जी-20 की अध्यक्षता वाले देश, पिछले एवं अगले अध्यक्ष पद-धारक के साथ, जी-20 एजेंडा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए 'ट्रोइका' का निर्माण करते हैं। इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील अभी ट्रोइका देश हैं।
समूह का अध्यक्ष अन्य सदस्य के साथ बातचीत करके जी-20 एजेंडा को लागू करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास हेतु उत्तरदायी होता है। इस समूह की बैठक हर वर्ष आयोजित की जाती है।

जी-20 सम्मेलनों की अध्यक्षता का इतिहास
पहला सम्मेलन : सयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में 2008 को हुआ
दूसरा : अप्रैल 2009 में लन्दन, यूनाइटेड किंगडम
तीसरी : सितम्बर 2009 में पिट्सबर्ग, अमेरिका
चौथी : जून 2010 में टोरंटो, कनाडा
5 वीं : नवंबर 2010 में दक्षिण कोरिया,
6ठी : नवंबर 2011 में फ्रांस,
7वीं : जून 2012 में मेक्सिको,
8वीं : बैठक सितम्बर 2013 में रूस,
9वीं : नवंबर 2014 में ऑस्ट्रेलिया,
10वीं : तुर्की में नवंबर 2015,
11वीं : सितंबर 2016 में चीन,
12वीं : जर्मनी में जुलाई 2017,
13वीं : दिसंबर 2018 अर्जेंटीना,
14वीं : जून 2019 में जापान,
15वीं : नवंबर 2020 सऊदी अरब,
16वीं : अक्टूबर 2021 में इटली,
17वीं : नवंबर 2022 में इंडोनेशिया,
18वीं बैठक, जो भारत की अध्यक्षता में होनी है, उसका थीम "वसुधैव कुटुम्बकम्" या "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" (वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर) है।

मौजूदा समय में जी-20 के समक्ष चुनौती
रूस और यूक्रेन युद्ध, जिसके चलते अमेरिका, यूरोपीय यूनियन के कई देशों से रूस का टकराव
युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति में असंतुलन, जिसके कारण मुद्रास्फीति में दबाब बढ़ रहा हैं।
मंदी की आशंका के चलते बढ़ती बेरोजगारी (ट्विटर, अमेज़न, इनफ़ोसिस, विप्रो आदि में छटनी)
पर्यावरण में बदलाव
चीन की रणनीतिक वृद्धि

भारत की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण मुद्दे
कोविड़ 19 के कारण छोटे देशों के ऊपर बढता कर्ज़ संकट
विश्व अर्थव्यस्था में मंदी का संकट
कोविड़ 19 के बाद कई देशों ने मांग बढ़ाने के लिए बाज़ार में ज्यादा पैसा दे दिया (सब्सिडी, डीबीटी ट्रांसफर)
विश्व खाद्य कार्यक्रम ने 2023 में खाद्य संकट (बढती कीमत) का अंदेशा ज़ाहिर किया
यूएन में भारत को स्थायी सदस्य का मुद्दा, आईएमएफ, डब्ल्यूटीओ में भी सुधार
देश के प्रमुख 75 विश्वविद्यालयों को जोड़ने की मुहिम
भारत में जी-20 को ऐतिहासिक बनाने के लिए देश के 75 विश्वविद्यालयों के छात्रों को सम्मेलन में कैसे हिस्सा बनाया जाए, इसकी योजना तैयार की जा रही है। इसके अलावा देश में जी-20 से जुड़े कई सेल्फी प्वाइंट आदि बनाए जाएंगे ।
हॉर्नबिल महोत्सव को प्रदर्शित करने की योजना
नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव को जी-20 में प्रदर्शित करने की योजना भी है। जी-20 आयोजन में लगे हर्षवर्धन श्रृंगला (मुख्य समन्वयक) ने नागालैंड के मुख्यमंत्री नीफू रियो के साथ मुलाकात करके महोत्सव को लेकर चर्चा की थी।

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