#Women's Day: महिला दिवस की शुरुआत क्यों हुई?
महिला दिवस की शुरुआत महिलाओं को वोट देने के अधिकार के लिए हुई थी क्योंकि बहुत सारे देश ऐसे थे जहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है।
नई दिल्ली। 08 मार्च को पूरा विश्व 'इंटरनेशनल वूमन्स डे' सेलिब्रेट करता है। नारी के सम्मान का ये दिन हर महिला को उसके अस्तित्व का एहसास कराने के लिए मनाया जाता है।
आइए एक नजर डालते हैं कि आखिर इस दिन की शुरुआत क्यों और कैसे हुई ?

वोट देने का अधिकार
दरअसल महिला दिवस की शुरुआत महिलाओं को वोट देने के अधिकार के लिए हुई थी क्योंकि बहुत सारे देश ऐसे थे जहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है।

28 फरवरी 1909 में
यह दिवस सबसे पहले अमेरिका में 28 फरवरी 1909 में मनाया गया। फिर इस दिवस को फरवरी के अंतिम रविवार को मंजूरी दी गई लेकिन 1990 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन के सम्मेलन में महिला दिवस को इंटरनेशनल मानक दिया गया।

8 मार्च का महिला दिवस
1917 में रूस की महिलाओं ने विरोध किया क्योंकि उनके यहां तब जुलियन कैलेंडर मान्य था और पूरे विश्व में ग्रेगेरियन कैलेंडर। जिसके हिसाब से अंतिम रविवार 8 मार्च को पड़ा क्योंकि फरवरी तो 28 दिन की होती थी इसलिए चौथा रविवार मार्च में गिना गया जो कि पूरे विश्व में मान्य हो गया और तबसे 8 मार्च को महिला दिवस घोषित हुआ जिसे रूस को भी मानना पड़ा।

महिलाओं को हर मौलिक अधिकार प्राप्त
भारत में एक महिला को शिक्षा का, वोट देने का अधिकार और मौलिक अधिकार प्राप्त है यहां तक कि एक महिला को अपने पति की संपत्ति में भी बराबरी का दर्जा रखती है।

श्रद्दा और सम्मान
महिलाओं के सम्मान के लिए घोषित इस दिन का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं के प्रति श्रद्दा और सम्मान बताना है। एक महिला के बिना किसी भी व्यक्ति का जीवन सृजित नहीं हो सकता है इसलिए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में सेलिब्रेट किया जाता है।












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