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भारतीय महिलाओं से जुड़े रोचक तथ्य

चूडी, बिंदियां, घूंघट.. अगर इन सभी की बात की जाएं, तो दिमाग में सबसे पहले भारतीय महिला की छवि सामने आ जाती है लेकिन क्‍या वास्‍तव में सारी भारतीय महिलाएं एक जैसी ही होती हैं? नहीं, भारतीय महिलाओं में काफी विविधता होती है, हर क्षेत्र में भारतीय महिलाएं अच्‍छा काम करती है लेकिन सामान्‍यत: इंडियन वूमन को स्‍कोप न मिल पाने की वजह वह एक जैसी ही हो जाती है जो लोगों के दिमाग में सभी औरतों के लिए एक ही प्रकार की इमेज बना देती है।

भारतीय महिलाएं बहुत मेहनती होती है, उनके लिए परिवार ही प्राथमिकता होती है और वह हमेशा अपना बेस्‍ट देने की कोशिश करती हैं, इसके बावजूद भी भारतीय महिलाओं और पत्नियों पर सबसे ज्‍यादा चुटकुले बनते है, क्‍योंकि उनकी कुछ आदतें वाकई में गजब की होती है, जो आपको एक लिमिट तक अच्‍छी लगें, लेकिन थोडे टाइम बाद झल्‍लाहट होने लग जाये कि ये क्‍या है।

हिंदुस्‍तान में महिलाओं को उनकी आदतों के हिसाब से लोग पुकारना शुरू कर देते हैं, जो ज्‍यादा रोना - धोना मचाएं, उसे मीना कुमारी बुलाते है, जो ज्‍यादा प्‍यार में दीवानी हो, उसे मीरा और जो प्‍यार में हारी हो, उसे पारो। हर औरत को कुछ - कुछ अनोखे नाम मिलते ही रहते है।

भारतीय महिलाओं में बचत करने की आदत बहुत ज्‍यादा होती है, अगर उन्‍हे घर खर्च के लिए हजार रूपए मिलें तो वह सिर्फ 800 ही खर्च करेगी, बाकी के दौ सौ बचत कर लेती है। हिंदु धर्म के पुराणों में बताया गया है कि हिंदी माह लौंद भी देवी पार्वती की बचत का नतीजा है यानि महिलाओं में बचत करने की आदत प्राचीनकाल से ही लगी हुई है।

भारत के अलग-अलग हिस्सों से महिलाओं की तस्वीरें और उनके बारे में कुछ तथ्‍य स्लाइडर में पढ़ें।

रिस्‍क न लेना

रिस्‍क न लेना

सामान्‍यत: भारतीय महिलाएं बहुत घरेलू होती हैं, उन्‍हे कई नए काम करने में हिचकिचाहट होती है और मन में हमेशा डर रहता है। तभी भारत में बहुत कम महिलाओं का नैट बैकिंग एकाउंट होता है क्‍योंकि वह कभी भी रिस्‍क नहीं लेना चाहती हैं।

पहल न करना

पहल न करना

भारतीय महिला के मन में अगर कोई बात है तो वह कभी भी उसकी पहल नहीं करेगी। उनकी ये आदत शुरू से ही होती है, कॉलेज के दिनों में प्‍यार हो, तो भी वह यही सोचेगी कि लड़का प्रपोज करे, शादी के बाद लवमेकिंग हो तो उसमें भी उन्‍हे पार्टनर के पहल करने की जरूरत होती है।

तारीखें याद रखना

तारीखें याद रखना

इंडियम वूमन को डेट्स बहुत याद रहती है। उनकी दोस्‍ती किससे, किस दिन, कब कहां क्‍यों हुई, सारा लेखा जोखा उनके पास रहता है। अगर आप कभी उनसे कोई बात करें तो वह गड़े मुर्दे उखाड़ देगी, ऐसी बातें याद दिलाएगी तो आपको याद ही न हों।

वो ठीक, बाकी सब गलत

वो ठीक, बाकी सब गलत

भारतीय महिलाओं की खास आदत होती है कि वह किसी की बात सुनना नहीं चाहती। उन्‍हे लगता है वह जो कर रही हैं, वो ठीक है और सारे लोग गलत है।

इमोशनल ब्‍लैकमेल

इमोशनल ब्‍लैकमेल

दुनिया में अगर सबसे ज्‍यादा कोई इमोशनल ब्‍लैकमेल के शिकार होते है तो वह भारतीय पुरूष होते है। भारतीय महिलाएं नजदीकी रिश्‍ते में कभी भी बात को सही ढंग से नहीं कहती, वह हमेशा उसे इमोशनल टच देती हैं ताकि कोई भी पिघल जाये और उनकी बात मान ले।

लालची

लालची

लालची शब्‍द, शायद कुछ ज्‍यादा ही हार्ड लगे, लेकिन यह एक फैक्‍ट है। इंडिया की फीमेल 22 साल की उम्र पार करने के बाद लालची हो जाती है, उन्‍हे गहने, रूपए - पैसे, घर गाड़ी, बंगला आदि दिखने लगता है। खुद पर खर्च करने में नहीं चूकेगी लेकिन दूसरे के ऊपर एक रूपए भी खर्च करने में उन्‍हे खुद की सेविंग्‍स का ख्‍याल आ जाएगा।

फाइटर नहीं होती

फाइटर नहीं होती

भारतीय महिलाओं की परवरिश कुछ इस तरीके से होती है कि वह बुरी स्थितियों में फाइट नहीं कर पाती है और तुंरत गिव-अप करके बैठ जाती हैं, कि जो होगा वो राम भरोसे, जबकि दूसरे देशों की महिलाएं अपने ह़क के लिए ज्‍यादा लम्‍बे समय तक लड़ती हैं और भारतीय महिलाओं की अपेक्षा सुसाइड भी कम करती हैं।

सजना-संवरना

सजना-संवरना

हर भारतीय महिला का शौक होता है कि वह खूब सजे, तैयार हो, गहने पहने आदि। यही कारण है कि दुनिया में कॉस्‍मेटिक प्रोडक्‍ट की खपत भारत में भारी संख्‍या में होती है।

जो हां कहें, वो नहीं होता है

जो हां कहें, वो नहीं होता है

भारतीय महिलाओं की ये आदत बहुत खतरनाक होती है, उनका मूड बहुत अजीब और न समझने वाला होता है। वह आपको जिस काम को करने के लिए कहेगी और अगर आप उसे ही करें तो उन्‍हे बुरा लग जाता है। जैसे - अगर उनका पति कहे कि मैं बाहर जा रहा हूं तो बोलेगी कि जाओ, और दस दिन बाद उसी बात को लेकर हंगामा मचा देगी।

लड़कों से तुलना करना

लड़कों से तुलना करना

भारतीय महिला कितने भी अच्‍छे परिवार की हो, लेकिन वो लड़कों और मर्दो से अपनी तुलना हमेशा करती है जैसे - उसे इतना मिला तो मुझे क्‍यों नहीं। इसके पीछे कारण यह है कि वह हमेशा खुद को लड़की होना एक अभिशाप मानती हैं, उन्‍हे ऐसा लगता है कि उन्‍हे भी उतनी ही आजादी चाहिये, जितनी लड़कों को मिलती है।

शिक्षा

शिक्षा

भारतीय महिलाओं की साक्षरता दर 54.6 प्रतिशत है। इस आंकडे के हिसाब से भारत में महिलाओं की शिक्षा दर अन्‍य विकासशील देशों की अपेक्षा कम है।

सुंदरता

सुंदरता

भारतीय महिलाएं, दुनिया में सबसे सुंदर मानी जाती हैं। माना जाता है कि सांवलेपन और खूबसूरती का सबसे अच्‍छा कॉम्‍बीनेशन, इंडिया में देखने को मिलता है।

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