ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेलों में भारत का सबसे खराब प्रदर्शन!

उनका कहना है कि भारत अक्सर इन खेलों में बेहतर प्रदर्शन करता आया है लेकिन इस बार उसके इस प्रदर्शन को देखकर उन्हें काफी निराशा हुई है।
दिल्ली में 101 और ग्लास्गो में सिर्फ 69
भारत ने जब वर्ष 2010 में कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी की थी तो उस समय देश के खाते में सबसे ज्यादा यानी 101 मेडल आए थे जिनमें 38 गोल्ड मेडल थे।
उन खेलों के बाद लोगों को लगने लगा था कि जब भारत ग्लास्गो में जाएगा तो शायद इससे ज्यादा पदक भारत की झोली में आएंगे। भारत को वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक के दौरान छह मेडल हासिल हुए थे।
ओलंपिक के प्रदर्शन और कॉमनवेल्थ खेलों में भारत की अच्छी परफॉर्मेंस के बाद लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं, लेकिन 15 गोल्ड मेडल के साथ वह उम्मीद भी टूट गई।
1998 के बाद सबसे कम गोल्ड
रविवार को जब पारुपल्ली कश्यप ने जब बैडमिंटन में मेन सिंगल्स में देश को स्वर्ण पदक दिलाया तो 32 वर्ष के बाद देश के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ गया। यहीं मुकाम भारत की एक ऐसी कमी की ओर इशारा कर रहा है, जिसके बारे में कम ही लोग बात करना चाहते हैं।
भारत को वर्ष 1998 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद इन खेलों में सबसे कम स्वर्ण पदक हासिल हुए हैं। वर्ष 1998 में भारत को सिर्फ सात गोल्ड मेडल हासिल हुए थे।
सबसे बड़ा दल और गोल्ड मेडल कम
स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में इन खेलों को आयोजन हुआ था और भारत को इस बार पांचवां स्थान हासिल हुआ। आखिर क्यों विशेषज्ञ भारत के प्रदर्शन से निराश हैं और क्यों वह ग्लास्गो के प्रदर्शन को सबसे खराब प्रदर्शन करार दे रहे हैं।
भारत की ओर से इस बार कॉमनवेल्थ खेलों में 200 खिलाडि़यों का दल ग्लास्गो पहुंचा था। यह अभी तक का दूसरा सबसे बड़ा भारतीय दल था जिसे इन खेलों के लिए भेजा गया था।
कुश्ती, वेट लिफ्टिंग और शूटिंग जैसी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर एक बार फिर से तिरंगा लहराया। लेकिन कुछ प्रतियोगिताओं जैसे हॉकी में गोल्ड न मिल पाना भारत की सबसे बड़ी असफलता रही है।
कैसे सच होगा ओलंपिक में गोल्ड मेडल का सपना
खेलों के इतिहासकार बोरिया मजूमदार ने एक लीडिंग अमेरिकन न्यूजपेपर से कहा कि इस बार कॉमनवेल्थ खेलों में टेनिस और आर्चरी जैसे खेलों को बाहर कर दिया गया। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ी अच्छा करते हैं।
साथ ही वह यह भी कहते हैं कि भारत के खराब प्रदर्शन की वजह क्या है यह तो सिर्फ खिलाड़ी ही बता सकते हैं। कॉमनवेल्थ खेलों में इस प्रदर्शन के बाद अब इस बात पर सवाल उठने लगे हैं कि वर्ष 2016 के ओलंपिक में भारत कैसे
स्वर्ण पदक हासिल करेगा। 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत को एक भी गोल्ड मेडल नहीं मिल सका था। कॉमनवेल्थ खेलों में भारत अक्सर ही रूस, अमेरिका और चीन जैसे देशों से आगे रहता है।
अब एशियन गेम्स पर नजरें
सितंबर में साउथ कोरिया में एशियन गेम्स का आयोजन होगा और यह आयोजन खेलों की तैयारियों मद्देनजर भारत के नजरिए को बयां करने के लिए काफी होंगे।
विशेषज्ञों की मानें तो कॉमनवेल्थ खेलों के इस प्रदर्शन पर ज्यादा इतराने की कोई जरूरत नहीं हैं। भारत को अपनी कमजोरियों को स्वीकारना होगा और उन्हें दूर करने की कोशिश करनी होगी।












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