भारत की झुग्गियों में समा सकती है इटली की पूरी जनसंख्या
नई दिल्ली। हम सभी जानते हैं कि भारत की 31 प्रतिशत आबादी देश के शहरी क्षेत्रों में निवास करती है और इसमें से 17 प्रतिशत आबादी यानी 65 मिलयन लोग मलिन बस्तियों यानी कि झुग्गी झोपड़ियों में रहते है जिनकी संख्या पिछले तीन दशकों में डबल हो चुकी है।
आपको जानकर हैरत होगी कि जितने लोग देश के मलिन बस्तियों में रहते हैं ना उतनी संख्या पूरे इटली और यूके की है।एशिया में पहला स्थान और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्लम एरिया मुम्बई का धारावी है।
स्लम में रहने वाली भारतीयों की संख्या इटली की कुल जनसंख्या के बराबर
इस एरिया के 1 वर्ग मील में लगभग दस लाख लोग रहते है। भारत के दस शीर्ष स्लम एरियाओं में दूसरे स्थान पर दिल्ली का भालवासा स्लम है जिसमें दिल्ली की लगभग 20 फीसदी आबादी रहती है तो तीसरा स्थान पर चेन्नई का नोचीकुप्पम, चैथा कोलकाता का बसंती स्लम, पांचवा बैंगलोर का राजेन्द्र नगर स्लम, छठा हैदराबाद का इंदिराम्मा स्लम, सातवां नागपुर का सरोज नगर स्लम, आठवां लखनऊ का मोहिबुल्लापुर स्लम, नौवा भोपाल का सतनामी नगर स्लम और दसवां अहमदाबाद का परिवर्तन स्लम है।
विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्लम एरिया मुम्बई का धारावी
http://www.indiaspend.com के मुताबिक सेंसस ऑफ इंडिया की नजरों में स्लम वो एरिया है जो कि गैरकानूनी और असंवैधानिक रूप से बना हुआ है जो कि पूरी तरह से मानव जीवन के लिए अनफिट है, जहां ना तो पानी है, ना बिजली है, ना शौचालय है और ना ही साफ-सफाई है। कहने का मतलब यह वो संकीर्ण इलाका है जिसमें आम जीवन जीने के लिए कुछ भी नहीं है?

स्लम मतलब जहां ना पानी, ना बिजली और केवल बीमारी
यह एक सोचनीय और चिंताजनक विषय है क्योंकि स्लम एरिया की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और इनके अंदर रहने वाले लोगों को गरीबों में काउंट भी नहीं होते हैं। इनमें से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को चार व्यक्तियों पर 1000 रूपये मिलते हैं वो भी कागज पर क्योंकि सतही ज्ञान के अभाव में इस एरिया में रहने वाले लोगों को पता ही नहीं होता है कि ऐसी कोई सुविधा इनके नाम पर है।
हालांकि नई सरकार ने वादा किया है कि वो देश को स्लम मुक्त करने के लिए प्रयासरत है और इसी कारण उसने बहुत सारी योजनाएं भी पारित की है लेकिन इन योजनाओं को असली जामा कब मिलता है यह तो आने वाल वक्त बतायेगा लेकिन इसमें किसी को शक नहीं कि देश की तरक्की तब तक नहीं हो सकती है जब तक देश से स्लम का कोढ़ नहीं हटेगा और इसमें रहने वाले लोगों को एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य नहीं मिलता।














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