Solar Power: सौर ऊर्जा में भारत के बढ़ते कदम, क्या कोयले पर निर्भरता में कमी होगी?
Solar Power: भारत में सौर ऊर्जा की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आजकल फैक्ट्रियों, दफ्तरों, घरों, और सड़कों पर स्ट्रीट लाइट्स सहित हर जगह बिजली की आवश्यकताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से पूरा किया जाने लगा है। हाल ही में एक थिंक टैंक, एम्बर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 2022 में जनवरी से जून महीने के दौरान, भारत ने सौर ऊर्जा का उपयोग कर पारंपरिक ईंधन की लागत में लगभग ₹420 करोड़ बचाए है। इसी के साथ भारत ने लगभग 1.92 करोड़ टन कोयला भी जलने से बचाया है।

सौर ऊर्जा क्या होती है
सौर ऊर्जा अथवा सोलर एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी का एक माध्यम है जोकि हमें सूर्य से प्राप्त होती है। आधुनिक सौर ऊर्जा की शुरुआत 1839 में हुई, जिसे 19 वर्षीय फ्रांसीसी वैज्ञानिक अलेक्जेंड्रे-एडमंड बेकरेल ने खोजा था। बेकरेल ने शोध के दौरान पाया कि जब उन्होंने सिल्वर-क्लोराइड को एक अम्लीय घोल में रखा और इसे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में लाया, तो इससे जुड़े प्लैटिनम इलेक्ट्रोड ने विद्युत प्रवाह उत्पन्न किया। ऊर्जा को बिजली में बदलने के लिए सोलर सेल पैनल का उपयोग किया जाता है। सौर ऊर्जा स्वच्छ, नवीकरणीय, विश्वसनीय है तथा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
भारत में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं
भारत में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं है। सरकारी आंकड़ों की माने तो भारत में प्राकृतिक रूप से प्रति वर्ष लगभग 5,000 ट्रिलियन kWh सौर ऊर्जा उपलब्ध होती है। इसे ध्यान में रखते हुए, भारत का राष्ट्रीय सौर मिशन 2010 में शुरू किया गया था। अभी देश की 15 फीसद बिजली, सौर ऊर्जा से पूरी हो रही है। पहले 2022 के अंत तक 20GW तक इसे विकसित किया जाना था। हालाँकि, यह आंकड़ा भारत ने चार वर्ष पहले ही छू लिया तो इस लक्ष्य को बढ़ाकर 100 GW कर दिया गया।
सौर ऊर्जा क्षमता मार्च 2014 में 2.6 GW से बढ़कर अक्टूबर 2022 में 60.81 GW हो गई है। सरकार ने कुल 59 सोलर पार्को को मंजूरी दे रखी है जिनकी कुल क्षमता 40 GW है। साथ ही में दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा पार्क गुजरात में बन रहा है जिसकी क्षमता 30 GW है।
भारत सरकार सौर परियोजनाओं के माध्यम से देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने को प्राथमिकता देती है। भारत का लक्ष्य 2030 तक कुल 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी हासिल करना है, जिसमें से 300 GW सौर ऊर्जा से आने की उम्मीद है। वैश्विक परिदृश्य में देखे तो भारत ने अब जर्मनी को पछाड़कर सौर ऊर्जा परिनियोजन में 4था स्थान हासिल कर लिया है।
बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर बढ़ता दवाब
वर्तमान में भारत की ऊर्जा जरूरत की सर्वाधिक आपूर्ति कोयले से बनी बिजली से होती है। सितंबर 2022 में भारत की बिजली खपत सालाना 13.31 प्रतिशत बढ़कर 127.39 BU हो गई है। अप्रैल-सितंबर 2022 के दौरान बिजली की खपत 11.65 प्रतिशत बढ़कर 786.5 BU हो गई थी, जबकि 2021 में इसी अवधि में यह 740.40 BU थी। अप्रैल-सितंबर 2020 में यह 625.33 BU थी।
बिजली की इस बढती मांग के चलते ही कोयले के खनन पर अत्यधिक दवाब बनता जा रहा है। सितंबर 2021 में 51.72 मिलियन टन कोयला निकाला गया था, जिसकी तुलना में वर्तमान में कुल कोयला उत्पादन 12 फीसद बढ़कर 57.93 मिलियन टन हो गया है।
भारत में 5 सबसे बड़े सौर ऊर्जा प्लांट!
भारत में अनेकों सौर ऊर्जा प्लांट बने हुए है। पांच सबसे बड़े सौर ऊर्जा प्लांट की गिनती में सबसे पहले नंबर पर आता है राजस्थान के जोधपुर में बना भड़ला सोलर पार्क जोकि 14000 एकड़ में फैला हुआ है और 2055 MW ऊर्जा का उत्पाद करता है।
दूसरा है कर्नाटक के पालावल्ली में बना पावागढ़ सोलर पार्क जोकि 13000 एकड़ में फैला है और 2000 MW ऊर्जा का उत्पाद करता है। तीसरा, आंध्र प्रदेश के आनंदपुरम में बना NP कुंटा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क जो कि 7924 एकड़ में फैला हुआ है और 1500 MW ऊर्जा का उत्पाद करता है।
चौथा, आंध्र प्रदेश के करनूल में बना करनूल अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क है जोकि 5932 एकड़ में फैला हुआ है और 1000 MW ऊर्जा का उत्पाद करता है।
पांचवा, मध्य प्रदेश के रीवा में बना रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क जोकि 1590 एकड़ में फैला हुआ है और 750 MW ऊर्जा का उत्पाद करती है।
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