15 August 1947: आजादी से एक दिन पहले क्या हो रहा था?
15 August 1947: आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) मना रहे भारतीयों के मन में यह एक बड़ी जिज्ञासा होती है कि 15 अगस्त 1947 से एक दिन पहले क्या हो रहा था? एक तरफ देश में आजादी हासिल करने की खुशी थी तो दूसरी ओर विभाजन और भीषण रक्तपात की वेदना भी थी। शरणार्थियों की नहीं रुकने वाली भीड़ भी देश की राजधानी दिल्ली की ओर बढ़ती आ रही थी। 10 मई 1857 से 15 अगस्त 1947 तक स्वतंत्रता संग्राम में सर्वस्व बलिदान करने वाले क्रांतिकारियों और सेनानियों का स्वप्न साकार हो रहा था। साथ ही उनकी शांति की चाहतों पर बिजली भी गिर रही थी।
14 अगस्त 1947 को भारत का दर्दनाक बंटवारा
ब्रिटेन की संसद में 4 जुलाई 1947 को पेश और 18 जुलाई 1947 को मंजूर किए गए भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर 14 अगस्त 1947 को भारत का बंटवारा कर दिया गया था। इस फैसले से देश को विभाजन का दंश झेलना पड़ा। इससे करोड़ों लोग प्रभावित हुए। बताया जाता है कि देश विभाजन के दौरान हुई हिंसा में करीब 10 लाख लोग मारे गए और करीब 1.46 करोड़ लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा था। भारत विभाजन को लेकर अपने लेख में एलन कैंपबेल-जोहानसन ने लिखा है कि धर्म आधारित मानवीय इतिहास के सबसे बड़े विस्थापन में देश के दो बड़े राज्य पंजाब और बंगाल में करीब 10 करोड़ लोगों का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया था। स्वाधीनता के पांच दिन बाद ही लिखे गए आंकड़ों में एलन कैंपबेल जोहानसन ने दो लाख लोगों को शरणार्थी शिविरों में पाया था। उनकी नारकीय हालात को देखकर डर था कि हैजे की बीमारी न फैल जाए और हजारों लोगों को लील न जाए।

भारत विभाजन की पृष्ठभूमि और पूरी प्रक्रिया, कब-क्या हुआ
इतिहासकारों के मुताबिक देश विभाजन की पूरी पृष्ठभूमि 20 फरवरी 1947 को ही बन गई थी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में ऐलान किया था कि उनकी सरकार 30 जून 1948 से पहले भारतीय नेताओं को सत्ता सौंप देगी। लेकिन एक साल पहले ही लॉर्ड माउंटबेटन ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा कर लिया। लंदन से सत्ता हस्तांतरण की मंजूरी लेकर माउंटबेटन 31 मई 1947 को नई दिल्ली लौटे।
दो जून 1947 को हुई ऐतिहासिक बैठक में भारत की स्वतंत्रता और विभाजन पर लगभग सहमति बन गई। इसके बाद चार जून 1947 को आयोजित ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में माउंटबेटन ने एक साल पहले ही भारत की सत्ता भारतीयों को सौंपने का ऐलान किया। वहां पूछा गया सबसे बड़ा सवाल विभाजन के दौरान लोगों के पलायन से जुड़ा था। माउंटबेटन ने 14/15 अगस्त को आजादी की तारीख के रूप में घोषित किया। अचानक लिए गए इस फैसले पर अमल के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट को 18 जुलाई को भारत का स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पारित करना पड़ा था।
आजादी से एक दिन पहले क्या थी हलचल, माउंटबेटन ने अपने मातहत को क्या सलाह दी थी
डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिंस की किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' के हिंदी अनुवाद 'आधी रात को आजादी" में भी विस्तार से बताया गया है कि आखिर 15 अगस्त से एक दिन पहले 14 अगस्त की आधी रात को भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित क्यों किया गया। इसके साथ ही माउंटबेटन को देश के विभाजन और पाकिस्तान निर्माण की घोषणा क्यों करनी पड़ी। किताब में यह भी कहा गया है कि 'भारतीय ज्योतिषियों के आग्रह के सामने भी वायसराय लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को झुकना पड़ा था।' ज्योतिषियों ने ग्रह-नक्षत्र की स्थितियों की गणना करने के बाद 14 अगस्त को 15 अगस्त से ज्यादा अच्छा बताया था। स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल भी बने वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने नौजवान प्रेस सलाहकार एलन कैंपबेल जोहानसन को अन्य जिम्मेदारियों के साथ यह जिम्मेदारी भी सौंपी थी कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर ज्योतिषियों से मशविरा कर लिया जाए। माउंटबेटन ने अपने मातहत सभी कर्मचारियों को चेतावनी दी कि किसी भी भारतीय से ऐसी बात नहीं की जाए जिससे ब्रिटिश हुकूमत की बू आए।'
यूनियन जैक को उतारा जाना शुरू हो चुका था, लहराने लगा था तिरंगा
14 अगस्त 1947 के ऐतिहासिक दिन का चित्रण करते हुए डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिंस अपनी किताब में लिखते हैं- 'सैन्य छावनियों, सरकारी कार्यालयों, निजी मकानों वगैरह पर फहराते यूनियन जैक को उतारा जाना शुरू हो चुका था। 14 अगस्त को जब सूरज डूबा तो देश भर में यूनियन जैक ने ध्वज-दंडों का त्याग कर दिया, ताकि वह चुपके से भारतीय इतिहास के भूतकाल की एक चीज बन कर रह जाए। समारोह के लिए आधी रात को सभा भवन पूरी तरह तैयार था। जिस कक्ष में भारत के वायसरायों की भव्य ऑयल-पेंटिंग्स टंगी रहा करती थीं, वहां अब अनेक तिरंगे झंडे शान से लहरा रहे थे।' उन्होंने लिखा है, "14 अगस्त की सुबह से ही देश के शहर-शहर, गांव-गांव में आजादी पाने का जश्न शुरू हो गया था। दिल्ली के वाशिंदे घरों से निकल पड़े थे। साइकिलों, कारों, बसों, रिक्शों, तांगों, बैलगाड़ियों, यहां तक हाथियों-घोड़ों पर भी सवार होकर लोग दिल्ली के केंद्र यानी इंडिया गेट की ओर चल पड़े। लोग नाच-गा रहे थे, एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे थे और हर तरफ राष्ट्रगान की धुन सुनाई पड़ रही थी।'
-
New Rules from 1 April 2026: 'LPG के दाम से लेकर ATM के चार्ज तक', आज से बदल गए ये 7 बड़े नियम -
Iran America War: ईरान ने Amazon पर किया हमला, बहरीन का उड़ाया डेटा सेंटर, क्यों है बेहद खतरनाक? -
Assam Polls 2026: असम में फिर खिलेगा 'कमल 'या 'पंजा' करेगा कमाल? ताजा सर्वे ने बताई किसको कितनी सीटें? -
Poonam Pandey ने 14 दिन के लिए की शादी? मुस्लिम पति ने दिया गहरा दर्द, तलाक के 6 साल बाद कैसे हुईं प्रेग्नेंट? -
'यहां पैसा कम मिलता है,' एडम जैम्पा ने IPL को लेकर दिया विवादित बयान, PSL की सैलरी से पकड़ा गया झूठ -
Today Gold Silver Price: जयपुर में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव! खरीदारी से पहले चेक करें आज के रेट्स -
IPS Anshika Verma ने शादी के बाद खेल-खेल में IPS पति केके बिश्नोई को कैसे पछाड़ा? घूंघट में छिपा था राज! -
Kal Ka Match Kon Jeeta 31 March: कल का मैच कौन जीता- PBKS vs GT -
Israel Iran War: कौन था हुसैन अल-जौहरी? जिसे मारने के लिए इजराइल और अमेरिका ने तेहरान तक हिला दिया! -
Ayushi Singh कौन हैं? Vande Bharat Train में ऐसा क्या खाया, जो भयानक सूजे होंठ? बेटा भी बीमार, कटघरे में IRCTC -
War Lockdown Notice क्या है? भारत में क्यों होने लगा सरकारी नोटिस Viral? पर्दे के पीछे का सच करेगा परेशान? -
LPG Gas Cylinder Price Today: यूपी में आज बदल गए रसोई गैस के दाम? सिलेंडर बुक करने से पहले चेक करें रेट लिस्ट












Click it and Unblock the Notifications