Independence Day 2017: जानिए भारत की शान 'तिरंगे' के बारे में कुछ खास बातें

नई दिल्ली। देश आज अपनी आजादी की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथी बार लाल किले से तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया। लालकिले पर जिस वक्त देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराता है तो देश के हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। हवा में लहराता हमारा तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं हैं बल्कि वो भारत की आन-बान-शान और पहचान है।

ध्वज में दिखने वाले तीन रंग और एक चक्र केवल रंगों का समावेश नहीं है बल्कि वो हमें हर वक्त कुछ संदेश देते हैं।

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    आइए जानते हैं देश की पहचान तिरंगे के बारे में कुछ खास बातें....

    भारतीय ध्वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां

    भारतीय ध्वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां

    • भारतीय ध्वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां और नीले रंग का अशोक चक्र अंकित है।
    • इस ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी।
    • इस तिरंगे की रचना 22 जुलाई 1947 में भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था।
    • क्या मतलब है तीन रंगों का?

      क्या मतलब है तीन रंगों का?

      • इसमें तीन रंगीन पट्टियां हैं, जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है।
      • जिनका मतलब है सुख, शांति और समृद्दि।
      • ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात 2:3 है।
      • सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र है जिसमें 24 तीलियां होते हैं।
      • धर्म चक्र का मतलब

        धर्म चक्र का मतलब

        • इस चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है।
        • इसे धर्म चक्र कहते हैं।
        • इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है।
        • इस चक्र का मतलब यह है कि जीवन गति‍शील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है।
        • कुछ मानक तय

          कुछ मानक तय

          • भारतीय ध्वज के लिए हमेशा खादी के कपड़े का इस्तेमाल होता है।
          • तिरंगे के लिए हमारे देश में भारतीय ध्वज संहिता के द्वारा कुछ मानक तय किये गये हैं।
          • जिसके हिसाब से राष्ट्रीय ध्वज को शैक्षिक संस्थानों (विद्यालयों, महाविद्यालयों, खेल परिसरों, स्काउट शिविरों आदि) में ध्वज को सम्मान की प्रेरणा देने के लिए फहराया जा सकता है।

           ध्वजारोहण नहीं हो सकता

          ध्वजारोहण नहीं हो सकता

          • विद्यालयों में ध्वज-आरोहण में निष्ठा की एक शपथ शामिल की गई है।
          • किसी सार्वजनिक, निजी संगठन या एक शैक्षिक संस्थान के सदस्य द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अरोहण/प्रदर्शन सभी दिनों और अवसरों, आयोजनों पर अन्यथा राष्ट्रीय ध्वज के मान सम्‍मान और प्रतिष्‍ठा के अनुरूप अवसरों पर किया जा सकता है।
          • इस ध्वज को सांप्रदायिक लाभ, पर्दे या वस्‍त्रों के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है।
          • शाम पांच बजे के बाद ध्वजारोहण नहीं हो सकता है।
          • इस ध्वज को आशय पूर्वक भूमि, फर्श या पानी से स्‍पर्श नहीं कराया जाना चाहिए।
          • कुछ विशेष परिस्थितियों' में ध्वज को रात के समय सरकारी इमारत पर फहराया जा सकता है।

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