Fake Currency: फिर से बढ़ रहे हैं जाली नोट, क्या नोटबंदी का कोई असर हुआ?
भारत के रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार साल 2021-22 के दौरान, बैंकिंग क्षेत्र में पाए गए कुल जाली करेंसी में से 6.9 प्रतिशत रिजर्व बैंक में और 93.1 प्रतिशत अन्य बैंकों में मौजूद थे।

Fake Currency: 8 नवंबर 2016 की रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक नोटबंदी का ऐलान कर दिया था। उन्होंने कहा कि रात 12 बजे से 500 और 1000 रुपये के नोट अब चलन में नहीं रहेंगे। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण था जाली नोट और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत सरकार, जाली नोटों पर लगाम लगाने में सफल रही है?
आपराधिक आंकड़े क्या कहते हैं?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी यानि साल 2016 के बाद से देश की कई एजेंसियों ने तकरीबन 245.33 करोड़ रुपये के नकली नोट बरामद किये हैं। साल 2021 में 20.21 करोड़ रुपये के 3.10 लाख से ज्यादा नकली नोट जब्त किये गये थे। वहीं इससे पहले साल 2020 में 92.17 करोड़ रुपये के 8.34 लाख नकली नोट पकड़े गये थे। वहीं साल 2019 में 34.79 करोड़ रुपये, साल 2018 में 26.35 करोड़ रुपये और 2017 में 55.71 करोड़ नकली रुपये बरामद किये गये थे। जबकि नोटबंदी वाले साल यानी 2016 में जांच एजेंसियों ने 15.92 करोड़ रुपये पकड़े थे।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी (2016) के पांच साल पहले और बाद के पांच साल के आंकड़ों की तुलना करें तो ज्यादा अंतर नहीं दिखाई देता है। साल 2011 से 2015 के बीच हर साल औसतन 39.50 करोड़ रुपये के नकली नोट जब्त हुए, जबकि साल 2017 से 2021 के बीच सालाना औसतन 36.80 करोड़ रुपये के नकली नोट बरामद हुए हैं। इस लिहाज से तो आंकड़े यही बताते हैं कि नोटबंदी के बाद भी देश में जाली नोटों का धंधा कम नहीं हुआ है।
क्या कहती है आरबीआई की रिपोर्ट?
वित्त वर्ष 2021-2022 में आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) ने नकली नोटों पर एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया कि वित्त वर्ष 2021-2022 में नकली नोटों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक नकली नोटों की संख्या में 101.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
यही नहीं, साल 2020-2021 के मुकाबले साल 2021-2022 में नकली नोटों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसमें 10 रुपये के नकली नोट में 16.4 प्रतिशत, 20 रुपये के नकली नोट में 16.5 प्रतिशत, 200 रुपये के नकली नोट में 11.7 प्रतिशत, 500 रुपये के नकली नोट में 101.9 प्रतिशत और 2000 रुपये के नकली नोट में 54.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल थी। वहीं 50 रुपये के नकली नोटों में करीब 28.7 प्रतिशत और 100 रुपये के नकली नोटों में 16.70 प्रतिशत की कमी आने की बात कही गयी। दरअसल, ये वो नकली नोट हैं जो बैंकिंग सिस्टम में पकड़े गये यानी, बैंकों में नकली नोट आये थे। इनमें से 6.9% नकली नोट आरबीआई में और 93.1% नकली नोट दूसरे बैंकों में पकड़े गये थे।
2000 के नोटों का सर्कुलेशन सरकार ने किया बंद?
नोटबंदी के बाद 2000 रुपए का नोट आया। हालांकि, अब बाजारों में 2000 के नोट चलन में हैं या नहीं? इस मामले पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी सालाना रिपोर्ट में इसे लेकर स्पष्ट जानकारी दी थी। वित्त वर्ष 2019-20, वित्त वर्ष 2020-21 और वित्त वर्ष 2021-22 में 2000 रुपये के एक भी नोट नहीं छापे गये हैं। इस वजह से बाजार में 2000 रुपये के नोट का सर्कुलेशन कम हो गया है।
वहीं साल 2021 में भी जब नोटों की कमी पर सवाल उठे थे तब इस पूरे मामले पर तत्कालीन वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में यह जानकारी दी थी कि पिछले दो साल से 2000 रुपये के एक भी नोट की छपाई नहीं हुई है। इसलिए 2000 के नोटों की कमी हुई है। साल 2019 में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी अपने बयान में कहा था कि अनुमानित जरूरतों के मुताबिक नोटों की छपाई की योजना बनती है। सिस्टम में कुल सर्कुलेशन के 35 प्रतिशत 2000 रुपये के नोट हैं। यह मात्रा पर्याप्त से अधिक है।
कहां से आते हैं ये नकली नोट?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नकली नोटों का सबसे ज्यादा कारोबार नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते होता है। नकली नोटों की तस्करी और प्रचलन को रोकने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किये गये हैं। साथ ही नकली नोट से संबंधित मामलों की पहचान, जांच और प्रभावी अभियोजन के क्षेत्रों में अपनी क्षमता विकसित करने के लिए भारत, बांग्लादेश और नेपाल पुलिस के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता रहा है।
वहीं साल 2022 की एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में पश्चिम बंगाल में जाली नोटों के 82 मामले सामने आए थे, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद असम में 75 मामले दर्ज किये गये। जबकि तमिलनाडु में 62 मामले, महाराष्ट्र में 55 मामले, राजस्थान में 54 मामले और उत्तर प्रदेश में 42 मामले दर्ज किये गये।
यह पहली बार नहीं था जब पश्चिम बंगाल, इसमें भी खासकर मालदा क्षेत्र, जो बांग्लादेश और नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को साझा करता है। वहां इस तरह के सबसे अधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि वहां भी अब इसमें कमी आई है। साल 2019 में पश्चिम बंगाल ने नकली बैंक और करेंसी नोटों के 208 मामले, 2020 में यहां 109 मामले दर्ज किये गये थे।
नकली नोटों को रोकने के लिए सरकार की पहल?
देश में नकली नोटों के प्रचलन को लेकर केंद्र सरकार बहुत ही ज्यादा गंभीर है। इसके लिए समय-समय पर नकली नोटों की पहचान करने के लिए विज्ञापन जारी किये जाते हैं। वहीं इस समस्या से निपटने के लिए राज्यों और केंद्र की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा एफआईसीएन (Fake Indian Currency Notes - FICN) समन्वय समूह यानि एफसीओआरडी (FCORD) का गठन किया गया है। साथ ही टेरर फंडिंग और नकली मुद्रा मामलों की संगठित जांच करने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में एक टेरर फंडिंग एंड फेक करेंसी सेल (TFFC) की भी स्थापना की गयी है।
नकली नोटों के कारोबारी सजा से क्यों नहीं डरते?
आईपीसी (इंडियन पीनल कोड) की धारा 489 के तहत नोटों की जालसाजी करना अपराध है। इसके तहत कोई भी भारतीय करेंसी की जालसाजी करता पाया गया तो उसे 10 साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती हैं। साथ ही जुर्माना भी लग सकता है। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर अपने पास नकली नोट रखता है ताकि उसका इस्तेमाल किया जा सके, तो ऐसे मामलों में दोषी पाये जाने पर 7 साल तक की कैद हो सकती है।
हालांकि, इतनी कड़ी सजा होने के बाद भी जाली करेंसी लगातार बढ़ती जा रही है। दरअसल, जो अधिकारिक आंकड़े सामने आते हैं वह जालसाजी की सही तस्वीर नहीं बताते। जिन जाली नोटों की सरकारी एजेंसियां बरामदगी कर रही है वह 'टिप ऑफ दी आइसबर्ग' (असल मात्रा का बेहद छोटा हिस्सा) जैसे हैं। दरअसल, उससे कई गुना नकली नोट सर्कुलेशन में आ चुके हैं। वहीं जाली नोटों के अवैध कारोबार में मुनाफा भी बहुत ही ज्यादा हैं। जैसे 500 रुपये का एक नोट छापने में आरबीआई को तकरीबन ढाई से तीन रुपये खर्च करने पड़ते हैं जबकि कोई इसका नकली नोट बनाता है तो वो एक जाली नोट बनाने में अगर 100 रुपये खर्च करता है, तो भी उसे 400 रुपये का सीधा फायदा होता हैं।
कैसे करें नकली नोटों की जांच
एचडीएफसी की वेबसाइट के मुताबिक नकली नोटों की पहचान के कई तरीके हैं लेकिन सबसे आसान तरीका है आप 'भारतीय रिजर्व बैंक' शब्दों की टाइपोग्राफी की जांच कर सकते हैं। ये शब्द नकली नोट पर मोटे दिखाई देंगे, जबकि असली नोट पर ये कहीं ज्यादा चिकने लगते हैं। इसी तरह, आप गांधीजी की छवि और 'भारतीय रिजर्व बैंक' के बीच सूक्ष्म अक्षरों को देख सकते हैं। लेटरिंग अपेक्षाकृत छोटी है और एक बैंड पर दिखाई देती है। इस प्रिंट की स्थिरता की जांच करने के लिए आपको एक आवर्धक कांच (मैगर्नीफाइंग ग्लास) की आवश्यकता होगी।
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