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Artificial Intelligence: डिजिटल क्रांति का युग लेकिन भारत का योगदान भी महत्वपूर्ण

डिजिटल क्रांति के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके जरिए हमारा जीवन बेहद आसान हो गया है।

important contribution of India in Artificial Intelligence Era of digital revolution

Artificial Intelligence: Google For India 2022 इवेंट में टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल ने कई नये फीचर्स की घोषणा की है, जिनमें AI यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक इतनी सक्षम है कि किसी डॉक्टर द्वारा लिखे गये मेडिकल प्रिसक्रिप्शन को भी पढ़ सकती है। यानि अभी तक डॉक्टर की जिस लिखावट को पढ़ने में हमें दिक्कत आती थी, उसे गूगल का सॉप्टवेयर आसानी से पढ़ लेगा। इस तकनीक का फायदा मेडिकल स्टोर चलाने वाले दवा विक्रेताओं को होगा और वे सही दवाई निकाल सकेंगे।

हालांकि, गूगल ने अपने ब्लॉग पोस्ट में बताया कि उसका यह फीचर फिलहाल डेवलप हो रहा है और इसका ट्रायल किया जा रहा है। आने वाले कुछ महीनों या सालों में यह तकनीक बेहतर तरीके से काम करेगी, जिससे लोगों को काफी मदद मिलेगी। गूगल की तरह ही अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके ऐसे उपकरण और सॉफ्टवेयर बना रही हैं, जो हमारे रोजमर्रा के कामों को आसान कर देंगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैसे काम करता है

वर्तमान में इस्तेमाल होने वाला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अभी भी प्रोग्राम और कमांड के बिना काम नहीं कर सकता है - जिसे मशीन लर्निंग (ML) के रूप में जाना जाता है। इसका मतलब है कि AI एक पालतू जानवर की तरह है - जिसे प्रशिक्षित करने की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, एल्गोरिदम के पैटर्न पर काम करते हैं। एल्गोरिदम शब्द पर्शियन विद्वान अल-ख्वारिजमी (Al-khwarizmi) के नाम से आया है। 9वीं शताब्दी में बगदाद में लिखे गए उनके ग्रंथ 'हिंदू अंकों के साथ गणना' में भी इस टर्म का इस्तेमाल किया गया है।

कौन हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आविष्कारक

कम्प्यूटर साइंस में रिसर्च करने वाले कई वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी का लंबे समय से इस्तेमाल कर रहे हैं। 1950 के दशक में John McCathy ने कम्प्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काफी काम किया था, जिसकी वजह से उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पिता (Father of AI) भी कहा जाता है। उन्होंने कहा था कि साइंस और इंजीनियरिंग मशीन को स्मार्ट बनाने के लिए ही हैं।

भारत में कब हुई इस आधुनिक डिजिटल क्रांति की शुरुआत

भारत में इंफॉर्मेंशन टेक्नोलॉजी (IT) का विकास 70 के दशक में शुरू हुआ। इसमें मशहूर आईआईटीयन और प्रोफेसर एचएन महाबाला का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महान वैज्ञानिक डॉक्टर होमी भाभा ने 1959 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च (TIFR) को पत्र लिखकर भारत में कम्प्यूटर एजुकेशन की जरूरत के बारे में बताया था। साल 1962 में TIFR ने पहला डिजिटल कम्प्यूटर साइंटिफिक ऐप्लीकेशन TIFRAC रिलीज किया। इसके बाद 1965 में IIT कानपुर ने भारत में पहली बार MTech कम्प्यूटर साइंस कोर्स की शुरुआत की। यहीं से भारत में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की नींव पड़ गई। एचएन महाबाला ने 70 के दशक में IIT मद्रास में MTech कम्प्यूटर साइंस प्रोग्राम शुरू करवाया जिसमें एडमिशन लेने वाले पहले कुछ छात्रों में इंफोसिस के को-फाउंडर क्रिस गोपालकृष्णन भी थे।

वैदिक समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग के बहुत सारे उदाहरण हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में देखने को मिलते हैं। 4G और 5G कम्युनिकेशन आने के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव हमारी जिंदगी पर और ज्यादा पड़ा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से आज हम चुटकियों में कई काम कर पाते हैं, इसकी शुरुआत वैदिक समय से ही हो चुकी थी।

साल 2019 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च स्कॉलर Adreiene Mayor (एड्रिन मेयर) ने अपनी किताब 'Gods and Robots: Myth, Machines and Ancient Dream of Technology' में कई ऐसी बातें बताई हैं, जिनमें पुरानी सभ्यताओं में भविष्य की टेक्नोलॉजी की झलक दिखती है। उन्होंने अपने रिसर्च में लिखा है कि करीब 2,700 साल पहले रोबोट्स और ऑटोनोमस मशीनों की कल्पना की गई थी।

डिजिटल क्रांति में शून्य का महत्व

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एल्गोरिदम बाइनरी लैंग्वेज (binary language), जिसे हम कम्प्यूटर की भाषा भी कहते हैं, पर निर्भर होता है। बाइनरी लैंग्वेज गणित के दो अंक जीरो और एक के कॉम्बिनेशन से बनते हैं। अंकों का मूल शब्द डिजिट (Digit) है, जिससे डिजिटल (Digital) शब्द का जन्म हुआ है। अंग्रेजी में जिसे हम जीरो कहते हैं, उसे संस्कृत यानी वैदिक भाषा में शून्य कहते हैं। ऋगवेद में ऋषि मुनियों ने शून्य शब्द का इस्तेमाल किया है, जो शून्यम से आया है। इसका मतलब है कुछ भी नहीं, यह खुद में कुछ नहीं है लेकिन सबकुछ है। विज्ञान और गणित में इसके बिना कुछ भी संभव नहीं है।

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