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Electric Vehicle बन रहे लोगों की पसंद, जानें मार्केट से लेकर फायदे और नुकसान के बारे में

नयी कार खरीदने वालों के लिए बाजार में अब पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कारों के साथ-साथ Electric Vehicle का भी विकल्प उपलब्ध हैं। पिछले दिनों में स्कूटर, बाइक समेत ऐसे वाहनों की मांग में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है।

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Electric Vehicle: इलेक्ट्रिक व्हीकल - Electric Vehicle को शार्ट फॉर्म में EV भी कहा जाता है। देश में EV की बिक्री में पिछले दो वर्षों में भारी उछाल देखा गया है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में यह पारंपरिक पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वाहनों की बिक्री को कड़ी टक्कर देगा। सरकार ने लोकसभा में बताया है कि जहां 2020-21 में 48,179 इलेक्ट्रिक व्हीकल की बिक्री हुई, वहीं 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 237,811 हो गया और 2022-23 में इनकी कुल संख्या 442,901 हो गयी है।

कैसे अलग है EV, पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वाहनों से

ये वाहन पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बजाय बिजली से चलते हैं, इसलिए इन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल कहा जाता है। दरअसल, EV में इंटरनल कंबस्शन इंजन (ICE) के स्थान पर इलेक्ट्रिक मोटर लगी होती है। एक तरफ EV पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, तो दूसरी तरफ प्रति किलोमीटर इनकी एवरेज भी बेहद किफायती रहती है। अभी बाजार में EV के चार प्रकार मौजूद हैं -

बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV): बैटरी द्वारा चलने वाले इन वाहनों में बैटरी होती है, न कि इंटरनल कंबस्शन इंजन। BEV के कुछ उदाहरण हैं जिसमें टाटा की नेक्सन, टिगोर, एमजी की EV, हुंडई की कोना इलेक्ट्रिक, मिनी इलेक्ट्रिक, और Kia EV6 शामिल हैं।

हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (HEV): ये कारें इंटरनल कंबस्शन इंजन (ICE) सहित एक या अधिक इलेक्ट्रिक मोटर्स के संयोजन द्वारा चलती हैं। टोयोटा प्रियस, फोर्ड एस्केप हाइब्रिड इसके कुछ उदाहरण हैं।

प्लग इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV): यह कारें एक इलेक्ट्रिक मोटर को पावर देने के लिए बैटरी और इंटरनल कंबस्शन इंजन को पावर देने के लिए गैसोलीन या डीजल जैसे ईंधन का उपयोग करती हैं। टोयोटा कोरोला, वोल्वो XC40, बीएमडब्ल्यू 3-सीरिज PHEV के कुछ उदाहरण हैं।

फ्यूल सैल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV): इन्हें हाइड्रोजन इलेक्ट्रिक कारों के रूप में जाना जाता है। यह कारें हाइड्रोजन से उत्पन्न बिजली को एक शक्ति के रूप में इस्तेमाल करती हैं। टोयोटा मिराई और हुंडई नेक्सो FCEV के कुछ उदाहरण हैं।

भारत में EV मार्केट को लेकर संभावनाएं

भारत सरकार की इन्वेस्ट इंडिया वेबसाइट के अनुसार वर्ष 2023 तक भारत का EV मार्केट $2 बिलियन का होगा और 2025 तक इसके $7.09 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है। गौरतलब है कि EV कंपनियों में निवेश भी 255 प्रतिशत बढ़कर $444 मिलियन हो गया है। भारत सिर्फ EV प्रोडक्शन पर ही नहीं बल्कि उसकी जरूरतों पर भी ध्यान दे रहा हैं जैसे 2022 में, भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशनों की कुल संख्या में 285 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2026 तक 4 लाख EV चार्जिंग स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

विश्व में EV का मार्केट कितना बड़ा है

विश्व के EV मार्केट में सबसे बड़ा शेयर एलन मस्क की टेस्ला का है जो कुल मार्केट का 14 प्रतिशत है। दुनिया भर में 2021 में 65 लाख से भी ज्यादा EV बिके जोकि 2020 से 109 प्रतिशत ज्यादा थे। वहीं 2021 में चीन में लगभग 35 लाख EV बिके जो दुनियाभर में बेचे गये ऐसे वाहनों का लगभग 50 प्रतिशत था। वेंटेज मार्केट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक EV का बाजार 2021 में लगभग $165 बिलियन था और 2028 तक इसके $434 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

क्या हैं EV के फायदे

किफायती: भले ही EV खरीदने में महंगी हो लेकिन उनको चलाने की कॉस्ट बहुत कम होती है। जहां किसी भी पेट्रोल या डीजल गाड़ी की रनिंग कॉस्ट औसतन ₹4-5 प्रति किलोमीटर होती है वही EV की रनिंग कॉस्ट ₹1-2 प्रति किलोमीटर होती है। EV का मेंटेनेंस भी पेट्रोल या डीजल गाड़ी के मुकाबले बहुत कम होता है।

सब्सिडी: पेट्रोल या डीजल वाहनों की तुलना में EV का पंजीकरण और रोड टैक्स कम खर्चीला है। साथ ही EV खरीदने पर कई तरह की सरकारी सब्सिडी भी मिलती हैं जैसे परचेज इंसेंटिव, कूपन, ब्याज अनुदान, रोड टैक्स में बचत, पंजीकरण फीस में छूट, आयकर फायदे, और स्क्रैपिंग इंसेंटिव।

पर्यावरण की सुरक्षा: EV न के बराबर शोर करती है, इसलिए ध्वनि प्रदूषण नहीं होता। वही पेट्रोल या डीजल से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने का भी EV एक अच्छा विकल्प है।

ड्राइव करने में आसान और शांत: EV चलाना एकदम आसान है क्योंकि इसमें गियर की झंझट नहीं होती।

EV के कुछ नुकसान भी ध्यान में रखें

रेंज और चार्जिग स्टेशन: पेट्रोल या डीजल के पंप तो आपको कहीं भी मिल सकते हैं लेकिन अभी EV के चार्जिंग स्टेशन बहुत कम हैं। इसलिए या तो आपको घर से अथवा उपलब्ध चार्जिग स्टेशन से अपनी EV को चार्ज करवाना होगा। अगर आप जल्दी में हैं और आपकी बैटरी भी low है तो आपको रास्ते में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, EV सिंगल चार्ज में फिलहाल 300-400 किलोमीटर तक ही जा सकती है। ध्यान रखें कि अभी EV शहरों के लिए अनुकूल है, अगर आप लॉन्ग ड्राइव पर दूरदराज के इलाकों में चले जाते हैं तो आपको चार्जिंग की समस्या होगी।

कोयले से बिजली: भारत में अधिकतर बिजली कोयले से बनती हैं। इसलिए EV को चार्ज करने के लिए जिस बिजली का प्रयोग हो रहा है वह भी कहीं न कहीं पर्यावरण को प्रदूषित कर हमारे पास पहुँचती है।

स्पीड: यह इसका सबसे बड़ा नुकसान है। दरअसल, EV पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वाहनों के मुकाबले रफ्तार नहीं पकड़ सकते। बैटरी low होने पर रफ्तार की समस्या और बढ़ सकती है।

यह भी पढ़ें: Green Fuel: हरित ईंधन क्या होता है, किसानों और पर्यावरण के लिए कैसे है यह लाभदायक

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