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IIT Kharagpur: खड़गपुर में शहीद स्थल पर स्थापित है देश का पहला आईआईटी

IIT Kharagpur: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर (आईआईटी खड़गपुर), भारत सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में स्थापित एक प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान है। इस संस्थान की नींव 18 अगस्त, 1951 के दिन रखी गई थी। यह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों की पहली श्रेणी में आता है। साल 2019 में भारत सरकार ने इसे "इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस" के रूप में मान्यता दी है।

यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में भारत में उच्च प्रतिष्ठा वाले संस्थानों में सम्मिलित है। इसका मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान करना था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में संस्थान ने शैक्षिक क्षेत्र में प्रबंधन, कानून, वास्तुकला, मानविकी आदि में विविधता की ओर बढ़त दर्ज की है। आईआईटी खड़गपुर के कैम्पस का क्षेत्रफल 8.7 वर्ग किलोमीटर है।

IIT Kharagpur: The countrys first IIT is established at the martyrs site in Kharagpur

आईआईटी निर्माण की आवश्यकता

वायसराय "लॉर्ड वैवेल" (1944-1947) के कार्यकारी परिषद के सदस्य सर जोगेंद्र सिंह ने एक समिति की स्थापना की जिसका उद्देश्य "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत के औद्योगिक विकास के लिए" था। बाद में नलिनी रंजन सरकार की अध्यक्षता वाली 22 सदस्यीय समिति द्वारा एक अंतरिम रिपोर्ट में भारत में उच्च तकनीकी संस्थानों की स्थापना के लिए मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और इलिनोइस विश्वविद्यालय की तर्ज पर बनाने की सिफारिश की थी। साथ ही संबद्ध माध्यमिक संस्थानों के साथ सहयोग की भी मांग की। रिपोर्ट में जिक्र किया गया कि देश के चारों प्रमुख कोनों अथवा महानगरों में प्रमुख संस्थानों की स्थापना की जानी चाहिए। पूर्व और पश्चिम में तो तुरंत इसकी स्थापना करने की सिफारिश की गई थी।

प्रथम आईआईटी खड़गपुर का इतिहास

प्रथम आईआईटी देश के पूर्व में स्थापित करने का मूल आधार पश्चिम बंगाल में औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कारखानों की संख्या देश के किसी भी हिस्से से अधिक होना था। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय ने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से सहमति प्राप्त की और पश्चिम बंगाल में पहले प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना के लिए अनुमति ली गई। इस प्रकार, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की नींव मई 1950 में पूर्वी उच्च तकनीकी संस्थान (Eastern Higher Technical Institute) के रूप में रखी गई थी। यह स्थान एस्प्लेनेड ईस्ट, कलकत्ता (अब कोलकाता) में स्थित था और सितंबर 1950 में कोलकाता से 120 किलोमीटर दूर खड़गपुर जिले के हिजली नामक स्थायी कैम्पस में स्थानांतरित कर दिया गया। हिजली जो ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता आंदोलनकारियों का बंदी शिविर था जिसे बाद में शहीद स्थल के रूप में जाना जाता था।।

शहीद स्थल पर स्थापित हुआ देश का पहला आईआईटी

18 अगस्त 1951 को देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद द्वारा अधिकृत उद्घाटन से पहले इस संस्थान का नाम "भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान" रखा गया था। इसके बाद, 18 मई 1956 को लोकसभा में एक विधेयक (1956 का विधेयक संख्या 36) प्रस्तुत किया गया, जिससे "आईआईटी, खड़गपुर" को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण संस्थान घोषित किया गया और उसके मैनेजमेंट का प्रावधान किया गया। संस्थान के आदर्श वाक्य भगवद गीता के अध्याय 2, श्लोक 50 से "योगः कर्मसु कौशलम्" लिया गया है और इसके शुभंकर में पवित्र अंजीर के वृक्ष को सम्मिलित किया गया।

इसके बाद, 15 सितंबर 1956 को "भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (खड़गपुर)" अधिनियम, 1956 को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई। आईआईटी खड़गपुर के पहले दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने भी भाग लिया और ऐतिहासिक भाषण देते हुए कहा था, "ऐतिहासिक हिजली बंदी गृह (शहीद स्थल) जो भारत के बेहतरीन स्मारकों में से एक है, अब भारत के नये भविष्य के रूप में बदल रहा है। यह दृश्य मुझे उन परिवर्तनों का आभास कराता है जो कि भारत में हो रहे हैं।"

आईआईटी खड़गपुर का वर्तमान स्वरूप

आईआईटी खड़गपुर के वर्तमान परिसर और बिल्डिंगों का डिजाइन और लेआउट स्विट्जरलैंड के वास्तुकार वर्नर एम. मोजर के मार्गदर्शन में इंजीनियरों और वास्तुकारों के एक समूह द्वारा किया गया था। 2023 में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यहां कुल छात्र 14,503 हैं। इनमें स्नातक में 3,644, स्नातकोत्तर में 7,212 और डॉक्टरेट में 3,647 स्टूडेंट हैं। लगभग 2000 कर्मचारी भी नियुक्त हैं। इसका कैंपस 2,100 एकड़ (850 हेक्टेयर) में फैला है। यह देश के अन्य आईआईटी संस्थानों से विशाल है।

इसमें 25 से अधिक केंद्रीय अनुसंधान और विकास इकाइयों के अलावा 19 शैक्षणिक विभाग, आठ बहु-विषयक केंद्र/स्कूल और 13 उत्कृष्टता स्कूल हैं। यहां का केंद्रीय पुस्तकालय अपने प्रकार के सबसे बड़े पुस्तकालयों में से एक है। इसके संग्रह में 350,000 से अधिक पुस्तकें और दस्तावेज़ शामिल हैं, और 1,600 से अधिक मुद्रित और ऑनलाइन पत्रिकाओं के अतिरिक्त सीडी, डीवीडी, फ्लॉपी और अन्य ड्राइव भी है। इस उच्च संस्थान से उत्तीर्ण छात्र विश्व स्तर पर भारतीयता की पहचान बने हैं। जिसमें गूगल के सीईओ सुंदर पिचई और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव को काफी चर्चित हैं।

नेहरू से मोदी तक देश में बने 23 आईआईटी

प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश में 23 आईआईटी का निर्माण हो चुका है। इनमें 7 आईआईटी पीएम मोदी के कार्यकाल में बने हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 5 सितंबर 2019 को भारत में चार सार्वजनिक संस्थानों के साथ-साथ आईआईटी खड़गपुर को "इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस" का दर्जा दिया गया है। इसके कारण आईआईटी पूर्ण स्वायत्तता और विशेष प्रोत्साहन प्राप्त करने में सक्षम होगा। आईआईटी का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी की उच्चतम शिक्षा प्रदान करना, प्रासंगिक क्षेत्रों में अनुसंधान करना, ज्ञान और शिक्षा के प्रसार को संवर्धित करना है। ये संस्थान मूलभूत विज्ञान और मानविकी में शिक्षा और अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

क्या है आईआईटी में प्रवेश की पूरी प्रक्रिया

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने के लिए आपको जेईई मेन्स और जेईई एडवांस्ड की परीक्षा के माध्यम से आवेदन करना होता है। आपको इन दोनों परीक्षाओं में उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इन परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर आपकी रैंकिंग तय की जाती है। इससे आपकी प्रवेश की स्थिति निर्धारित होती है। प्रत्येक आईआईटी संस्थान के अलग-अलग कट ऑफ अंक होते हैं, जो आपकी प्रवेश संभावनाओं को निर्धारित करते हैं। स्नातकोत्तर एवं पीएचडी प्रवेश हेतु लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार भी आवश्यक होता है।

आईआईटी के शैक्षणिक कार्यक्रम, उनके समारोह और नेटवर्क

आईआईटी द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों के तहत उच्चतम स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती। इनमें अवर स्नातक कार्यक्रम (UG Program), विशेषज्ञता के साथ स्नातकोत्तर कार्यक्रम और विभिन्न इंजीनियरिंग और विज्ञान क्षेत्रों, अंतःविषय क्षेत्रों में पीएच.डी. कार्यक्रम प्रदान करते हैं। वर्तमान में, आईआईटी द्वारा बी.टेक., बी.आर्क, एम.एससी., एम. डिजाइन, एम.फिल., एम.टेक, एमबीए और पीएच.डी. डिग्री प्रदान करते हैं।

IITs की शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित है और ये संस्थान उद्योग में उभरते रुझानों के साथ-साथ पाठ्यक्रम का मूल्यांकन और उनमें संशोधन भी करते रहते हैं। उनके गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम द्वारा वे अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के ज्ञान को अपडेट करने में भी योगदान करते हैं। प्रत्येक वर्ष होने वाली प्रतियोगिताएं एवं उत्सव इसकी खास पहचान है। उनमें क्षितिज उत्सव, इलू, स्प्रिंग फेस्ट, ऑनलाइन विटवाइज, प्रोग्रामिंग, रोबोटिक्स एवं अन्य खेल भी शामिल हैं। आईआईटी खड़गपुर LAOTSE का भी सदस्य है, जो एशिया और यूरोप शैक्षणिक छात्रों और वरिष्ठ विद्वानों का आदान-प्रदान करने वाले विश्वविद्यालयों का एक बड़ा नेटवर्क है।

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