Human Trafficking: बिना वीजा उज्बेकिस्तान से भारत कैसे पहुंच रही हैं लड़कियां?
Human Trafficking: पौने दो साल पहले 27 अक्टूबर 2021 को बिना किसी दस्तावेज के अवैध तरीके से नेपाल से भारतीय सीमा में घुसपैठ करते हुए उज्बेकिस्तान की तीन महिलाओं और दो भारतीय युवकों को एसएसबी (सीमा सुरक्षा बल) ने गिरफ्तार किया था। ये पांचों एक ऑटो पर सवार होकर नेपाल से भारत में प्रवेश कर रहे थे। इनकी गिरफ्तारी के बाद इन्हें बिहार के अररिया जेल में भेज दिया गया।
तकरीबन 18 महीनों तक ये उज्बेकिस्तानी लड़कियां बिहार की जेलों और डिटेंशन सेंटर में रही। ये तीनों उज्बेकिस्तान से दुबई पहुंची और वहां से नेपाल होते हुए बिना वीजा के भारत में घुसपैठ के दौरान पकड़ी गयी थी। दरअसल यह मामला सिर्फ घुसपैठ तक सीमित न होकर बल्कि मानव-तस्करी और जिस्मफरोशी से जुड़ा हुआ है। आइये समझते हैं क्या है पूरा मामला।

कोर्ट ने माना मानव तस्करी का पीड़ित
तकरीबन 10 महीने की सुनवाई के बाद अररिया कोर्ट ने 8 अगस्त 2022 को इन तीनों लड़कियों को उज्बेकिस्तान डिपोर्ट करने का फैसला सुनाया। यह आदेश उन्हें निर्दोष मानते हुए और मानव तस्करी का पीड़ित बताने के नाते आया था। इसके बाद इन्हें बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शन एडमिनिस्ट्रेशन (BICA) हाजीपुर भेज दिया गया।
लड़कियों को छुड़ाने पहुंची बड़ी बहन
ताशकंद टाइम्स के मुताबिक बिहार बॉर्डर पर पकड़ी गयी उज्बेकिस्तानी लड़कियों को अभी तक उनके देश डिपोर्ट नहीं किया गया है। इसे लेकर उन तीनों लड़कियों की बड़ी बहन उन्हें छुड़ाने के लिए भारत में तकरीबन डेढ़ साल से बिहार के अलग-अलग थानों और कोर्ट के चक्कर काट रही थी। मगर भारत में उज्बेकिस्तान के दूतावास, मानवाधिकार संगठन और परिवार की कड़ी मशक्कत के बाद अब वे सभी रिहा हो सकी हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल ये तीनों लड़कियां दिल्ली में है। एक एनजीओ की मदद से इन्हें बिहार के बीआईसीए सेंटर से निकाला गया था। इनकी रिश्तेदार का आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी उन्हें डिपोर्ट नहीं किया गया। बिहार के बीआईसीए में वे 10 महीनों से हैं और वहां उनके साथ कुछ गलत हो रहा है। हालांकि, फिलहाल अब ये तीनों लड़कियां दिल्ली की आजाद हवा में सांस ले रही हैं और जल्द से जल्द अपने देश लौटने का इंतजार कर रही हैं।
कैसे भारत पहुंचती हैं ये लड़कियां
संयुक्त राष्ट्र की 'ऑफिस ऑफ ड्रग एंड क्राइम' की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत पश्चिम एशियाई देशों में थाइलैंड और सेंट्रल एशियाई देशों से सबसे ज्यादा लड़कियां मानव तस्करी के जरिये भेजी जाती हैं। सेंट्रल एशियाई देशों जैसे उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और कजाकिस्तान से लड़कियों को पहले दुबई या अफगानिस्तान लाया जाता है। यहां से उन लड़कियों को नेपाल से सड़क के रास्ते से भारत में दाखिल कराया जाता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक केवल 2020 (कोरोना काल) में 3,661 मानव तस्करी के मामले सामने आये थे।
ऑर्ब्जबर रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक साल 2021 में दक्षिण एशियाई देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में मानव तस्करी के तकरीबन 150,000 मामले दर्ज किये गये। खासकर भारत में नेपाल, बांग्लादेश और भूटान में शामिल मानव तस्करी सबसे ज्यादा होती है। भारत और नेपाल के बीच ओपन बॉर्डर ने मानव तस्करी की स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ दिया है। हर साल तकरीबन 30,000 से ज्यादा नेपाली नागरिक मानव तस्करी के शिकार बन जाते हैं।
इन लड़कियों को रशियन बताकर बेचा जाता है?
कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वेश्यावृति के बाजार में उज्बेकिस्तान की लड़कियों को अक्सर रूसी लड़कियों के नाम से बेच दिया जाता है। क्योंकि, उज्बेकिस्तान और दूसरे सेंट्रल एशियाई देश पहले सोवियत संघ का ही हिस्सा थे। इन देशों की लड़कियां एक जैसी ही दिखती हैं और एकसमान भाषा भी बोल सकती हैं।
कब-कब पकड़ी गईं उज्बेकिस्तानी लड़कियां
● 3 मई 2023 को सोनबरसा बॉर्डर से ही एसएसबी ने उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं समेत एक भारतीय पुरुष को हिरासत में लिया था। दोनों महिलाओं का नाम रेनो एवं उगिलजोंन था।
● जून 2023 में बीएसएफ ने भारत-पाक सीमा के पास संदिग्ध अवस्था में घूम रही एक उज्बेकिस्तान की महिला को गिरफ्तार किया था। वह पंजाब के रास्ते पाकिस्तान में घुसने का प्रयास कर रही थी।
● मई 2023 में ही नागपुर के एक होटल से क्राइम ब्रांच टीम ने तीन युवतियों को हिरासत में लिया था। इस धंधे में शामिल युवतियों में एक उज्बेकिस्तान की रहने वाली थी।
● फरवरी 2023 में भी उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं को हिरासत में लिया गया था। ये दोनों भारतीय क्षेत्र से नेपाल में प्रवेश कर रही थीं।
● फरवरी 2023 में इंदौर में ब्यूटी पार्लर की आड़ में सैक्स रैकेट चलाने के आरोप में तीन लड़कियां पकड़ी गईं। जिसमें से दो दिल्ली की और एक लड़की उज्बेकिस्तान की थी।
● अगस्त 2022 में भारत-नेपाल की सोनौली सीमा पर उज्बेकिस्तान की एक महिला अवैध रूप से नेपाल जाने की फिराक में पकड़ी गई।
● अक्टूबर 2022 में आगरा के एक होटल में उज्बेकिस्तान की दो युवतियां फर्जी आधार कार्ड के साथ पकड़ी गयी थीं।
● सितंबर 2022 में नागपुर में पुलिस ने वेश्यावृति के आरोप में उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं के साथ एक भारतीय एजेंट को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने महिलाओं के पास से दो फर्जी आधार कार्ड भी जब्त किये थे।
● फरवरी 2022 में दिल्ली पुलिस ने एक भारतीय ट्रक ड्राइवर समेत चार उज्बेकिस्तानी लड़कियों को वेश्यावृति के मामले में पकड़ा था।
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