Qatar: गाज़ा में शांति का दावा करने वाला क़तर कैसे बना प्रमुख नेगोशिएटर

Qatar: हमास और इजरायल के बीच यदि कोई शांति की मजबूत कोशिश कर रहा है तो वह कतर है, क्योंकि कतर ही यह दावा रहा है कि हमास शीघ्र ही उन 240 बंधकों को छोड़ देगा, जिन्हें उसके लड़ाकों ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला कर बंधक बना लिया था। दुनिया क़तर के दावे पर भरोसा भी कर रही है। इसका कारण भी है, क्योंकि पिछले एक दशक में क़तर की कूटनीति असरदार रही है। उसने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में एक उभरती ताकत के रूप में स्थापित किया है।

यमन, लेबनान और अफ़ग़ानिस्तान मामले में क़तर की मध्यस्थता काफी सफल रही है। संवाद और सहयोग की रणनीति ने कतर को दुनिया भर में पहचान और सम्मान दिलाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरब के इस छोटे से किंतु अमीर देश ने उल्लेखनीय मध्यस्थता प्रयासों से विभिन्न क्षेत्रीय संघर्षों को सफलतापूर्वक हल किया है, जिससे मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ी है। क़तर ने आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय पहल का सक्रिय रूप से समर्थन किया है।

How Qatar became the main negotiator which claimed peace in Gaza

गाज़ा में शांति की पहल

अमेरिका में इज़रायली राजदूत माइकल हर्ज़ोग ने हाल ही में यह उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बंधकों की रिहाई के लिए समझौता हो जाएगा। उनके इस विश्वास का आधार भी मध्यस्थता कर रहे कतर का यह भरोसा है कि समझौता उनकी पहुंच के भीतर है। इसमें अमेरिका की मध्यस्थता भी शामिल है।

कतर के प्रधान मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने 19 नवंबर को यह दावा किया कि केवल मामूली व्यावहारिक और तार्किक बाधाएं बची हैं और हम किसी समझौते पर पहुंचने के काफी करीब पहुंच चुके है। यानी हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कतर मध्यस्थता प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। क़तर उस वार्ता में भी शामिल था, जिसके कारण चार बंधकों को रिहा किया गया था। जिनमें अमेरिकी मां -बेटी और दो बुजुर्ग इजरायली महिलाएं शामिल थीं। वैसे हमास के नेताओं का क़तर से सीधा संबंध भी रहा है। हमास का दोहा में कार्यालय भी रहा है। 2011 - 2012 में कतर ने प्रतिद्वंद्वी फ़िलिस्तीनी गुट फ़तेह और हमास के बीच भी मध्यस्थता कराई थी, वह भी संयुक्त राज्य अमेरिका की इच्छा के विरुद्ध।

अमेरिका और तालिबान के बीच संधि

तालिबान और अफगान सरकार के बीच कतर ने ही सितंबर 2020 में ऐतिहासिक शांति वार्ता का आयोजन किया था। दोहा में हुई वार्ता में ही यह तय किया गया कि अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता एक साझा सरकार को सौंप दी जाएगी। दशकों से चल रहे युद्ध को समाप्त किया जाएगा। साथ ही 2001 से अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई लड़ रही अमेरिकी सेना वहां से निकल जाएगी। हालाँकि कतर वार्ता के साथ ही अमेरिकी सेना की वापसी शुरू हो गयी और तत्कालीन अफगान अधिकारियों और नागरिकों के खिलाफ तालिबान ने युद्ध छेड़ दिया और उसमें गंभीर हिंसा हुई।

यमन में आंशिक सफलता

2003 के बाद यमन में गृह युद्ध छिड़ गया था। सादा के उत्तरी प्रांत में ज़ायदी शिया विद्रोही पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने की धमकी दे रहे थे। युद्धविराम समझौते हुए, लेकिन सभी विफल रहे। मई 2007 में कतरी विदेश मंत्रालय ने एक प्रतिनिधिमंडल भेज कर उत्तरी यमन में हूथी नेताओं से बातचीत की और जून 2007 में, यमन सरकार और हूथी विद्रोहियों के बीच एक संयुक्त युद्धविराम समझौते की घोषणा हो गई। फरवरी 2008 को दोहा में कतर के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। हालाँकि समझौते पर हस्ताक्षर होने के कुछ ही समय बाद लड़ाई फिर से शुरू हो गई।

लेबनान में मिली सफलता

जुलाई 2006 में इज़राइल-हिज़बुल्लाह युद्ध के बाद, लेबनान में राजनीतिक संघर्ष छिड़ गया। शुरुआत बेरूत शहर में लगातार धरना प्रदर्शन से हुई। 2008 में जब लेबनान के प्रधान मंत्री फौद सिनिओरा ने हिज़्बुल्लाह को ख़त्म करने का प्रयास किया तो जवाब में हिजबुल्लाह ने पश्चिमी बेरूत के अधिकांश हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। लेबनान एक और गृहयुद्ध की आग में जलने लगा। 2008 में क़तर ने हस्तक्षेप किया। परस्पर विरोधी लेबनानी दलों को दोहा में वार्ता के लिए लाया गया। 21 मई 2008 को दोहा समझौते पर हस्ताक्षर हुआ और अठारह महीने का संघर्ष अंततः समाप्त हो गया। कतर पर दोनों पक्षों का अच्छा विश्वास था।

मनी पावर का इस्तेमाल

कतर एक सफल मध्यस्थ बनने और अपना अंतरराष्ट्रीय रसूख बनाने के लिए अपने विशाल वित्तीय संसाधनों का उपयोग करता रहा है। जैसा कि दारफुर में हुआ जहां क़तर ने दोनों पक्षों को महत्वपूर्ण समझौते के बदले भारी निवेश की पेशकश की। विशेषज्ञों के अनुसार लेबनान में चेकबुक कूटनीति अपनाई गई। कतर अपनी ब्रांडिंग बड़े बड़े आयोजनों के जरिए करता है। डब्लूटीओ की बैठक, यूनाइटेड नेशंस की कांफ्रेंस, फीफा वर्ल्ड कप और जीकेए वर्ल्ड टूर जैसे महंगे आयोजन क़तर अपनी शान के लिए करता रहता है और इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धाक जमती है।

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