Political Parties: कैसे बनती है राजनीतिक पार्टी और कैसे बदलता है स्टेटस, जानें सबकुछ
भारत में राजनीतिक पार्टियों के गठन, उनके स्टेटस समेत ढेरों ऐसे सवाल लोगों के मन में आ रहे हैं। ऐसे में, हम आपको यहां राजनीतिक पार्टी के गठन, उसके स्टेटस में बदलाव, और उससे होने वाले फायदे समेत हर बात का जवाब दे रहे हैं।

Political Parties: चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दे दिया है। वहीं, टीएमसी (TMC), एनसीपी (NCP) और सीपीआई (CPI) जैसी पार्टियों से यह दर्जा वापस ले लिया गया। इसे लेकर जहां आप के नेता और कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं, वहीं टीएमसी कोर्ट जाने की तैयारी में है। इस हिसाब से अब देश में छह दलों - बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), इंडियन नेशनल कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी और आम आदमी पार्टी के पास ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हैं।
कैसे बनती है नई राजनीतिक पार्टी?
भारत में राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29क के तहत प्रावधान है। चुनाव आयोग के मुताबिक, पार्टी बनाने वाले व्यक्ति को सबसे पहले भारत के निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर बताए गए फॉर्मेट में एक आवेदन देना होगा।
अगर पार्टी का कोई लेटर हेड है, तो यह आवेदन उस पर होना चाहिए। इस आवेदन को पार्टी गठन के 30 दिन के भीतर भारत निर्वाचन आयोग के सचिव को भेजना होगा। इसे डाक के माध्यम से या व्यक्तिगत तौर पर दिया जा सकता है। इसके अलावा 10 हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। इसे अवर सचिव, भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट के तौर पर भेजना होगा। यह फीस किसी भी स्थिति में वापस नहीं की जाती है।
आवेदन के साथ पार्टी के संविधान की विस्तृत जानकारी देनी होगी। मसलन, पार्टी का नाम, उद्देश्य, सदस्यता, दल के घटक, पदाधिकारी, विवादों का निपटारा और अनुशासन के नियम, कामकाज के संचालन की मूलभूत जानकारी, पार्टी फंड और अकाउंट, पार्टी के संविधान की संशोधन प्रक्रिया, विलयन, विभाजन और विघटन की प्रक्रिया और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29 क (5) के अधीन अनिवार्य प्रावधान जैसी जानकारियां होनी चाहिए। इस संविधान से यह स्पष्ट होना चाहिए कि पार्टी भारत के संविधान के प्रति तथा समाजवाद, पंथ-निरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धान्तों के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखेगी। भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखेगी।
पार्टी के कम से कम 100 सदस्यों को व्यक्तिगत शपथ-पत्र देना होगा कि उक्त व्यक्ति एक पंजीकृत मतदाता है और निर्वाचन आयोग द्वारा पंजीकृत किसी अन्य राजनीतिक दल का सदस्य नहीं है। यह शपथ-पत्र कम से कम 2 रुपये के स्टैम्प पेपर पर होना चाहिए। इनके अलावा आवेदक को पार्टी के बैंक खाते, पैन, कार्यालय, आवेदक दल के पदाधिकारियों का इनकम टैक्स रिटर्न या इनकम, क्रिमिनल रिकॉर्ड समेत ढेरों अन्य जानकारियां देनी होंगी। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
देश भर में कितनी राजनीतिक पार्टियां हैं?
निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, 23 सितंबर 2021 तक देश में कुल 2831 राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड थीं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने तीन बार नोटिफिकेशन जारी करके इनऐक्टिव पार्टियों को डी-लिस्ट किया। 20 जून 2022 को 111, 25 मई 2022 को 87 और 13 सितंबर 2022 को 86 पार्टियों को डी-लिस्ट किया गया।
इस तरह अभी तक की जानकारी के मुताबिक, देश में कुल 2547 पार्टियां हैं। हालांकि, 13 सितंबर 2022 को जारी एक अन्य नोटिफिकेशन में निर्वाचन आयोग ने इन 2547 में से 253 पार्टियों को इनऐक्टिव की श्रेणी में डाल दिया है। इस तरह देखें, तो फिलहाल देश में कुल 2294 राजनीतिक पार्टियां ऐक्टिव हैं।
कितने तरह की होती हैं राजनीतिक पार्टियां?
निर्वाचन आयोग राजनीतिक पार्टियों को तीन कैटेगरी में रखता है। इनमें राष्ट्रीय पार्टी, राज्य स्तरीय या क्षेत्रीय पार्टी और रजिस्ट्रीकृत अमान्यता प्राप्त पार्टी शामिल हैं।
राष्ट्रीय पार्टी - इलेक्शन सिम्बल्स (रिजर्वेशन ऐंड अलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968 के तहत राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए 3 शर्तें तय की गई हैं। इनमें से एक भी शर्त पूरी होने पर किसी भी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाता है।
1. पार्टी ने चार या उससे ज्यादा राज्यों में लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव लड़ा हो। साथ ही इन चुनावों में उसे सभी राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट मिले हों। इसके अलावा उस पार्टी के कम से कम चार उम्मीदवार किसी राज्य या राज्यों से सांसद चुने जाएं।
2. पार्टी लोकसभा की कुल सीटों में से कम-से-कम दो प्रतिशत सीटें जीत जाए। जीते हुए उम्मीदवार तीन अलग अलग राज्यों से होने चाहिए।
3. पार्टी कम-से-कम चार राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी होने का दर्जा हासिल कर ले।
क्षेत्रीय पार्टी - क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए 5 शर्तें तय की गई हैं। इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करने पर क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाता है।
1. पार्टी को विधानसभा चुनाव में उस राज्य के कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत वोट मिला हो और उस राज्य की कम से कम 2 विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की हो।
2. पार्टी को लोकसभा चुनाव में राज्य के कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत मिला हो और उस राज्य की एक लोकसभा सीट पर जीत मिली हो।
3. राज्य की विधानसभा के कुल सीटों का 3 प्रतिशत या कम से कम 3 सीटें, इनमें से जो ज्यादा हो, वो पार्टी को मिला हो।
4. पार्टी ने लोकसभा चुनाव में हर 25 सीट में से कम से कम एक सीट जीती हो।
5. पार्टी को राज्य में हुए लोकसभा या विधानसभा चुनाव में 8 प्रतिशत वोट मिल जाए।
रजिस्ट्रीकृत अमान्यता प्राप्त पार्टी: इसमें वे सभी पार्टियां आती हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन तो हुआ है, लेकिन वे ऊपर दी गई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी की कोई भी शर्त पूरी नहीं करती हैं। इनमें आमतौर पर नई और बेहद कम वोट प्रतिशत वाली पार्टियां आती हैं।
राष्ट्रीय पार्टी बनने पर क्या मिलते हैं फायदे?
1. राष्ट्रीय पार्टी का चुनाव चिन्ह सुरक्षित होता है, यानी देशभर में कोई दूसरी पार्टी या प्रत्याशी इस चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकता है।
2. राष्ट्रीय पार्टियों को नामांकन दाखिल करने के लिए सिर्फ एक प्रस्तावक की जरूरत होती है।
3. राष्ट्रीय पार्टियां अपने चुनाव प्रचार के दौरान 40 स्टार प्रचारक तक रख सकती हैं। इनकी यात्रा के खर्च को उम्मीदवार के चुनावी खर्च में नहीं जोड़ा जाता है।
4. राष्ट्रीय पार्टियों को अध्यक्ष और पार्टी कार्यालय के लिए राजधानी दिल्ली में सब्सिडी दर पर बंगला किराए पर मिलता है।
5. राष्ट्रीय पार्टियों को दो सेट मतदाता सूची मुफ्त में मिलती है। साथ ही इन पार्टियों के उम्मीदवारों को भी आम चुनाव के दौरान एक सेट मतदाता सूची दी जाती है।
6. राष्ट्रीय पार्टियों को आम चुनाव के दौरान आकाशवाणी पर प्रसारण के लिए ब्रॉडकास्ट और टेलीकास्ट बैंड्स मिलते हैं।
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