इतिहास के पन्नों से- कोटला के खंडहर में भगत सिंह की यादें

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। दिल्ली से भगत सिंह का लंबा संबंध रहा। इसी तारीखी शहर में फिरोजशाह कोटला के खंडहरों में 9 और 10 सितम्बर 1928 को क्रांतिकारियों की बैठक हुई। इसमें ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' का गठन किया गया। इसमें भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद,बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारी मौजूद थे। [इतिहास के रोचक तथ्य]

बैठक के दूसरे दिन टैगोर, कार्ल मार्क्स, लेनिन जैसे लेखकों के काम पर भी चर्चा हुई। इससे साफ है कि तब क्रांतिकारी पढ़ते खूब थे। इधर ही बनी थीं देश को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराने की रणनीति। गर्मागर्म बहुस हुई थी।

सफल रहे भगत सिंह

फिरोजशाह कोटला के खंडहरों में हुई बैठक में विचार विमर्श के बाद हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) में सोशलिस्ट शब्द जोड़ कर एचएसआरए बना दिया गया। उस बैठक में भगत सिंह अपने साथियों को यह समझाने में सफल रहे थे कि भारत की मुक्ति सिर्फ राजनीतिक आजादी में नहीं,बल्कि आर्थिक आजादी में है।

हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी की स्थापना के समय भगत सिंह ने अपने साथियों को अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा था कि आजादी का मायने यह नहीं हो सकता कि अंग्रेज़ भारत छोड़कर चले जायें, बल्कि आजादी का मतलब है- शोषण मुक्त समाज। एक ऐसी व्यवस्था जिसमें मानव के द्वारा मानव का शोषण नहीं किया जाना चाहिए। परन्तु आज भारत में शासक वर्ग द्वारा दलित वंचित और वंचित और अल्पसंख्यकों के ऊपर जुल्म ढाहे जा रहे है।

कहने की जरूरत नहीं है कि राजधानी के इस बेहद खास जगह का अपना महत्व है। इधर एक छोटी सी दिवार पर बताया गया है कि किस तरह से भगत सिंह और उनके साथी इधर मिले थे। पर, अफसोस कि भगत सिंह के नाम का जिक्र करने वाले तमाम दलों के नेता भी इधर नहीं आते कभी। आसपास के मैदान में बच्चे सुबह-शाम क्रिकेट खेलते रहते हैं इस बात से बेपरावह कि कितना पवित्र स्थान है यह।

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