Hinduja Group: क्या बंटवारे की राह पर है हिंदुजा ग्रुप? जानें विवाद की असली वजह

हिंदुजा ग्रुप पिछले 100 साल से दुनिया के अलग-अलग देशों में व्यापार कर रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में हिंदुजा बंधुओं के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था, जो अब संपत्ति के बंटवारे तक पहुंच गया है।

Hinduja group india controversy property dispute between Hinduja brothers

Hinduja Group: 109 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप में लंबे समय से पारिवारिक कलह चल रहा है। हालांकि, संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे इस विवाद पर पिछले साल नवंबर में विराम लग गया, जब परिवार के सदस्यों ने आपसी सुलह करने का फैसला किया था। जबकि लंबे समय से ब्रिटेन के एक कोर्ट में हिंदुजा बंधुओं की संपत्ति को लेकर मामला चल रहा था, लेकिन एक गोपनीय समझौते के बाद यह विवाद खत्म हो गया था। मगर अभी भी हिंदुजा ग्रुप के वकील ने दावा किया है कि कंपनी का ग्लोबल बिजनेस अभी रिस्क पर है, परिवार में चल रहे संपत्ति विवाद के कई और केस यूके में दायर किए जा सकते हैं।

हिंदुजा ग्रुप की शुरुआत

साल 1914 में हिंदुजा ग्रुप की नींव परमानंद हिंदुजा ने रखी थी। परमानंद हिंदुजा के बेटे श्रीचंद हिंदुजा और उनके भाई गोपीचंद हिंदुजा ने बाद में कंपनी के बिजनेस को आगे बढ़ाया। हिंदुजा ग्रुप ने 1919 में पहला अंतरराष्ट्रीय बिजनेस ईरान में शुरू किया, जिसके बाद कंपनी का हेड ऑफिस ईरान में शिफ्ट किया गया। 1979 तक हिंदुजा ग्रुप का हेडक्वार्टर ईरान में ही रहा। उस साल हुई इस्लामी क्रांति की वजह से हिंदुजा ग्रुप ने अपनी कंपनी का हेडक्वार्टर यूरोप में शिफ्ट किया। श्रीचंद हिंदुजा और उनके भाई गोपीचंद हिंदुजा ने कंपनी का ऑफिस लंदन में खोला और कंपनी के बिजनेस को बढ़ाने का काम किया।

फिलहाल हिंदुजा ग्रुप की कंपनियों की बात करें तो इनमें अशोक लेलैंड, गल्फ ऑयल, हिंदुजा बैंक स्विट्जरलैंड, इंडसइंड बैंक, हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशंस, हिंदुजा टीएमटी, हिंदुजा वेंचर्स, इंडसइंड मीडिया एंड कम्युनिकेशन्स लिमिटेड, हिंदुजा फाउंडरीज, पी डी हिंदुजा अस्पताल और डिफायंस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड शामिल हैं। भारत से लेकर यूरोप और मिडिल ईस्ट में हिंदुजा ग्रुप का बड़ा कारोबार है। फोर्ब्स के मुताबिक, हिंदुजा ग्रुप का कुल नेटवर्थ करीब ₹14 अरब है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

लंबे समय से एक आदर्श भारतीय संयुक्त परिवार का हिस्सा रहे हिंदुजा बंधुओं के बीच इस संपत्ति को लेकर कुछ साल पहले विवाद शुरू हुआ था। दशकों से संयुक्त परिवार की तरह रहने वाली फैमिली में संपत्ति को लेकर शुरू हुए विवाद को देखकर हर कोई अचरज में पड़ गए। सब यही सोच रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस संयुक्त परिवार में दरार पड़ने लगा? हिंदुजा परिवार में दरार की पहली खबर तब आई थी, जब श्रीचंद हिंदुजा की बेटियों ने स्विट्जरलैंड में स्थित हिंदुजा बैंक पर नियंत्रण को लेकर कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।

नवंबर 2019 से परिवार के बीच कानूनी विवाद चल रहा था, जिसकी वजह से परिवार को भारी नुकसान पहुंचा है। हिंदुजा बैंक की चेयरमैन शानू हिंदुजा है और उनके बेटे करम हिंदुजा इसके सीईओ हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी इस बैंक पर अपना नियंत्रण चाहते थे। 2 जुलाई 2014 को इस परिवार को एक गुप्त पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि परिवार का सबकुछ प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित है और कुछ भी किसी से संबंधित नहीं है। इस समझौता वाले पत्र के आने के बाद से ही परिवार के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर कलह शुरू हुआ था।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीचंद हिंदुजा को डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी है, जिसकी वजह से वह बातें भूलने लगे हैं। हाालंकि, हिंदुजा ग्रुप में हर भाई के पास अलग-अलग कारोबार की जिम्मेदारी है। श्रीचंद हिंदुजा पूरे समूह के चेयरमैन के साथ-साथ फैमिली हेड भी हैं। श्रीचंद और गोपीचंद हिंदुजा लंदन में रहते हैं, जबकि प्रकाशचंद मोनैको और अशोक हिंदुजा भारत में रहकर कारोबार को संभाल रहे हैं। फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुजा बंधु दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप 100 में शामिल हैं। भारत में इस ग्रुप की 6 कंपनियां लिस्टेड हैं।

बंटवारे की राह हुई आसान

पिछले साल जून 2022 में हिंदुजा बंधुओं के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें ब्रिटिश हाईकोर्ट को बताया गया था कि हिंदुजा परिवार के बीच कलह की जड़ 2014 में हुआ एक समझौता है, जिसमें कहा गया था कि परिवार का सबकुछ प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित है और कुछ भी किसी से भी संबंधित नहीं है। इस समझौते पर चारों भाईयों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, इस पर श्रीचंद हिंदुजा के तीनों छोटे भाईयों की यह दलील थी कि यह चिठ्ठी 100 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप के उत्तराधिकार को लेकर की जाने वाली योजना के संबंध में थी। इस पर बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा ने आरोप लगाया था कि उन्हें दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, बाद में श्रीचंद हिंदुजा के वकील ने जून 2022 में कहा कि परिवार अब इस समझौते को खत्म करने पर सहमत है। इस सहमति के बाद परिवार की संपत्तियों के बंटवारे का रास्ता साफ हो जाता है। ग्रुप के पास दर्जनों कंपनियां हैं, जिनमें ट्रक बनाने से लेकर बैंकिंग, कैमिकल्स, पावर, मीडिया, हेल्थकेयर आदि शामिल हैं।

हिंदुजा ग्रुप का फैमिली ट्री

परमानंद हिंदुजा के बड़े बेटे श्रीचंद हिंदुजा इस फैमिली के हेड के साथ-साथ हिंदुजा फाउंडेशन, हिंदुजा बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड और हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन भी हैं। इस ग्रुप के को-चेयरमैन श्रीचंद हिंदुजा के भाई गोपीचंद हिंदुजा हैं। साथ ही, वह हिंदुजा ऑटोमोटिव लिमिटेड, यूके के चेयरमैन हैं। उनके तीसरे भाई प्रकाश परमानंद हिंदुजा, हिंदुजा ग्रुप (यूरोप) के चेयरमैन हैं। जबकि, हिंदुजा ग्रुप की भारतीय कंपनियों के चेयरमैन अशोक हिंदुजा हैं। हिंदुजा ग्रुप में संजय हिंदुजा, अजय हिंदुजा, वीनू हिंदुजा, रेमी हिंदुजा, धीरज हिंदुजा और शोम हिंदुजा भी अहम पदों पर हैं।

बोफोर्स घोटाले में भी जुड़ा था नाम

हिंदुजा ग्रुप का नाम बोफोर्स घोटाले में भी जुड़ा था। हिंदुजा बंधुओं में श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाशचंद का नाम इस घोटाले में शामिल था, जिसमें स्वीडिश कंपनी बोफोर्स पर यह आरोप लगाया गया था कि उसने 1986 में भारत सरकार को 1.3 अरब डॉलर की 400 तोप की बिक्री के लिए सरकारी अधिकारियों और राजनीतिज्ञों को रिश्वत दी थी। 1989 में हुए बोफोर्स घोटाले की वजह से कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार चुनाव हार गई थी।

सीबीआई ने हिंदुजा बंधुओं के साथ-साथ एबी बोफोर्स के तत्कालीन अध्यक्ष मार्टिन आर्डबो और विचौलिए विन चड्ढ़ा पर आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया था। 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सबूत के अभाव में हिंदुजा बंधुओं पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।

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