Himachal Statehood Day: जब हिमाचल को राज्य बनाकर जनता के साथ नाची इंदिरा गांधी
आज ही के दिन 52 साल पहले प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य बनाने की घोषणा की थी।

Himachal Statehood Day: हिमाचल प्रदेश में मन लुभावनी और आकर्षित करने वाली अनेक पर्वत श्रृंखलाएं, चोटियां एवं घाटियां हैं। इनमें धौलाधार, पीर पंजाल, शिवालिक पर्वत भी है, जिसे मैनाक पर्वत भी कहा जाता था। वहीं हिमाचल प्रदेश में कई दर्रे भी हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में जोत कहा जाता है। इसके साथ ही कुछ ग्लेशियर भी हैं जिनमें शिगड़ी, पाचा, कुल्टी, गेफेंग ग्लेशियर के साथ अन्य कई ग्लेशियर भी शामिल हैं। वहीं धार्मिक स्थलों की बात करें तो यहां पर अनेक देवी देवताओं के मंदिर हैं। इनमें ब्रजेश्वरी मंदिर, चिंतपूर्णी मंदिर, ज्वाला माता मंदिर, मां शूलिनी मंदिर, बाबा बालक नाथ मंदिर, जाखू टेंपल, हिडिंबा देवी मंदिर, चामुंडा मंदिर, बिजली महादेव, बाला सुंदरी मंदिर, श्री रेणुका जी मंदिर प्रमुख हैं।
इन सब के बीच हिमाचल प्रदेश का अपना एक राजनैतिक इतिहास भी है। आइये जानते हैं कैसे हिमाचल प्रदेश को भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने दिया था पूर्ण राज्य का दर्जा।
कैसे शुरू हुई प्रकिया
जब भारत में रियासतों के विलय की प्रक्रिया चल रही थी, तब बघाट के राजा दुर्गा सिंह के नेतृत्व में एक सभा का आयोजन किया गया। इसमें पहाड़ी रियासतों को मिलाकर एक ही भौगोलिक एवं प्रशासनिक इकाई बनाने पर जोर दिया गया। देसी शासकों के रियासती संघ और प्रजामंडल के प्रतिनिधियों के हिमालय प्रांत के प्रस्तावों पर विचार विमर्श हुआ। इसके साथ ही एक अन्य प्रस्ताव के द्वारा तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल से निवेदन किया गया कि वे पंजाब की पहाड़ी रियासतों को प्रस्तावित हिमाचल प्रदेश में विलय करा इसे पूर्ण राज्य बनाएं।
इस सभा के सम्मेलन के बाद सोलन में एक विशाल सभा में राजा दुर्गा सिंह ने 25 रियासतों को मिलाकर एक नया प्रांत हिमाचल प्रदेश बनाने की घोषणा की। साथ ही राजाओं को राजनैतिक सत्ता छोड़ कर प्रतिनिधि सरकार को हस्तांतरित करने की भी घोषणा की। यहीं से हिमाचल प्रदेश के नाम और प्रांत बनने का कार्य शुरू हुआ।
27 जनवरी 1948 को द ट्रिब्यून में 'भारत के मानचित्र पर एक नया सितारा हिमाचल प्रदेश' के शीर्षक से सोलन में हुई सभा की कार्यवाही का विवरण प्रकाशित हुआ। वहीं दूसरी तरफ महाराजा पटियाला के समर्थक सिरमौर, चंबा और शिमला के साथ नालागढ़ और क्योंथल की पहाड़ी रियासतों को मिलाकर 'कोहिस्तान' बनाने की कोशिश में लगे हुए थे। इसके बाद कई तरह के आंदोलन और कार्यवाहियां हुई। फिर 8 मार्च 1948 को मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट्स के सचिव ने केंद्र सरकार की ओर से पहाड़ी रियासतों के विलय से एक अलग प्रांत हिमाचल प्रदेश के निर्माण की घोषणा कर दी। रियासती मंत्रालय के सचिव वी.पी. मेनन ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि हमने शिमला हिल स्टेट्स कोर मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश हिमाचल प्रदेश बना दिया है और इसी के साथ 8 मार्च 1948 को ही शिमला पहाड़ी क्षेत्र की 27 रियासतों के विलय से हिमाचल प्रदेश के गठन की प्रक्रिया आरंभ हुई।
स्वाधीन भारत का 18वां राज्य
24 जनवरी 1968 को केंद्र शासित हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने सर्वसम्मति से हिमाचल के लिए पूर्ण राज्य प्रदान करने का प्रस्ताव पास किया। इस दौरान स्वतंत्र पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी और आजाद विधायकों ने भी इस प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया। इसके बाद डॉक्टर वाईएस परमार के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूर्ण राज्य विषय पर मसौदा तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया। परिणाम स्वरूप 31 जुलाई 1970 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संसद में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की घोषणा की। इसके बाद स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश एक्ट, दिसंबर 1970 में पार्लियामेंट में पास हुआ। 25 जनवरी 1971 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वयं शिमला आकर यहां के ऐतिहासिक रिज मैदान में भारी बर्फबारी के बीच हजारों की संख्या में उपस्थित हिमाचल वासियों के समक्ष हिमाचल प्रदेश के रूप में भारत को 18वां पूर्ण राज्य दिया।
इंदिरा गांधी ने किया हिमाचली लोक नृत्य
25 जनवरी 1971 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हिमाचल के निर्माता और उस समय के मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के साथ मालरोड से खुली जीप में रोड शो करते हुए रिज मैदान पहुंची थी। रिज मैदान से उन्होंने हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की घोषणा की। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से शिमला पहुंचे लोगों ने रिज पर नाटी (हिमाचली लोक नृत्य) करके हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्य बनने का जश्न मनाया। पहाड़ के लोगों के इस जश्न में खुद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी शामिल हुईं और उन्होंने भी रिज मैदान पर लोगों के साथ हिमाचली नृत्य किया।
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