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गुलाब गैंग देख रहा आसमां, गुलाबी गैंग की दरक रही जमीं

Gulaab Gang seeing sky Gulabi Gang goes down
जालौन। बॉलीवुड की दो दिग्गज हीरोइनों जूही चावला और माधुरी दीक्ष‍ित कीआने वाली फिल्म गुलाब गैंग आसमान की ओर देख रही है, वहीं इसी फिल्म की प्रेरणा का स्रोत बुंदेलखंड का गुलाबी गैंग अपने अस्त‍ित्व की जंग लड़ रहा है। यानी एक तरफ गुलाब गैंग के लिये आसमान खुल रहा है तो दूसरी ओर गुलाबी गैंग की जमीन दरक रही है।

फिल्म निदेशक अनुभव सिन्हा बार-बार कह रहे हैं कि उनकी फिल्म गुलाबी गैंग पर आधारित नहीं है, लेकिन वास्तव में देखा जाये तो प्रेरणा का स्रोत तो महिलाओं का गैंग ही है। खैर अभी रील लाइफ पर बात करने की जगह रीयल लाइफ पर फोकस करते हैं।

इसे संपत पाल का 'कांग्रेसीकरण माना जाए या बुंदेली महिलाओं की आगे बढ़ने की ललक। महिला मुददों के मामलों में देश व विदेश में हनक कायम कर चुके 'गुलाबी गैंग की जमीन अपने ही घर बुंदेलखंड़ में दरक गर्इ है और अब संपत की हमसफर रही महिलाएं अलग संगठन बना लिए हैं।

करीब छह साल पूर्व कम पढ़ी-लिखी महिला संपतपाल की अगुआर्इ में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 'गुलाबी गैंग नाम से जिस महिला जनसंगठन की नींव रखी थी, वह बांदा जिले में एक दरोगा को थाने में ही बंधक बनाकर देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी हनक कायम कर चुका है। पर, इधर सोहरत के साथ संगठन की मुखिया संपतपाल की कार्य प्रणाली भी बदली और एक नहीं चार धड़ों में गुलाबी गैंग बंट गया।

गुलाबी गैंग, गुलाबी संगठन, गुलाबी गिरोह

सबसे पहले कौशांबी जिले की चुन्नी मिश्रा अलग होकर 'गुलाबी सेवा संस्थान बनाया, फिर कानपुर की तेज तर्रार कमांडर आशा निगम ने 'गुलाबी संगठन और अब जालौन जिले में अंजू शर्मा ने 'गुलाबी गिरोह बनाकर संपत के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। इन सभी महिलाओं ने संपत पर दुराभाव और महिला मुददों से भटकने का आरोप जड़ा है।

इलाहाबाद सीमा से लगे कौशांबगी जिले की चुन्नी मिश्रा का कहना है कि 'पिछला विधानसभा चुनाव संपतपाल मऊ-मानिकर (चित्रकूट जिला) सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा, वहां प्रचार भी करने गर्इ, लेकिन संपत के दुराभाव करने से आजिज होकर 'गुलाबी सेवा संस्थान का गठन करना पड़ा। कानपुर की आशा निगम कहती हैं कि 'संपतपाल अब खुलकर कांग्रेस के लिए काम कर रही हैं, उन्हें बांदा में ही हो रहीं घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने की फुरसत नहीं है तो वह अन्य जिलों में महिलओं को कैसे न्याय दिलाएंगी?

गुलाबी गैंग से टूट कर गुलाबी गिरोह में शामिल हो रहीं महिलाएं

आशा बताती हैं है कि 'कानपुर व उसके आस-पास करीब पांच हजार महिलाओं को गुलाबी गैंग से जोड़ने का काम किया था, किन्तु संपत ने कांग्रेस के लिए काम करने का दबाव बनाया, लिहाजा अलग होकर 'गुलाबी संगठन बनाना पड़ा है। इसी प्रकार जालौन जिले की अंजू शर्मा भी हाल ही में गुलाबी गैंग को अलविदा कह 'गुलाबी गिरोह नामक अलग महिला संगठन बनाया है, अंजू शर्मा का आरोप है कि 'अब संपत महिला हिंसा के मुददों पर दिलचस्पी नहीं ले रहीं, वह अपना पूरा वक्त कांग्रेसी राजनीति में गुजारती हैं। उनका कहना है कि 'सामाजिक कार्य और राजनीति एक साथ संभव नहीं है, इसलिए 'गुलाबी गिरोह बनाकर महिलाओं की लड़ार्इ लड़ी जा रही है।

गुलाबी गैंग के राष्ट्रीय संयोजक जयप्रकाश शिवहरे (बाबू जी) स्वीकारते हैं कि 'संपत के कांग्रेसीकरण से गुलाबी गैंग को भारी क्षति हुर्इ है और अपने ही घर में कमजोर हुआ है। वह यहां तक कहते हैं कि 'कर्इ बार समझाने के बाद भी संपत कांग्रेसी विचार धारा से उबर नहीं पार्इं, परिणामस्वरूप महिलाओं की मजबूत टीम चार धड़ों में बंट गर्इ है। इन सबके बावजूद संपतपाल बेफि्रक हैं, वह कहती हैं कि 'कुछ महिलाएं खुद 'संपतपाल बनने की ललक में अलग संगठन बना लिए हैं, जिनका असर गुलाबी गैंग में नहीं पड़ सकता। कुल मिलाकर संपतपाल भले ही न स्वीकारें, पर तल्ख सच्चार्इ यह है कि अपने ही घर बुदेलखंड़ में गुलाबी गैंग की जमीन दरक गर्इ हे और अब इसकी भरपार्इ कर पाना संपत के लिए बड़ा मुशिकल होगा।

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