G20 Meeting: जानें विदेश मंत्रियों की बैठक का पूरा एजेंडा और सदस्य देशों की भागीदारी
जी20 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक का आयोजन दिल्ली में किया जा रहा है। इस बैठक में तमाम देशों के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे।

G20 Meeting: 1 मार्च 2023 यानि आज भारत की अध्यक्षता में जी20 देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शुरू हो रही है। इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए जी20 देशों के विदेश मंत्री लगातार दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, फ्रांस की विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना, चीनी विदेश मंत्री किन गांग, जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक, इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजन, ऑस्ट्रेलिया के पेनी वोंग, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान समेत तमाम देशों के विदेश मंत्री व उच्च अधिकारी भी बैठक में हिस्सा लेंगे।
विदेश मंत्रियों की इस बैठक का एजेंडा क्या है?
विदेश मंत्रियों की इस दो दिवसीय बैठक का पहला सत्र बहुपक्षवाद को मजबूत करने और सुधारों की आवश्यकता, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा और विकास सहयोग के विषयों पर केंद्रित होगा। जबकि दूसरे सत्र में आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
G20 और उनके सदस्य देशों की भागीदारी?
दरअसल ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (G20) में 19 देश (अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और यूरोपीय संघ शामिल हैं। G20 सदस्य देशों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 85%, वैश्विक व्यापार का 75% से अधिक और विश्व की लगभग दो-तिहाई आबादी है।
वहीं G20 की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में की गई थी। उसके बाद साल 2007 के वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संकट के मद्देनजर G20 को राष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों के स्तर तक उन्नत किया गया, और 2009 में इसे "अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग हेतु प्रमुख मंच" के रूप में नामित किया गया था। वैसे इसकी बैठक 2008 के बाद से लगातार हर साल G20 सदस्य देशों में की जाती है।
G20 शिखर सम्मेलन सूची
| देश | शहर | तिथि |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | वाशिंगटन डी सी | 4-15 नवंबर 2008 |
| यूनाइटेड किंगडम | लंडन | 2 अप्रैल 2009 |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | पिट्सबर्ग | 24-25 सितंबर 2009 |
| कनाडा | टोरंटो | 26-27 जून 2010 |
| दक्षिण कोरिया | सियोल | 11-12 नवंबर 2010 |
| फ्रांस | कान | 3-4 नवंबर 2011 |
| मैक्सिको | सैन जोस डेल काबो, लॉस काबोस | 18-19 जून 2012 |
| रूस | सेंट पीटर्सबर्ग | 5-6 सितंबर 2013 |
| ऑस्ट्रेलिया | ब्रिस्बेन | 15-16 नवंबर 2014 |
| तुर्की | सेरिक, अंताल्या | 15-16 नवंबर 2015 |
| चीन | हांगझोऊ | 4-5 सितंबर 2016 |
| जर्मनी | हैम्बर्ग | 7-8 जुलाई 2017 |
| अर्जेंटीना | ब्यूनस आयर्स | 30 नवंबर - 1 दिसंबर 2018 |
| जापान | ओसाका | 28-29 जून 2019 |
| सऊदी अरब | रियाद | 21-22 नवंबर 2020 |
| इटली | रोम | 30-31 अक्टूबर 2021 |
| इंडोनेशिया | बाली, नूसा दुआ | 15-16 नवंबर 2022 |
| भारत | नई दिल्ली | 9 -10 सितम्बर 2023 |
बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन में 4 से 15 नवंबर 2008 को शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था। भारत एक दिसंबर, 2022 से 30 नवंबर, 2023 तक एक साल के लिए जी-20 की अध्यक्षता करेगा।
G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के एजेंडे
इससे पहले जब भी G20 की बैठक हुई, भारत की ओर से हमेशा कोशिश रही है कि विदेश मंत्री, इस बैठक में हिस्सा लें। वहीं विदेश मंत्रियों की इस बैठक का एजेंडा शुरुआती दौर में ज्यादातर व्यापक आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित था। लेकिन, बाद में इसके एजेंडे में विस्तार करते हुए इसमें अन्य बातों के साथ व्यापार, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और भ्रष्टाचार-नियंत्रण शामिल किया गया।
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