B'Day Special: सोनिया एंटोनिया मायनो को मोहब्बत ने बना दिया सोनिया गांधी
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी का आज 69वां जन्मदिन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर बड़े-बड़े दिग्गज उन्हें जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। 10 जनपथ पर सोनिया को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। लेकिन इटली के एक छोटे से गांव की एक साधारण सी लड़की के भारत के सबसे बड़े राजनीतिक घराने की बहू बनने की कहानी परियों की कहानी जैसी है। तो आईए आपको सोनिया एंटोनिया मायनो का सोनिया गांधी बनने तक के सफर के बारे में विस्तार से बताते हैं। खुलासा: प्रियंका को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाना चाहती थीं इंदिरा गांधी
सोनिया गांधी का असली नाम सोनिया एंटोनिया मायनो है। सोनिया गांधी का भारत से रिश्ता एक रोमांस से शुरु हुआ था। सोनिया इटली के ट्यूरिन शहर के बाहरी इलाके ओरबैसानो में पैदा हुई थीं। सोनिया के पिता ने अपनी बेटियों को बिल्कुल पारंपरिक ढंग से पाला पोसा। रोकटोक के बावजूद सोनिया के पिता आधुनिक सोच रखते थे और उन्हें विदेश में पढ़ने की इजाजत मिल गई। सोनिया गांधी को अंग्रेजी सिखनी थी इसलिए वो अपने पिता से इजाजत लेकर इंग्लैंड चली गईं। देखें: राजीव-सोनिया की शादी का दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो...इट्स अमेजिंगरेस्टोरेंट वार्सिटी में हुई थी सोनिया की राजीव गांधी से मुलाकात
कैंब्रिज के एक ग्रीक रेस्टोरेंट वार्सिटी में दोपहर को छात्र खाने-पीने पहुंचते थे। वार्सिटी का मालिक चार्ल्स एंटोनी राजीव गांधी का गहरा दोस्त था। इसी रेस्टोरेंट में सोनिया गांधी और राजीव गांधी की पहली मुलाकात हुई थी। एंटोनी बताते हैं कि रेस्टोरेंट में सोनिया गांधी आईं। वो बिल्कुल अकेली थी। चुकि लंच टाइम था इसलिए पूरा रेस्टोरेंट खचाखच भरा हुआ था और सोनिया गांधी को बैठने की जगह नहीं मिल रही थी।
इसी बीच राजीव गांधी भी रेस्टोरेंट में मौजूद थे। वो अपने दोस्त एलेक्सिस के इंतजार में एक राउंड टेबल पर अकेले बैठे थे। एंटोनी ने उनसे पूछा कि तुम्हें किसी दूसरे और एक लड़की के साथ बैठने में ऐतराज तो नहीं। राजीव ने कहा-नहीं, बिल्कुल नहीं। आपको यकीन नहीं आएगा, लेकिन उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया। वो भी इस तरह कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता था। एंटोनी कहते हैं कि इसमें राजीव गांधी की कोई गलती नहीं थी, सोनिया इतनी सुंदर थी कि किसी को प्यार हो जाए।
प्यार को देनी पड़ी अग्नि परीक्षा
सोनिया गांधी और राजीव गांधी का प्यार परवान चढ़ गया था। दोनों अब एक बंधन में बंधना चाहते थे। राजीव गांधी के लिए घरवालों को मनाना आसान नहीं था। राजीव गांधी जहां भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे थे तो सोनिया गांधी एक साधारण सी परिवार की बेटी थीं। वहीं सोनिया के पिता को ये रिश्ता कतई मंजूर नहीं था। वो अपनी प्यारी सी बेटी एक अलग देश में भेजना नहीं चाहते थे। उनको इस बात का डर था कि भारत के लोग सोनिया को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। Video- सोनिया गांधी का जन्म स्थान और पिता पर सवाल उठाये स्वामी ने
शादी से पहले 1968 में पहली बार भारत आईं सोनिया
शादी से पहले सोनिया गांधी को भारत आना था। चुकि उस वक्त इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं इसलिए बिना शादी के सोनिया को अपने घर में नहीं रख सकती थी। सोनिया गांधी के रुकने का इंतजाम अमिताभ बच्चन के घर किया गया। उस वक्त अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी जिगरी दोस्त हुआ करते थे।
अमिताभ के घर ही हुई राजीव-सोनिया की शादी
13 जनवरी 1968 को सोनिया दिल्ली पहुंचीं और अमिताभ के घर में रहने लगीं, जहां उन्हें भारतीय रिति रिवाजों को जानने का मौका मिला। 1968 में अमिताभ के घर में ही सोनिया और राजीव की शादी हुई।
राजनीति में आना ही नहीं चाहती थीं सोनिया गांधी
सोनिया गांधी का उनकी सास इंदिरा गांधी से रिश्ता प्यार, धीरज और साझेदारी का था, लेकिन सोनिया ने इंदिरा के साथ कभी एक चीज की साझेदारी नहीं की और वो थी राजनीति। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। गांधी परिवार एक के बाद दुखद घटनाओं से जूझ रहा था।
विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मौत, उसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या और सात साल बाद खुद राजीव गांधी की हत्या। हर बार सोनिया को शिद्दत से ये एहसास हो रहा था कि ये राजनीति ही थी जो राजीव और उनकी जिंदगी की दुश्मन साबित हुई थी, पर विकल्प कोई नहीं था और उन्हें राजनीति में आना ही पड़ा।
2004 में कांग्रेस को दिलाई भारी जीत
2004 चुनावों ने दिखाया कि दांव पर क्या लगा था। कांग्रेस का अस्तित्व ही नहीं बल्कि भारत की राजनीति में शायद एक गांधी की औकात भी दांव पर लगी थी। सोनिया ने दुश्मनों को दोस्त बनाया और भारी जीत दर्ज की। चौंकाने वाली बात ये है कि सोनिया ने खुद प्रधानमंत्री की कुर्सी को ना कह दिया था। उसके बाद साल 2009 में सोनिया ने एक बार फिर अपने दम पर कांग्रेस को जीत हासिल करवायी।
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