FIFA World Cup Audience: क्यों कतर आने से कतरा रहे हैं फुटबॉल के विदेशी फैंस, जानिए उन वजहों को
हाल ही में जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप फुटबाल के पहले दो हफ्तों में 765,000 विदेशी पर्यटकों ने कतर की यात्रा की, जबकि आयोजक विश्वकप के दौरान लगभग 12 से 15 लाख विदेशी पर्यटकों के कतर आने की अपेक्षा कर रहे हैं।

FIFA World Cup Audience: पिछले एक महीने से विश्वभर में कतर फुटबॉल वर्ल्ड कप रोमांचक मैचों के अलावा विवादों के कारण भी चर्चा का विषय बना हुआ है । 2022 कतर फीफा वर्ल्ड कप का पहला मैच 20 नवंबर को खेला गया और आखिरी मैच 18 दिसंबर को खेला जाएगा। कतर को यह फुटबॉल वर्ल्ड कप आयोजित करने की जिम्मेदारी वर्ष 2010 में दी गई थी। हालांकि, यह विश्वकप अब तक का सबसे ज्यादा विवादित और महंगा वर्ल्ड कप हो चुका है। जिसके चलते फुटबॉल फैन्स भी उम्मीद के मुताबिक कतर नही आ रहे हैं, जिससे कतर को आर्थिक नुकसान के अलावा वैश्विक बदनामी का दंश भी झेलना पड़ रहा है। आइए जानते हैं उन वजहों को जिसके चलते कतर में फुटबॉल फैन्स की संख्या रही है।
कतर अपनी अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरा
जिन 765,000 विदेशी दर्शकों ने फीफा वर्ल्डकप में हिस्सा लिया उनमें से भी कई फैन्स मैच देखकर अपने देश लौट चुके हैं। फीफा वर्ल्डकप 18 दिसंबर को खत्म होना है और अब सिर्फ सेमीफाइनल और फाइनल मैच बचे हैं। गौरतलब है कि इस ट्रेंड को देखते हुए इन बचे हुए मैचों में विदेशी दर्शकों के कतर आने की संभावना कम नजर आती है।
दरअसल, फीफा वर्ल्डकप में फैंस कम होने के प्रमुख कारण एक तरफ महंगे टिकट और होटल हैं, जबकि दूसरी तरफ कटर की कट्टरपंथी और रूढ़िवादी नीतियों के चलते दुनियाभर के फुटबॉल फैंस कतर नही आ रहे हैं। इसके अलावा, बताया जा रहा है कि कतर में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी हैं और फैंस को शिपिंग कंटेनर, कपड़ें के टैंटों और फुटपाथ पर भी रहना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि 2018 रूस फीफा वर्ल्डकप में 29 लाख विदेशी दर्शकों ने हिस्सा लिया था, वही 2014 ब्राजील फीफा वर्ल्डकप मे लगभग 30 लाख से भी ज्यादा विदेशी दर्शकों ने हिस्सा लिया था। इन संख्याओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कतर में आयोजित वर्ल्डकप दर्शकों को अपने यहां लुभाने में असमर्थ रहा है।
वर्ल्डकप कतर में करने की घोषणा
2010 में जब यह घोषणा हुई कि 2022 का फीफा वर्ल्डकप कतर आयोजित करेगा तभी दुनिया भर से लोगों ने फीफा प्रशासन पर शक किया कि एक देश जिसका इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं है, मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ी हुई हैं, जहां उच्च तापमान रहता है, जिसकी फुटबॉल टीम फीफा वर्ल्ड कप में कभी अच्छा नहीं कर पाई, वह फीफा वर्ल्ड कप आयोजित करने की बिड कैसे जीत सकता है और वह भी अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे खेल के दिग्गजों को पछाड़ कर।
मानवाधिकारों का उत्पीड़न
दर्शकों की संख्या कम होने का यह एक प्रमुख कारण हैं। दरअसल, आयोजन के पहले दिन से ही कतर मानवाधिकारों का उल्लंघन और उत्पीड़न को लेकर दुनियाभर की मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। कतर को जब वर्ल्डकप की मेजबानी हासिल हुई तभी से यह इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और उससे जुड़े मजदूरों पर जबरन बंदिशें, अत्याचार और उत्पीड़न के आरोप झेल रहा है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 से लेकर अब तक कतर में 6,500 से भी ज्यादा नेपाली और दूसरे देशों के प्रवासी मजदूरों की कंस्ट्रक्शन साइट्स पर मौत हुई है, जिसके पीछे मुख्य कारण हैं प्रवासी मजदूरों के लिए बेहतर सुविधा ना उपलब्ध होना।
कतर का क्लाइमेट
शुरुआत में ही कई विशेषज्ञों ने कतर के क्लाइमेट को टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए असंभव माना था। इसलिए आमतौर पर गर्मियों में आयोजित होने वाले वर्ल्डकप को नवंबर और दिसंबर में स्थगित किया गया। हालांकि कतर ने फैन्स को भीषण गर्मी से निजात के कुछ उपाय किये है जैसे वातानुकूलित स्टेडियमों की योजना। फिर भी यह फैन्स को लुभाने में असमर्थ रहा हैं। सेप ब्लैटर, जो तत्कालीन फीफा अध्यक्ष थे उन्होंने 2014 में कहा था कि तीव्र गर्मी के कारण कतर को विश्वकप की मेजबानी देना एक 'गलती' थी।
कतर का इंफ्रास्ट्रक्चर
2010 में जब यह घोषणा की गई कि 2022 का फीफा वर्ल्डकप कतर में आयोजित होगा, तब भी कतर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर संदेह जताया गया था। फीफा के पूर्व अध्यक्ष कतर को एक बहुत ही छोटा देश मानते हैं। 2022 फीफा वर्ल्ड कप के लिए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कतर ने वर्ष 2010 से लेकर अब तक अरबों खरबों खर्च किए है।
फीफा विश्वकप के इतिहास में यह अबतक का सबसे महंगा विश्वकप है। 2010 के अंत में मेजबानी के लिए चुने जाने के बाद से लेकर अब तक कतर ने $220 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए है जो 2018 के रूस विश्व कप से 15 गुना अधिक है। कतर में पैसों का इस्तेमाल होटल, स्टेडियम, एयरपोर्ट, सड़कें, और पार्किंग जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने एवं रीडिवेलप करने में किया। फिर भी यह इंफ्रास्ट्रक्चर इतने बड़े आयोजन के हिसाब से पर्याप्त नही हैं। जो फुटबॉल फैन्स कतर आये उनमें से अधिकतर का अनुभव मजेदार नहीं रहा।
कट्टरपंथी नियम
कतर में समलैंगिकता अवैध है, जिसका दुनियाभर के LGBTQ समर्थकों द्वारा विरोध किया गया। हालांकि, बाद में कतर को जब लगा कि इससे एक बड़ा वर्ग उससे नाराज होकर फुटबॉल मैचों का आंनद नहीं उठा सकेगा और उसका प्रभाव उसके आयोजन पर होगा तो वहां के सख्त नियमों में कुछ ढील दी गयी लेकिन वे भी दर्शकों के इस वर्ग को ज्यादा खास आकर्षित नही कर सके।
शराब पर पाबंदी
कतर में खुले में शराब पीने पर पाबंदी है लेकिन वर्ल्डकप शुरू होने से पहले यही कहा गया कि हम स्टेडियम क्षेत्र में शराब पीने की अनुमति देंगे, लेकिन 20 तारीख को वर्ल्डकप शुरू होने से 2 दिन पहले ही यह घोषणा की गई कि स्टेडियम क्षेत्र के अंदर कहीं पर भी शराब नहीं बिकेगी और यह घोषणा फीफा द्वारा की गई। फीफा की इस घोषणा को दोहरी मानसिकता का रूप दिया गया क्योंकि ब्राज़ील फीफा वर्ल्डकप के समय पर ब्राजील ने भी शराब पर कई प्रतिबंध लगा रखे थे। हालांकि, फीफा ने ब्राजील से उनके कानूनों में बदलाव करने की मांग की थी, जिसके बाद मजबूरी में ही सही लेकिन ब्राजील को अपने कानूनों में बदलाव करने पड़े। मगर कतर में दर्शकों विशेषकर यूरोपियन फैन्स को शराब पीने की खुली छूट न मिलना भी उनके वर्ल्डकप में न आने का एक बड़ा कारण है।
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