Election Commission: जानिए, कैसे होती है मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति
चुनाव आयोग शुरुआत में एकल-सदस्यीय निकाय था, जो बाद में बहु-सदस्यीय निकाय बना। चुनाव आयोग पर संपूर्ण भारत में सभी चुनावों को निष्पक्ष तरीके से कराने की जिम्मेदारी है।

हाल ही में अरूण गोयल (चुनाव आयुक्त) की नियुक्ति को लेकर एडीआर (एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि अरूण गोयल की नियुक्ति मनमानी तरीके से हुई है, जो संस्थागत अखंडता तथा भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 324 (2) व 1991 की धारा 4 के तहत असंवैधानिक है।
इस याचिका से पहले भी चुनाव आयोग हर दिन समाचारों की सुर्खियों में बना रहता हैं। तो आपके मन में चुनाव आयुक्त की नियुक्तियां और उसकी शक्तियों को लेकर एक सवाल जरूर आता होगा कि इसकी प्रक्रिया क्या है।
क्या है चुनाव आयोग
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। भारत में चुनाव व्यवस्था को संपन्न कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास है। चुनाव/निर्वाचन आयोग (इलेक्शन कमीशन) एक स्थायी संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन भारत में संघ एवं राज्य निर्वाचन प्रक्रियाओं का संचालन करने के लिए हुआ है। यह आयोग भारत में लोक सभा, राज्य सभा, राज्य विधान सभाओं, देश में राष्ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है।
भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 में हुई थी, जिसके पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन बने। गठन से लगभग 39 वर्षों तक (15 अक्टूबर 1989 तक) यह एक एकल-सदस्यीय (केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त) निकाय था। इस बीच 8 मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त हुए। 16 अक्टूबर 1989 को पहली बार इस निकाय में दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों को नियुक्त किया गया। तब से यह आयोग बहु-सदस्यीय निकाय की अवधारणा से चल रहा है। वर्तमान में इसके मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार (25वें) तथा चुनाव आयुक्त - अनुप चन्द्र पाण्डेय व अरूण गोयल हैं। चुनाव आयोग का सचिवालय नई दिल्ली में स्थित है।
कैसे निर्वाचित होते हैं, मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्त
चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 (2) के तहत की जाती है। सामान्यतया चुने गये मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्त वरिष्ठ आईएएस रैंक के अधिकारी होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग का प्रमुख होता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रीपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति ये नियुक्तियां करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जजों को जैसे पद से हटाया जाता है वैसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद में महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या आयु 65 वर्ष तक (जो पहले हो) का होता है। वहीं चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल तो 6 वर्ष ही होता है परंतु आयु 62 वर्ष (जो पहले हो) होती है।
वहीं राज्य के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित वरिष्ठ सिविल सेवकों में से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा की जाती है। जिला व चुनाव क्षेत्र स्तरों पर जिला चुनाव अधिकारी व अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति राज्य चुनाव आयुक्त द्वारा की जाती है।
चुनाव आयोग की शक्तियां व कार्य
चुनाव आयोग में निर्वाचित मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों का पद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश स्तर का होता है। चुनाव आयोग को भारत की चुनाव प्रणाली की निगरानी करने वाली संस्था भी कहा जाता है। इसकी शक्तियां व कार्य इस प्रकार हैं -
- परिसीमन आयोग अधिनियम के तहत निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करना।
- मतदाता सूची तैयार करना व उसमें सुधार करना।
- चुनावों के कार्यक्रम निर्धारित करना।
- चुनावी प्रत्याशियों के नामांकन व उनकी निष्पक्ष जाँच करना।
- राजनीतिक दलों का पंजीकरण तथा चुनाव चिन्ह देना।
- राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय आदि का दर्जा देना।
- निर्वाचन व्यवस्था से संबंधित विवादों की जाँच के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना।
- राजनीतिक दलों के प्रचार के लिए समय सीमा का निर्धारण करना।
- आचार संहिता का सभी दलों व प्रत्याशियों द्वारा पालन करने के लिए आदेश जारी करना।
- संसद सदस्यों की अयोग्यता मामलों में राष्ट्रपति को तथा राज्य विधानमंडल के सदस्यों की अयोग्यता से संबंधित राज्यपाल को सलाह प्रदान करना।
- राष्ट्रपति या राज्यपाल को चुनाव सम्पन्न हेतु आवश्यक स्टाफ उपलब्ध करने के लिए निवेदन करना।
- चुनाव कार्यप्रणाली का सर्वेक्षण करना तथा स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराना।
- गलत व दुरूपयोग के चलते किसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदान को रद्द करना।
- राष्ट्रपति को चुनाव संबंधी (चुनाव कराने है या नहीं) सलाह देना।
सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की वर्तमान निर्वाचन प्रक्रिया के खिलाफ
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अगर यह कानूनी रूप लेता है तो चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया बदल जायेगी। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की नियुक्ति अब भारत के मुख्य न्यायाधीश, निचले सदन के विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री मिलकर करेंगे। हालांकि अंतिम फैसला राष्ट्रपति का ही होगा और मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों आयुक्तों पर इस निर्णय का कोई असर नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने तर्क दिया है कि संवैधानिक इतिहास को देखते हुए वह कार्यपालिका के पास पूरी तरह से नियुक्ति की शक्तियां होने के सख्त खिलाफ हैं। कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की एक जिम्मेदार संस्था है, उसका अस्तित्व उसकी स्वतंत्रता में ही निहित है।












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