भारत में छिपे बांग्लादेशियों की उल्टी गिनती शुरू, संदिग्धों का डेटा ट्रांसफर, वेरिफिकेशन होते ही चलेगा हंटर!

भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ मोदी सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपना लिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि भारत की धरती पर अवैध रूप से रहने वाले हर एक नागरिक से कानून के मुताबिक सख्ती से निपटा जाएगा। इसी कड़ी में भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए 2,680 से ज्यादा संदिग्ध लोगों की एक लिस्ट बांग्लादेश सरकार को सौंपी है, ताकि उनकी नागरिकता की जांच की जा सके।

इस बड़े खुलासे के बाद से ही दोनों देशों के राजनयिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। आइए जानतें हैं विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर क्या जानकारी दी है....

MEA On Illegal Immigrants

वेरिफिकेशन के बाद देश से किया जाएगा डिपोर्ट

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग (Weekly Media Briefing) में इस बात की पुष्टि की है कि इन सभी संदिग्धों का डेटा बांग्लादेशी पक्ष को सौंप दिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि जैसे ही बांग्लादेश की तरफ से इन 2,680 से अधिक लोगों की राष्ट्रीयता का वेरिफिकेशन (Nationality Verification) पूरा हो जाएगा, भारत सरकार तुरंत एक्शन में आएगी। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होते ही इन सभी अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश डिपोर्ट (Deport) यानी वापस भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

अवैध प्रवासियों की वापसी का क्या है पूरा प्रोसेस?

साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों (Illegal Immigrants) की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर जवाब देते हुए प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत में अवैध रूप से दाखिल होने वाले या बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे लोगों पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। नाम साझा करने की यह कवायद इसी कानूनी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, ताकि कानूनी तौर पर पुख्ता होने के बाद ही उन्हें सीमा पार भेजा जा सके।

पश्चिम बंगाल में BJP सरकार का बड़ा एक्शन

रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश बॉर्डर पर अचानक उमड़ी भारी भीड़ के पीछे पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार का एक बड़ा और आक्रामक अभियान है। राज्य सरकार ने अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) की पहचान करने और उन्हें डिपोर्ट करने की मुहिम तेज कर दी है।

बॉर्डर टर्मिनल पर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की कतारें और वहां का मंजर अतीत में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के दौरान दिखने वाली भारी अफरातफरी की याद दिलाता है। इस मामले में पैनिक (Panic) तब और ज्यादा बढ़ गया जब पश्चिम बंगाल सरकार ने बॉर्डर से सटे मालदा (Malda) और मुर्शिदाबाद (Murshidabad) जिलों में हिरासत में लिए गए अवैध प्रवासियों के लिए अपने पहले दो 'होल्डिंग सेंटर्स' (Holding Centres) खोल दिए।

राज्य सरकार के एक सर्कुलर के बाद महज 48 घंटों के भीतर इन सेंटर्स को पूरी तरह चालू (Operationalise) कर दिया गया। 25 मई की शाम तक मालदा और मुर्शिदाबाद से पकड़े गए संदिग्ध प्रवासियों को इन ट्रांजिट यूनिट्स (Transit Units) में शिफ्ट भी कर दिया गया था, जिसने प्रवासियों के बीच खलबली मचा दी।

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सीएम सुवेंदु अधिकारी की सख्त चेतावनी

बॉर्डर पर मची इस भगदड़ के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) का एक बेहद सख्त बयान सामने आया है। कल्याणी में एक एडमिनिस्ट्रेटिव मीटिंग (Administrative Meeting) के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी संदिग्ध घुसपैठियों को तुरंत राज्य छोड़ने या गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करने की कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने अधिकारियों को डिपोर्टेशन प्रोसेस (Repatriation Process) में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

इतना ही नहीं, सीएम ने राज्य की पुलिस फोर्स (State Police Force) को निर्देश दिया है कि संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मामलों में पारंपरिक न्यायिक अदालती कार्यवाही (Judicial Court Proceedings) को बायपास किया जाए।

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BSF को सीधे सौंपने का प्लान

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानूनी ढांचे (Legal Framework) के भीतर ऐसे प्रावधान मौजूद हैं, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संदिग्धों को सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपने की अनुमति देते हैं। इसके बाद BSF उनकी राष्ट्रीय पहचान सत्यापित करेगी और उन्हें बॉर्डर पार संबंधित अधिकारियों को सौंप देगी। मुख्यमंत्री का तर्क है कि बिना दस्तावेजों वाले इन प्रवासियों (Undocumented Immigrants) को स्थानीय जेलों में रखना राज्य पर एक अनावश्यक वित्तीय बोझ (Fiscal Burden) है, क्योंकि उनके भोजन, कपड़े और दवाओं पर जनता का पैसा खर्च होता है।

उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि डिपोर्टेशन के कानून हमेशा से थे, लेकिन वोट बैंक के राजनीतिक हितों के कारण उन्हें लागू नहीं किया गया, जबकि उनकी सरकार देश और राज्य के हित में इसे सख्ती से लागू कर रही है।

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