BrahMos: मात्र 7 मिनट में दुश्मन का खात्मा कर देगी ब्रह्मोस मिसाइल, दुनियाभर से मिल रहे हैं आर्डर
रक्षा मंत्रालय ने नयी पीढ़ी की मैरीटाइम मोबाइल कोस्टल बैटरीज और ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) के साथ ₹1,700 करोड़ का एग्रीमेंट किया है।

BrahMos: ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा मिलकर विकसित की गई एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। मिसाइल का ब्रह्मोस नाम दो नदियों के नाम से लिया गया है। जिसमें एक भारत की ब्रह्मपुत्र और दूसरी रूस की मोस्क्वा शामिल हैं।
ब्रह्मोस मिसाइल का पहला परीक्षण 2001 में किया गया था। उसके बाद से इसे कई बार अपग्रेड किया जा चुका है। इसके लगभग सभी परीक्षण सफल रहे हैं और अब यह भारतीय सेना का भी हिस्सा बन चुकी है। इसे जमीन, समुद्र और हवा समेत कई प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। मिसाइल की अनेक खूबियों को देखते हुए कई अन्य देशों ने भी इसे खरीदने में रुचि दिखाई है।
ब्रह्मोस मिसाइल की विशेषता
ब्रह्मोस मिसाइल की अधिकतम गति लगभग 3700 किलोमीटर प्रति घंटा है। रेंज की बात करें तो यह लगभग 450 किलोमीटर दूर तक जा सकती है। इस हिसाब से लगभग 7 मिनट में यह दुश्मन के ठिकाने पर पहुंच कर उसका खात्मा कर सकती है। यह मिसाइल 300 किलोग्राम तक के हथियारों का भार उठा सकती है। यही नहीं यह अपनी सटीकता के लिए जानी जाती है। इसे जहाजों, भूमि-आधारित लक्ष्यों और विमान वाहकों सहित विभिन्न लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है।
ब्रह्मोस मिसाइल का विकासक्रम
साल 1998 में भारत और रूस ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। फिर 2000 में डीआरडीओ (DRDO) और एनपीओ मशीनोस्ट्रोएनिया के बीच ब्रह्मोस एयरोस्पेस संयुक्त उद्यम स्थापित किया गया। जून 2001 में ब्रह्मोस मिसाइल का पहला परीक्षण बंगाल की खाड़ी में किया गया जोकि सफल रहा।
साल 2004 में भारतीय नौसेना ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की पहली खरीददार बनी। इसके बाद 2007 में भारतीय वायुसेना के सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट से ब्रह्मोस मिसाइल के एयर-लॉन्च वर्जन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।
साल 2010 में ब्रह्मोस मिसाइल के भूमि पर हमला करने वाले वर्जन को भारतीय सेना में शामिल किया गया। तीन साल बाद ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज बढ़ा कर 450 किलोमीटर की गयी। फिर 2017 में ब्रह्मोस मिसाइल का भारतीय नौसेना के जहाज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया, जिसने 400 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर अपने लक्ष्य को पूरा किया। दिसंबर 2021 में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नयी पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइल को लखनऊ में बनाने के लिये ब्रह्मोस एयरोस्पेस की लखनऊ यूनिट का शिलान्यास किया।
ब्रह्मोस मिसाइल में टेक्नोलॉजी
ब्रह्मोस मिसाइल जीपीएस, नेविगेशन और रडार होमिंग सहित कई उच्चस्तरीय सिस्टम्स से लैस है। यह सभी तकनीकें इसे दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक बनाती हैं। यह मिसाइल सॉलिड-प्रोपेलेंट बूस्टर इंजन और एक तरल-ईंधन वाले रैमजेट इंजन का उपयोग करती है, जो इसे इसकी सुपरसोनिक गति और विस्तारित रेंज प्रदान करते हैं।
मिसाइल को दुश्मन के रडार सिस्टम से बचने के लिए एडवांस्ड स्टील्थ सिस्टम के साथ डिजाइन किया गया है। जिससे इसका पता लगाना और रोकना मुश्किल हो जाता है। ब्रह्मोस मिसाइल "फायर एंड फॉरगेट" सिस्टम का उपयोग करती है, जिसका मतलब है कि एक बार इसे अपने लक्ष्य की ओर लॉन्च करने के बाद, इसे ऑपरेटर से किसी और मार्गदर्शन या इनपुट की आवश्यकता नहीं होती है।
किन-किन देशों ने दिखाई ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि
28 जनवरी 2022 को ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) ने फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा विभाग के साथ $375 मिलियन की एक डील साइन की। बीएपीएल ने फिलीपींस को समुद्र तटीय एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति करने की डील साइन की थी। रिपोर्ट के मुताबिक इन मिसाइलों की डिलीवरी इस वर्ष शुरू होनी है। फिलीपींस के अलावा ऐसे और भी कई देश हैं जिन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने में अपनी रुचि दिखाई है। इन देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), केन्या, बहरेन, सऊदी अरब, इजिप्ट, अल्जीरिया, आदि शामिल हैं।
दूसरे देशों में ब्रह्मोस जैसी मिसाइल
YJ-18, चीन द्वारा बनाई गई एक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है जिसकी गति और रेंज ब्रह्मोस मिसाइल के समान है। P-800 ओनिक्स, एक रूसी सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है जिसकी डिजाइन और रेंज ब्रह्मोस मिसाइल के समान है, इसकी रेंज 500 किलोमीटर तक है। AGM-158C LRASM, अमेरिका की एक सबसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है जिसकी रेंज और पेलोड ब्रह्मोस मिसाइल के बराबर है। हिसुंग फेंग III, ताइवान द्वारा विकसित की गई एक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है जिसकी गति और रेंज ब्रह्मोस मिसाइल के समान है।
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