TMC में टूट? Mahua Moitra ने बागियों को कहा 'गद्दार', यूसुफ पठान से पूछा- किसके इशारे पर दिल्ली जा रहे
TMC Crisis Mahua Moitra: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शुरू हुआ घमासान अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। पार्टी के संसदीय दल में एक बड़ी बगावत खड़ी हो गई है, जहां कई लोकसभा सांसद NDA सरकार के पाले में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस राजनीतिक संकट और आंतरिक 'विस्फोट' के बीच TMC की फायरब्रांड नेता और कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) अपनी पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई हैं। महुआ मोइत्रा ने एनडीए का रुख करने वाले बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'कायर और गद्दार' करार दिया है।

'हिम्मत है तो इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें'
महुआ मोइत्रा ने रविवार शाम को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बैक-टू-बैक कई पोस्ट शेयर कर बागियों को खुला चैलेंज दिया। उन्होंने लिखा-साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इन सांसदों ने टीएमसी के टिकट पर जीत हासिल की थी। जनता ने इन्हें NDA के पक्ष में जनादेश नहीं दिया था। जितने भी लालची और खुदगर्ज गद्दार अपनी पैंट पीली कर (डरकर) अब बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं, वे कृपया तुरंत अपनी सीट से इस्तीफा दें और बीजेपी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़कर दिखाएं। देखते हैं कि वे कितने बड़े सूरमा हैं।
पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान पर 'शाह' के नाम से तंज
महुआ मोइत्रा ने अपने हमले के दायरे में बहरामपुर से TMC सांसद और टीम इंडिया के पूर्व स्टार क्रिकेटर यूसुफ पठान को भी ले लिया। हालांकि, अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि यूसुफ पठान बागी गुट के साथ हैं या नहीं, लेकिन महुआ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बहाने उन पर तीखा तंज कसा। महुआ ने लिखा, यूसुफ पठान, क्या आप अमित शाह के बुलावे पर इतनी जल्दी दिल्ली भाग रहे हैं? थोड़ी हिम्मत दिखाइए। आप भारत के लिए खेले हैं। हमारे जिले की जनता ने आपको भारी मतों से जिताकर संसद भेजा है। थोड़ी शर्म रखिए और रीढ़ की हड्डी सीधी रखिए।
पिछले दिनों राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी और यूसुफ पठान के बीच मध्यस्थता की थी। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि ममता चाहती थीं कि यूसुफ सांसद पद से इस्तीफा दे दें, ताकि एक उपचुनाव के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) खुद लोकसभा में प्रवेश कर सकें। हालांकि, सौरव गांगुली ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए किसी भी तरह की मध्यस्थता से इनकार किया है।
20 सांसदों की बगावत का दावा, क्या लागू होगा दलबदल कानून?
यह विवाद तब और गहरा गया जब बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) ने समाचार एजेंसी 'ANI' से कहा- TMC के लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA सरकार को समर्थन देने की पेशकश की है।
क्या कहती है कानूनी स्थिति?
साल 1998 में ममता बनर्जी द्वारा गठित की गई टीएमसी के इस समय लोकसभा में कुल 28 सदस्य हैं। संविधान के दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत, अपनी सदस्यता गंवाए बिना पार्टी से अलग होने या नया गुट बनाने के लिए किसी भी धड़े को कम से कम दो-तिहाई (2/3) सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
- टीएमसी लोकसभा गणित (कुल सांसद: 28)
- दलबदल से बचने के लिए जरूरी संख्या: 19 सांसद
- बागी गुट का दावा: 20 सांसद
यदि बागी गुट का 20 सांसदों का दावा सच साबित होता है, तो वे कानूनी रूप से अयोग्य होने से बच जाएंगे। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले राज्य विधानसभा में निष्कासित विधायक रीताब्रत बनर्जी ने कम से कम 58 विधायकों के साथ एक अलग गुट बनाकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) का पद हासिल कर लिया था। यह पूरी उथल-पुथल राज्य में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार के बाद शुरू हुई है, जिसके बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है।
चीफ व्हिप के पद को लेकर भी छिड़ी कानूनी जंग
ममता बनर्जी के वफादार खेमे ने काकोली घोष दस्तीदार के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पार्टी ने 20 मई को ही कल्याण बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का चीफ व्हिप नियुक्त कर दिया था, जिसकी जानकारी पिछले महीने ही स्पीकर को दे दी गई थी। इसलिए दस्तीदार के दावों की कोई कानूनी कीमत नहीं है।
कीर्ति आजाद ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी आखिरकार कब तक लोगों की आंखों में धूल झोंकती रहेगी। गौरतलब है कि मई के अंत में काकोली घोष दस्तीदार ने स्पीकर को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी पर अपशब्दों के इस्तेमाल और महिला विरोधी व्यवहार का आरोप लगाया था।
एक तरफ विपक्षी बैठक, दूसरी तरफ बीजेपी के साथ गुप्त रणनीति
यह पूरा घटनाक्रम सोमवार को उस समय हुआ जब दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी 'INDIA' गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी, जिसमें खुद ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी हिस्सा ले रहे थे। इस बैठक में बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर एक बड़ा विभाजन औपचारिक रूप ले सकता है।














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