जानिए कैसे पहचानें कि साधारण बुखार है या डेंगू फीवर

नई दिल्ली। डेंगू बुखार ने इस वक्त राजधानी दिल्ली को जकड़ रखा है। सच पूछिए तो लखनऊ से लेकर बेंगलुरु तक भी डेंगू के खतरे से बहार नहीं हैं। कई शहरों में ये श‍िकायतें भी मिल रही हैं कि कुछ डॉक्टर साधारण बुखार को डेंगू बता कर जमकर कमाई करने में जुटे हैं। ऐसे में आपको डेंगू और साधारण बुखार में फर्क मालूम होना चाहिये।

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बहुत कम लोग ही जानते हैं कि साधारण बुखार बीमारी नहीं होता। असल में साधारण बुखार में जब शरीर का तापमान बढ़ता है तब शरीर का इम्यून सिस्टम यानि प्रतिरक्षण प्रणाली और मजबूत होती है। क्योंकि इसी दौरान कई सारे बेक्टीरिया और वायरस मर जाते हैं।
कुछ बातें साधारण बुखार डेंगू बुखर
रोग का प्रकार यह संक्रामक नहीं होता, मौसम के बदलने से अक्सर हो जाता है। यह एक संक्रामक रोग है, जो मच्छर के काटने से फैलता है।
कब फैलता है इसके फैलने का कोई विशेष मौसम नहीं होता। आम तौर पर बारिश के तुरंत बाद फैलता है।
शरीर का तापमान शरीर का तापमान 100 से 102 डिग्री तक रहता है। कभी-कभी 103 डिग्री फेरनाइट हो जाता है। शरीर का तापमान 103 डिग्री फेरनाइट से ऊपर चला जाता है। जो बढ़कर 105 डिग्री तक हो जाता है।
सामान्य लक्षण ठंड लगती है, कंपकपी आती है। छींके आती हैं कभी-कभी खांसी भी हो जाती है। जब बुखार उतरता है तो बहुत सारा पसीना छूटता है। सिर में तीव्र दर्द होता है। आंखों के पीछे की ओर दर्द होता है। जोड़ों में, मांसपेश‍ियों में बहुत ज्यादा दर्द होता है। डेंगू- जी मिचलाता है। खाने की इच्छा नहीं होती। उल्टी आती है। शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं। कई बार बुखार शुरू होने के 3 दिन बाद चकत्ते पड़ते हैं।
कैसे फैलता है यह शरीर की प्रक्रिया है, जिसमें मस्त‍िष्क का तापमान बढ़ता है, तब शरीर उसे बैलेंस करने के लिये खुद गर्म होने लगता है। हालांकि बुखार आने के कई अन्य कारण निमोनिया, फ्लू, या किसी प्रकार का इंफेक्शन भी होता है। यह डेंगू वायरस डेन-1, डेन-2, डेन-3, डेन-4, आदि की वजह से होते हैं। यह एक व्यक्त‍ि से दूसरे में मच्छर के काटने से ही पहुंचता है।
कहां-कहां से आये मामले यह पूरी दुनिया में होता है। विशेषकर अफ्रीका, साउथ-ईस्ट एश‍िया, चीन, भारत, मिडिल ईस्ट, साउथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सेंट्रल पैसिफिक में होता है।
कैसे पता चलता है अगर बुखार दो से तीन घंटे आराम करने से उतर जाये, तो बुखार सामान्य है। आम तौर पर साधारण बुखार का पता पहली खुराक में उतरने पर ही लग जाता है। क्योंकि असाधारण बुखार जल्दी उतरता नहीं। इसका पता रक्त परीक्षण के माध्यम से किया जाता है। अगर खून में डेंगू वायरस हो तो तुरंत उपचार दिया जाना चाहिये। हां आपको बता दें कि डेंगू की कोई वैक्सीन नही लेकिन इलाज जरूर है।
रिस्क डीहाईड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान कई बार पेट में इंफेक्शन भी हो जाता है, उलटी-दस्त शुरू हो जाते हैं। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स के कम होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वैसे ज्यादातर मामलों में रक्त में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं।
भयावह स्टेज साधारण बुखार 103 डिग्री तक हो तो घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन 105 से ज्यादा हो जाये तो बड़ा खतरा बन जाता है। 106 डिग्री पर मस्त‍िष्क कोश‍िकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे मरीज का ब्रेन डेड हो जाता। ऐसे में व्यक्त‍ि की कोमा जैसी हालत हो जाती है और कुछ ही समय में मौत हो जाती है। अगर डेंगू बुखार का उपचार सही समय पर नहीं हुआ तो प्लेटलेट काउंट इतने ज्यादा गिर जाते हैं, कि प्रतिरक्षण प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो जाती है और हीमोग्राफिक फीवर की वजह से मरीज मल्टी-ऑर्गन फेलियोर की वजह से मर जाता है।
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