Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

पूंजीवादी निजाम से भी खूंखार अर्थव्यवस्था का वादा , घोषणा पत्र में धन्नासेठों की मनमानी का इंतजाम

congress manifesto
कांग्रेस पार्टी ने पूरे जोशो खरोश के साथ अपना चुनाव घोषणापत्र जारी कर दिया। हर बार की तरह इस बार भी कुछ वैसे ही वायदे किये गए जिनको पूरा कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है। लेकिन इस बार कांग्रेस के घोषणा पत्र में वचन दिया गया है कि देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से इकनामिक फ्रीडम के आर्थिक दर्शन की बुनियाद पर डाल दिया जाएगा। कांग्रेस पार्टी ने जो घोषणा पत्र जारी किया है उसके आधार पर अगर अर्थव्यवस्था का प्रबंधन किया गया तो आर्थिक गतिविधियों पर जो थोड़ा बहुत सार्वजनिक कंट्रोल बना हुआ है वह भी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। इकनामिक फ्रीडम की सर्वमान्य परिभाषा में बताया गया है कि यह किसी भी देश में आर्थिक सम्पन्नता हासिल करने का वह तरीका है जिसमें किसी सरकार या किसी आर्थिक अथारिटी को कोई हस्तक्षेप न हो।

पढ़ें- जानिए क्या-क्या है कांग्रेस के घोषणापत्र में

व्यक्तियों को अपनी निजी संपत्ति, मानव संसाधन और श्रम का संरक्षण करने की असीमित आजादी होती है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में इकानामिक फ्रीडम के तत्व होते हैं। अगर उसमें सिविल लिबर्टी के तत्व डाल दिए जाएं तो वह पूरी तरह से स्वतंत्र हो जायेगें और इकनामिक फ्रीडम की श्रेणी में आ जायेगें। ध्यान में रखना चाहिए कि बीजेपी के नेता, नरेंद्र मोदी भी इस देश में इकनामिक फ्रीडम की अवधारणा के समर्थक हैं और उनको इस क्षेत्र में दिया जाने वाला, देश सर्वोच्च पुरस्कार भी मिल चुका है। दिलचस्प बात यह है कि यह पुरस्कार उनको राजीव गांधी फाउंडेशन की और से दिया गया था जिसकी अध्यक्ष कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी हैं। जानकार बताते हैं कि अर्थव्यवस्था के दार्शनिक आधार के बारे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही मनमोहन सिंह के आर्थिक चिंतन को सही मानते हैं।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में वे सारी बातें समाहित कर ली गयी हैं जो अगर लागू हो गयीं तो इस देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से आर्थिक मनमानी के निजाम के अधीन हो जायेगी। कांग्रेस के घोषणा पत्र को मोटे तौर पर पंद्रह सूत्रों में पिरोया गया है। इसमें स्वास्थ्य ,पेंशन ,आवास का अधिकार , सम्मान का अधिकार , उद्यमित्ता का अधिकार आदि को शामिल किया गया है। महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा आदि से सम्बंधित जो पारंपरिक बातें हैं वह महत्वपूर्ण हैं लेकिन जो बातें देश की अर्थव्यवस्था को निरंकुश पूंजी के हाथ में देने वाली हैं उनका अब तक शासक वर्गों की किसी राजनीतिक पार्टी ने विरोध नहीं किया है। विकास दर और अन्य आंकड़ों के बीच में जो बातें देश की अर्थव्यवस्था को आम आदमी की पंहुच के बाहर ले जाने वाली हैं उनको बहुत ही करीने से बीच में डाल दिया गया है कांग्रेस के घोषणा पत्र में लिखा है की, "हम एक ऐसी खुली हुई और कम्पटीशन वाली अर्थव्यवस्था को प्रमोट करेगें जिसमें घरेलू और दुनिया भर के पूंजीपति और आम आदमी एक दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कर सकेगें ।"

इसका भावार्थ यह हुआ कि देश की अर्थव्यवस्था को बिलकुल स्वतंत्र छोड़ दिया जाएगा जिसमें उद्योग लगाने के लिए बैंक से कर्ज लेकर आया हुआ कुशल और प्रशिक्षित इंजीनियर , देश का सबसे धनी उद्योगपति और अमरीका या यूरोप की बड़ी से बड़ी कंपनी समान अवसर के साथ एक दुसरे का मुकाबला कर सकेगें। सरकार की तरफ से किसी को कोई विशेष सुविधा या अवसर नहीं दिया जाएगा। आसानी से समझा जा सकता है कि यह प्रबंधन क्या गुल खिलायेगा। कृषि क्षेत्र में भी भारी निवेश की बात की गयी है लेकिन खेती से होने वाली पैदावार को भी कारपोरेट तरीके से करने पर जोर दिया जाएगा और धीरे-धीरे देश कारपोरेट खेती की तरफ अग्रसर होगा।

कांग्रेस का तर्क है कि ऐसा करने से खेती से मिलने वाली पैदावार बढ़ेगी। लेकिन इकनामिक फ्रीडम का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा क्योंकि किसान के हाथों में जो अभी खेती के उत्पादन के साधन का नियंत्रण है वह कारपोरेट हाथों में चला जायेगा क्योंकि किसान इस देश के बड़े औद्योगिक घरानों और दुनिया भर के कृषि धन्नासेठों से मुकाबला नहीं कर सकेगा।

बड़े औद्योगिक घरानों को अभी सबसे ज्‍यादा परेशानी मजदूरों को उचित मजदूरी देने में होती है और कर्मचारियों की तनख्‍वाह का एक बड़ा बोझ होता है। कई बार तो ऐसा होता है कि कारखाने में कोई काम नहीं होता और कर्मचारियों को तनख्‍वाह देनी पड़ती है। इसको दुरुस्त करने के लिए देश और विदेश के उद्योगपति पिछले कई वर्षों से कोशिश कर रहे हैं। उसको श्रम कानून में सुधार का नाम दिया जाता रहा है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में इस बार इस समस्या का हल भी निकाल दिया गया है।

घोषणा पत्र में लिखा है कि ऐसी लचीली श्रमनीति बनाई गई है जिससे औद्योगिक उत्पादान की प्रतिस्पर्धा बनी रहे और भारतीय उत्पादन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कम्पटीशन बना रहे। इसका अर्थ यह ऐसे श्रम कानून बनाए जायेगें जिसके बल पर उद्योगपति जब चाहे कर्मचारियों और मजदूरों को काम पर रखें या जब चाहें अलग कर दें। कांग्रेस के घोषणापत्र में बाकी बातें वही हैं जो कांग्रेस पिछले दस वर्षों से करती रही है। लेकिन अगर कांग्रेस सत्ता में आयी तो उनके घोषणा पत्र में ऐसी व्यवस्था है कि साधारण पूंजीवादी निजाम से आगे बढ़ कर इकनामिक फ्रीडम वाला निजाम कायम कर दिया जाएगा।

लेखक परिचय- शेष नारायण सिंह देश के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं और वह राजनीति और अतंराष्‍ट्रीय मुद्दों पर लिखते हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+