तीन मिनट के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करें खुद की तुलना!

[अजय मोहन] प्राइवेट कंपनी हो या फिर सरकारी दफ्तर, वीकेंड आते ही मन में कई तरह की प्लानिंग होने लगती है। शनिवार-रविवार की छुट्टी में ये करेंगे, वो करेंगे, यहां घूमेंगे, वहां घूमेंगे... और कंपनी दिल खोल कर छुट्ट‍ियां भी देती हैं। इसके बावजूद आप लगातार काम करने की वजह से परेशान रहते हैं और छुट्टी का रोना रोते रहते हैं। और अगर छुट्टी के दिन काम करना पड़ जाये तो कंपनी या सरकार को मन ही मन कोसते भी हैं।

चलिये कुछ मिनटों के लिये अपनी तुलना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करें। शायद आप अपनी कंपनी या फिर सरकार को कोसना बंद कर देंगे। क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कि पिछले एक साल में प्रधानमंत्री मोदी ने कितना काम किया और एक आम नागरिक यानि आप ने कितना?

मानक नरेंद्र मोदी आम आदमी
रविवार की छुट्टी कोई छुट्टी नहीं 52 छुट्टियां
शनिवार की छुट्टी कोई छुट्टी नहीं

52 छुट्टियां


त्योहारों की छुट्टी एक भी छुट्टी नहीं 10 से 15 दिन
वर्क प्रेशर अबतक कोई श‍िकायत नहीं की फोर्ब्स द्वारा सर्वे के अनुसार 61% लोग काम के प्रेशर के कारण नींद नहीं आने व डिप्रेशन का श‍िकार हो जाते हैं।
निरंतर काम करना अब तक कोई श‍िकायत नहीं की फोर्ब्स सर्वे के अनुसार 7% लोग छुट्टी नहीं लेने की वजह से बीमार पड़ गये, अस्प्ताल में भर्ती करना पड़ा।
काम से प्रेम हर रोज ऐक्ट‍िव रहते हैं सर्वे के अनुसार 42 प्रतिशत लोग सिर्फ काम ज्यादा होने की वजह से नौकरी छोड़ देते हैं।
कब ली थी लंबी छुट्टी? गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान दो बार- पहला जब स्वाइन फ्लू हुआ था और दूसरा जब दांतों का ट्रीटमेंट चला था इस सवाल का जवाब आप खुद जानते हैं।

मोदी के पास कहां से आयी इतनी ऊर्जा

नरेंद्र मोदी के पास इतना काम करने की ऊर्जा का राज़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) है। बिहार के आरएसएस कार्यकर्ता राम किशोर बताते हैं कि चूंकि मोदी एक प्रचारक के रूप में संघ से जुड़े थे, इसलिये उनके पास ऊर्जा कूट-कूट कर भरी हुई है। प्रचारक वे होते हैं, जो अपने परिवार से दूर रहकर समाज की सेवा करते हैं।

प्रचारक दो प्रकार के होते हैं- अल्पकालिक और पूर्णकालिक। अल्पकालिक प्रचारक कुछ समय जैसे एक साल, दो साल, पांच साल के लिये प्रचारक के रूप में संघ से जुड़ते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं। पूर्णकालिक प्रचारक खुद को देश व समाज के लिये समर्पित कर देते हैं। उन्हीं में से एक नरेंद्र मोदी हैं। सिर्फ वही नहीं, लाखों प्रचारक संघ से जुड़े और खुद को समपिर्त कर दिया। सच पूछिए तो मोदी की ऊर्जा के लिये उन्हें भी प्रणाम करना चाहिये, क्योंकि खुद मोदी भी तो उन्हीं से प्रेरित हुए हैं।

अब आपके मन में उठेंगे ये सवाल और उनके जवाब

सवाल- वो तो प्रधानमंत्री हैं, मैं एक आम आदमी?
जवाब- आप पर परिवार की जिम्मेदारी है, उन पर देश की!

सवाल- उनका परिवार नहीं है, इसलिये इतना काम कर लेते हैं?
जवाब- परिवार से कई लाख गुना बड़ी जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी के कंधों पर है।

सवाल- मुझे प्रधानमंत्री बना दिया जाये, तो मैं भी इतना काम कर लूंगा?
जवाब- कहना आसान है, लेकिन करना नहीं! दूर के ढोल सुहावने ही होते हैं।

सवाल- पीएम के बराबर सैलरी मुझे मिले, तो मैं भी इतना काम करूं!
जवाब- देश में हजारों लोग हैं जो प्रधानमंत्री से ज्यादा सैलरी पाते हैं, लेकिन वे जल्दी अपना वीकेंड मिस नहीं करते।

आगे पढ़ें- अपने ही किले में बंधक बन जायेंगे राहुल गांधी

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