Iran and Pakistan: पाकिस्तान और ईरान की आपसी बमबारी में चीन भी एक किरदार

Iran and Pakistan: दो दिन पहले ईरान द्वारा मिसाइल के जरिए पाकिस्तान में हमले के जवाब में पाकिस्तान ने भी 18 जनवरी की सुबह ईरान पर हमला कर सात लोगों को मार दिया। पाकिस्तान ने इसे 'मार्ग बार सरमाचर' ऑपरेशन का नाम दिया है।

ईरानी मीडिया ने भी स्वीकार किया है कि उनके सरवन शहर के पास एक गांव में सात "गैर-ईरानी नागरिक" मारे गए हैं। हमले में मारे गए लोगों में तीन महिलाएं और चार बच्चे हैं।

China also a huge role in conflict between Pakistan and Iran

अब सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या ईरान और पाकिस्तान में हमले के बदले हमले की यह घटना यहीं रुक जाएगी या एक सिलसिले के रूप में आगे बढ़ेगी? ईरान और पाकिस्तान के बीच युद्ध के लिए कोई तीसरा किरदार भी जिम्मेदार है? क्या होगी अमेरिका और चीन की भूमिका?

हमले के पीछे के कारण

ईरान का कहना है कि बलूचिस्तान के सीमावर्ती शहर पंजगुर में आतंकवादी समूह जैश अल-अदल उनके लिए बड़ी समस्या पैदा कर रहा है, इसलिए उनके ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि ईरान के अंदर गैर-शासित स्थानों पर खुद को सरमाचर कहने वाले आतंकवादी सुरक्षित पनाह लेकर सेना पर हमले कर रहे हैं। ये सरमाचर निर्दोष पाकिस्तानियों का खून बहा रहे हैं।

एक तरफ दोनों देश एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं, दूसरी तरफ आपसी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का दम भी भर रहे हैं। ईरान और पाकिस्तान दोनों का कहना है कि अपने लोगों की सुरक्षा और सीमा की रक्षा के लिए आतंकवादियों पर हमला करना उनका वैध अधिकार है। एक दूसरे पर हमले के बाद रस्मी तौर पर दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को विदेश मंत्रालय में बुलाकर चेतावनी दी और कुछ को देश छोड़ने के लिए भी कह दिया।

चीन की भूमिका

ईरान और पाकिस्तान के बीच चीन एक अहम किरदार है और वह कह चुका है कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार है। पिछले साल चीन ने ईरान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को बुलाकर बीजिंग में एक त्रिपक्षीय आतंकवाद विरोधी और क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता भी करवायी थी। प्रतिनिधिमंडलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति, विशेष रूप से क्षेत्र के सामने आने वाले आतंकवाद के खतरे पर विस्तृत चर्चा की थी।

उस बैठक में पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादियों की कारवाई ही मुख्य एजेंडा आइटम था। इस क्षेत्र में चीन अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है, क्योंकि यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानि सीपैक का यह प्रमुख केंद्र है। इसलिए चीन, पाकिस्तान और ईरान के बीच त्रिपक्षीय सुरक्षा तंत्र की स्थापना पर जोर दे रहा है।

सीपैक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए बलूचिस्तान में स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण है। ईरान में शरण पाने वाले विद्रोहियों के कारण यहाँ शांति स्थापित नहीं हो रही है। बलूचिस्तान, ईरान की सीमा से लगा एक पाकिस्तानी प्रांत है, जहां लंबे समय से विद्रोह चल रहा है। जिसका नेतृत्व बलूच समूह कर रहे हैं।

आंतकवाद को कौन बढ़ावा दे रहा

पाकिस्तान का आरोप है कि बलोच विद्रोही चीन द्वारा चलाई जा रही वैश्विक बेल्ट और रोड पहल को नष्ट करने के लिए ईरान की सीमा के अंदर से हमलों को अंजाम दे रहे हैं, जबकि ईरान अपनी धरती पर बलूच आतंकवादियों की मौजूदगी से इंकार करता रहा है। बलूच विद्रोही सीपैक का खुला विरोध करते हैं। उनका आरोप है कि इस परियोजना के कारण इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों से स्थानीय आबादी को वंचित किया जा रहा है। इसी कारण वे बलूचिस्तान में परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ घातक हमले कर रहे हैं।

दूसरी तरफ ईरानी सुरक्षा बल सुन्नी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ रहे हैं। ईरान का आरोप है कि इस्लामाबाद इन आतंकवादियों को अपने यहाँ पनाह दे रहा है। इस्लामाबाद ईरान में सीमा पार से आतंकवाद चलाने वाले संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है। कुछ महीने पहले ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी और तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधान मंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मुलाकात की थी और इस मसले पर बातचीत भी थी, बल्कि सीमा सुरक्षा सहयोग का विस्तार करने की कसमें भी खाई थी। सीपैक को सुचारु रूप से चलाने के लिए चीन, ईरान के साथ आर्थिक सहयोग भी बढ़ा रहा है।

पाकिस्तान, ईरान और चीन के साथ इस मुद्दे पर अफगानिस्तान भी एक किरदार है। चीन के खिलाफ अधिकतर हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट के क्षेत्रीय सहयोगी इस्लामिक स्टेट खुरासान ने ली है। इसलिए चीन ने अब तालिबान शासकों के साथ भी राजनयिक जुड़ाव बढ़ा दिया है।

हमले की तत्काल वजह

इस बीच 3 जनवरी को ईरान के दक्षिणी शहर करमान में बम विस्फोट के जरिए 90 से अधिक लोगों को मार डाला गया। ईरान के ख़ुफ़िया तंत्र ने इसे इस्लामिक स्टेट की कार्रवाई बताई। बमबारी की योजना बनाने वाला मुख्य संदिग्ध एक ताजिक नागरिक था। बताया जा रहा है कि वह अफगानिस्तान में आईएस द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त आतंकवादी था और दक्षिणपूर्वी सीमा पार करके ईरान पहुंचा था।

दिसंबर के मध्य में जैश अल-अदल (ईरान में जैश अल-धुलम के नाम से जाना जाता है) आतंकवादी समूह ने ईरान के दक्षिण-पूर्व में और बलूचिस्तान प्रांत के रस्क शहर में एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया, जिसमें 11 ईरानी पुलिस वाले शहीद हो गए। ईरान ने इन दोनों हमलों के लिए पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल होने के शक में जैश अल-धुल्म आतंकवादी समूह के ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया।

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