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Bulldozer: इस देश में भी कानून तोड़ने वालों के घरों पर चलते हैं बुलडोजर

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कानून तोड़ने वालों के घरों पर सरकारी बुलडोजर का कहर तो हमने देखा है। मगर इसी तरह इजरायल में भी कानून तोड़ने वालों के घरों को इमरजेंसी डिफेंस रेगुलेशन के आर्टिकल 119 के तहत गिरा दिया जाता है।

Bulldozers actions on houses of those who break the law in this country

Bulldozer: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को सियासी गलियारों में और सोशल मीडिया पर 'बुलडोजर बाबा' के नाम से भी जाना जाता है। सीएम योगी को ये नाम अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए उनके घरों और संपत्तियों पर बुलडोजर चलवाने की वजह से मिला है। बीते कुछ समय से मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान भी अब सीएम योगी की ही राह पर चलने लगे है।

कुछ दिनों पहले इजरायल के येरूशलम में एक यहूदी मंदिर पर फिलिस्तीनी युवक ने अंधाधुंध फायरिंग कर 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकी को इजरायली पुलिस ने मार गिराया था। इस हमले के तुरंत बाद इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने आतंकी के घर को सील करवा दिया था। जिसके बाद आतंकी के घर को बुलडोजर से गिरवाने की कार्रवाई की जाएगी। इजरायल में आतंकियों पर इस तरह की कार्रवाई कोई नयी बात नहीं है। बीते कुछ सालों में इजरायल ने बुलडोजर के जरिये अनेक आतंकियों के घरों को मिट्टी के ढेर में बदला है।

यूपी और एमपी में भी चलता है बुलडोजर

भारत के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान अपराधियों, माफियाओं और दंगाईयों की संपति पर बुलडोजर चलवाया था। माना जाता है कि दूसरी बार सीएम बनने के पीछे उनकी 'बुलडोजर बाबा' वाली छवि ने अहम भूमिका निभाई थी। सीएम योगी आदित्यनाथ के ही नक्शेकदम पर चलते हुए मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी अपराधियों के घरों और संपत्तियों को बुलडोजर से ढहाने की कार्रवाई कर काफी सुर्खियां बटोरी हैं। इसलिए कहना गलत नहीं होगा कि अपराधियों पर बुलडोजर की कार्रवाई का फॉर्मूला इजरायल से ही भारत में आया है।

इजरायल की आतंकियों से निपटने की सख्त नीति

कई दशकों से इजरायल में कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटने के लिए इस तरह के नियमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यूएन मानवाधिकार आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल का मानना है कि आतंकवादी गतिविधियों के जरिये निर्दोष लोगों के जान-माल को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखने वालों की इसकी कीमत चुकानी होगी। इसी के चलते आतंकियों और उनके सहयोगियों के घरों को बुलडोजर से नेस्तनाबूद करने के दंडात्मक उपाय शुरू किए गए थे।

हालांकि, इजरायली डिफेंस फोर्स की एक समीक्षा के बाद आतंकियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई 2005 में बंद कर दी गई थी। समीक्षा में कहा गया था कि आतंकियों के घरों पर बुलडोजर चलाने से कुछ खास फायदा नहीं हो रहा है। लेकिन साल 2014 में इस कार्रवाई को एक बार फिर से लागू कर दिया गया, जो अभी तक जारी है।

क्या है आपातकालीन रक्षा नियम का आर्टिकल 119?

इमरजेंसी डिफेंस रेगुलेशन के आर्टिकल 119 के तहत पहले केवल उन्हीं आतंकियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाता था, जिनके हमलों में किसी की जान का नुकसान हुआ है या उनके घरों से हथियारों की बरामदगी हुई हो। समय के साथ इस कार्रवाई में एक बदलाव किया गया है। जिसके तहत आतंकियों के घरों पर बुलडोजर चलाने से पहले उन्हें सील कर दिया जाता है। घरों को अस्थायी तौर पर सील करने के लिए दरवाजों और खिड़कियों पर स्टील की मोटी चादरें जड़ दी जाती हैं। घरों को सील करने का आदेश 10 दिनों के लिए ही मान्य होता है। इसके बाद घर को गिराने की कार्रवाई होती है।

इस बीच आतंकियों के परिवार वाले चाहें, तो इजरायली सेना के सामने अपील कर सकते हैं। अगर सेना उनकी अपील ठुकरा देती है, तो उनके सामने इजरायल की हाईकोर्ट में अपील करने का विकल्प होता है। ज्यादातर मामलों में हाईकोर्ट की ओर से आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई को रोका नहीं जाता है। वैसे, ऐसे मामलों में इजरायली डिफेंस फोर्स की ओर से घरों पर बुलडोजर चलाने के लिए एक वारंट जारी किया जाता है। जिस पर सेना के महाअधिवक्ताओं की मुहर लगी होती है।

नियम और भी सख्त हो सकते हैं

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट की ओर से आतंकियों और उनके सहयोगियों से निपटने के लिए और भी कई दंडात्मक उपायों को लागू करने के बारे में सोच रही है। जिसमें इन आतंकियों के परिवारों से नागरिकता का अधिकार छीनने के साथ उन्हें देश से निर्वासित करने और इजरायली नागरिकों को बंदूक का लाइसेंस देने में तेजी लाने जैसे उपाय अपनाए जाने की संभावना हैं।

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