Ministry of Cooperation: क्यों बढ़ रहा है सहकारिता मंत्रालय का मोदी सरकार में महत्त्व
इस बार के बजट में छोटे और सीमांत किसान व अन्य कमजोर तबकों के लिए सहकारी-आधारित आर्थिक विकास मॉडल को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

Ministry of Cooperation: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में आम बजट 2023-24 पेश किया। सरकार ने इस बजट में सहकारिता मंत्रालय के लिए चालू वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 1,150.38 करोड़ रुपये का कुल बजट परिव्यय निर्धारित किया है।
इस पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी बजट 2023 को सर्वसमावेशी और दूरदर्शी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी है। अमित शाह ने अपने श्रंखलाबद्ध ट्वीट्स में कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाया गया बजट-2023 अमृतकाल की मजबूत आधारशिला रखने वाला बजट है।
इस बीच सवाल ये उठता है कि आखिर क्या है सहकारिता मंत्रालय? कब आया अस्तित्व में और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है? इस मंत्रालय के गठन के पीछे आखिर कारण क्या है? ऐसे कई सवाल हैं जो इस विभाग को लेकर उठते रहे हैं।
क्या है सहकारिता?
आर्थिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए संस्थाबद्ध हुए लोग, जो व्यवसाय चलाकर समाज की आर्थिक सेवा तथा संस्था के सभी सदस्यों को आर्थिक लाभ कराते हैं, उनको सहकारिता या सहकारी समिति कहा गया है। इस प्रकार के व्यवसाय में लगने वाली पूंजी संस्था के सभी सदस्यों द्वारा आर्थिक योगदान के रूप में एकत्रित की जाती है। जैसे बैंकिंग, खेती, चीनी मिल संचालन, डेयरी फार्मिंग व अन्य। PIB की रिपोर्ट के मुताबिक देश में फिलहाल लगभग 95,000 प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) हैं। 1,99,182 कोऑपरेटिव डेयरी सोसाइटी, 25,297 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियां और 327 शुगर मिल एसोसिएशन हैं। इसके अलावा हर राज्य में कई सहकारी बैंक हैं। इस आंदोलन की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण अमूल ब्रांड है जो कि गुजरात की एक सहकारी संस्था द्वारा ही चलाया जाता है।
कब हुआ इस मंत्रालय का गठन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'सहकार से समृद्धि' की अपनी परिकल्पना द्वारा सहकारिता से जुड़े लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कटिबद्ध हैं। इस विजन को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, 06 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सहकारिता मंत्री बनाया गया। उनके नेतृत्व में ही यह मंत्रालय, सहकारिता क्षेत्र के विकास को एक नई गति देने, मजबूत करने और इसे सर्वस्पर्शीय व सर्वसमावेशी विकास का मॉडल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
सहकारिता से जनता को क्या लाभ होगा?
यह मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान करेगा। यह सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक पहुंचने वाले एक जनभागीदारी आधारित आंदोलन को मजबूत बनाने में भी सहायता प्रदान करेगा। हमारे देश में सहकारिता आधारित आर्थिक विकास मॉडल बहुत प्रासंगिक है, जहां प्रत्येक सदस्य अपनी जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करता है। यह मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए 'कारोबार में सुगमता' के लिए प्रक्रियाओं को कारगर बनाने और बहु-राज्य सहकारी समितियों (MSCS) के विकास को सक्षम बनाने की दिशा में कार्य करेगा।
जैसे ग्रामीण स्तर पर किसानों द्वारा बहुत सी प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटीज का गठन किया गया है। ये सोसाइटियां किसानों को कर्ज दिलाती हैं, जिसके लिए जिला सहकारी बैंक और राज्य सहकारी बैंक बनाए गए हैं। नाबार्ड की सालाना रिपोर्ट के अनुसार साल 2019-20 में देश में 95,238 प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी, 363 जिला सहकारी बैंक और 33 राज्य सहकारी बैंक है। इसके अलावा शहरी सहकारी बैंक भी हैं जो शहरों के कम आय के लोगों को कर्ज मुहैया कराते हैं। साल 2019-20 में देश में 1,539 शहरी सहकारी बैंक थे। कृषि की तरह ही सहकारिता को संविधान की समवर्ती सूची में शामिल किया गया है, जिसका मतलब यह है कि इन पर केंद्र और राज्य सरकारें दोनों का शासन लागू होगा।
बजट 2023-24 में सहकारिता से संबंधित प्रमुख घोषणाएं
केंद्रीय बजट 2023-24 में इन योजनाओं को खास ध्यान में रखा गया है। इसके तहत 2,516 करोड़ रुपये के लागत से 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। इनके लिए राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके साथ बड़े पैमाने पर विकेंद्रीकृत भंडारण क्षमता स्थापित की जाएगी। इससे किसानों को अपनी उपज को स्टोर करने और अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। सरकार अगले 5 वर्षों में सभी पंचायतों व गांवों में बड़ी संख्या में सहकारी समितियों, प्राथमिक मत्स्य समितियों और डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना करेगी।
आयकर का लाभ
31 मार्च, 2024 तक मैन्युफैक्चरिंग स्टार्ट करने वाली नयी सहकारी समितियों को 15% के टैक्स दर का फायदा दिया जाएगा (जो कि नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के अनुरूप है)। साथ ही पैक्स और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PACRDBs) में नकद जमा व उनके द्वारा नकद कर्ज की उच्चतम सीमा को 2 लाख रुपये प्रति सदस्य किया गया है। साथ ही इस साल के बजट में सहकारी समितियों के लिए टीडीएस (श्रोत पर टैक्स कटौती) के बिना नकदी निकालने की सीमा भी बढ़ा दी है। इस तरह की निकासी पर टीडीएस के बिना सहकारी समितियों को एक साल में 3 करोड़ रुपये तक की नकदी निकालने में सक्षम बनाने का प्रस्ताव है।
चीनी सहकारी मिलों को राहत
सरकार ने चीनी सहकारी समितियों को निर्धारित वर्ष 2016-17 से पहले की अवधि के लिए गन्ना किसानों को किए गए भुगतान को व्यय के रूप में दाखिल करने का मौका भी दिया है। इससे चीनी सहकारी समितियों को लगभग 10,000 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। सरकार की ये घोषणाएं छोटे एवं सीमांत किसानों और कमजोर तबकों के लिए सहकारी-आधारित आर्थिक विकास मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयास के लिये की गयी हैं।
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