Budget 2023-24: भविष्य की चिंता में वर्तमान की अनदेखी तो नहीं?
वित्त मंत्री ने अमृतकाल का पहला बजट प्रस्तुत किया है। मतलब आगे के 25 सालों की तैयारी की जा रही है जब स्वतंत्र भारत 100 साल का होगा। सवाल यह उठता है कि भविष्य की चिंता में कहीं वर्तमान की अनदेखी तो नहीं हो रही है?

Budget 2023-24: भाजपा जब से सत्ता में आयी है भविष्य की बातें ज्यादा होने लगी हैं। इस बार के बजट के बारे में भी यही कहा जाएगा। भविष्य में बहुत कुछ करने की बातें सुनने में अच्छी लगती है लेकिन सामान्यजन के लिए आज का सामना कैसे किया जाए यह समस्या रहती है। सामान्य जनता के लिए भविष्य के विकास में आज की राहत ढूंढना कठिन होता है।
अमृतकाल और सप्तर्षि का मार्गदर्शन
बजट भाषण की शुरुआत में ही वित्त मंत्री ने बजट को अमृत काल का पहला बजट कहा और इस काल के मार्गदर्शन के लिए सप्तर्षि को ही बुला लिया। यह बात और है कि सप्तर्षि कोई पुराने कश्यप, अत्री या वशिष्ठ जैसे ऋषि नहीं होंगे बल्कि आधुनिक विकास साधने वाले मार्गदर्शक तत्व रहेंगे। समावेशी विकास, अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना, अवसंरचना एवं निवेश, सक्षमता को सामने लाना, हरित विकास, युवा शक्ति और वित्तीय क्षेत्र यह उद्देश मार्गदर्शन करेंगे। निश्चित ही इन मार्गदर्शक तत्वों के बारे में किसी को आपत्ति होने की जरूरत नहीं है क्योंकि अगर नीतियों का आधार अच्छा है तो विकास होगा ही। लेकिन बजट में ऐसा क्या है जो अर्थव्यवस्था को विकास की ओर ले जाएगा यह समझना मुश्किल काम है।
बजट में गरीब के लिए चिंता
विशेष उल्लेख करने की बात यह है कि सरकार जेल में पड़े हुए गरीबों को जमानत के लिए वित्तीय सहायता देगी। वैसे ही सरकार एक जनवरी 2023 से अंत्योदय और अग्रक्रम में शामिल परिवारों को एक साल के लिए अनाज मुफ्त देगी जिसका खर्चा केंद्र सरकार करेगी। पर्यटन बढ़ाने के जो प्रयास बजट में किए है उसमें रास्ते पर व्यवसाय करने वालों को लाभ हो सकता है। साथ ही, गरीब वर्ग को जो सब्सिडी दी जाती है वह मिलती रहेगी जिसमें मुख्यत: कम कीमत में अनाज मिलना, एलपीजी के लिए मिलने वाली सब्सिडी शामिल है।
करदाता के लिए नए स्लैब
निश्चित ही इस बार वित मंत्री ने इनके लिए कुछ किया है। कस्टम ड्यूटी के स्लैब 21 से 13 कर दिए हैं। आयात की जाने वाली कुछ वस्तुओं पर ड्यूटी कम की है। इससे भारत में बनने वाले मोबाइल फोन में लगने वाले पार्ट, लैब में बनने वाले डायमंड के सीड्स इत्यादि हैं। वहीं कुछ पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई है जैसे सिल्वर बार, कम्पौंडेड रबर आदि। प्रत्यक्ष करों में छोटे उद्योग एवं व्यवसाय करने वालों को कर अनुमानित आय की सीमा 2 करोड़ एवं 50 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 करोड़ तथा 75 लाख रुपए की है। सहकारी और चीनी उद्योग को भी राहत दी गई है। प्राथमिक सहकारी समिति जैसी समितियों के सदस्य अब 2 लाख रुपए तक नगद रूप में पैसे जमा करा सकते है। मकान में निवेश करने वालों तथा बीमा पॉलिसी धारको को अब कैपिटल गेन में 10 करोड़ रुपए तक ही छूट मिलेगी।
आयकर की रिबेट भी 5 से 7 लाख रूपये कर दी गई है। अब रुपए 3 लाख तक कोई कर नहीं होगा। रेट भी कम किए है। 3-3 लाख से स्लैब बढ़ेगा और रेट 5% से बढ़ेंगे। स्टैंडर्ड डिडक्शन सभी सैलरी वालों को मिलेगा यह भी अच्छा प्रस्ताव है। लीव एनकैशमेंट की लिमिट भी 3 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रूपये की है।
कृषि क्षेत्र पर ध्यान
कृषि विभाग की लगभग सारी योजनाएं पूर्ववत चालू रहेंगी। जैसे कि फसल बीमा योजना, इंटरेस्ट सबवेंशन योजना, किसान सन्मान योजना (इसमे कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई। रुपए 6000 प्रति वर्ष किसान परिवार को मिलते रहेंगे), किसान मानधन योजना( वृद्ध किसान को रु 3000 प्रति माह पेंशन), एफ़पीओ को बढ़ावा देने वाली योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना वगैरह चालू रहेंगी। नई योजना की बजट में जो घोषणा हुई है उनमें कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना और कृषि वर्धक निधि की स्थापना करना और भारत को 'श्री अन्न' (मिलेट) का ग्लोबल केंद्र बनाने की बात मुख्य है। इसका मतलब किसान को यह बजट में अप्रत्यक्ष लाभ हुआ है। किसान सम्मान में बढ़ोत्तरी और फसल बीमा योजना में बदलाव की अपेक्षा थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से निश्चित ही किसान को भविष्य में लाभ होगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
इस बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात प्रमुखता से की गयी है। इसमें लॉजिस्टिक्स सैक्टर पर ज़ोर साफ दिख रहा है। करीब 100 प्रोजेक्ट इसमे शामिल किए जाएंगे। 50 नए एयरपोर्ट, वॉटर एरोड्रम इत्यादि निर्माण किए जाएंगे। शहरी विभाग का इन्फ्रास्ट्रक्चर इसमें शामिल कर एक कदम आगे बढ़ाया है। अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड एक नया फंड होगा जो वरीयता ऋण देने में जो कमी आएगी उससे बनाया जाएगा और राज्य सरकार इसमें सहयोग करेगी। शहर-शहर में इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में यह निधि सहायक होगी। इसमें भी महापालिका और राज्य सरकारें कितनी दिलचस्पी दिखाती हैं, यह देखने वाली बात होगी।
खर्चा ज्यादा आमदनी कम
वित मंत्री ने बहुत सी बातें कहीं जिसमें शिक्षकों की ट्रेनिंग से लेकर सरकारी कर्मचारियों की ट्रेनिंग तक की बातें शामिल हैं। नर्सिंग कॉलेज खोलने की बात और कई संशोधन करने की बात भी उन्होने की, जो सराहनीय है। ई-कोर्ट की स्थापना करने की भी बात आगे चलकर उपयुक्त होगी। और भी बहुत सारी बातें वित्त मंत्री ने की। लेकिन सरकार की माली हालत इतनी अच्छी नहीं है जो सारे काम कर सके।
सरकार की आय के हर रुपए में 34 पैसे उधार के हैं। 30 पैसे आयकर और कॉरपोरेशन टैक्स से और 17 पैसे जीएसटी से आते हैं। कस्टम ड्यूटी से सिर्फ 4 पैसे और यूनियन एक्साइज़ से 7 पैसे आते हैं। खर्चा देखा जाए तो 20 पैसे उधार पर ब्याज देना पड़ता है। सब्सिडी पर 7 पैसे और डिफेंस पर 8 पैसे खर्च होते है। 45 लाख करोड़ के खर्चे में 35 लाख करोड़ राजस्व खाते में खर्च होंगे। 10 लाख करोड़ कैपिटल अकाउंट का है जिससे कुछ संपतिया बनेगी। करीब 18 लाख करोड़ का वित्तीय घाटा है जिसमें राजस्व घाटा ही रु 8.70 लाख करोड़ का है। निश्चित ही वित्त मंत्री भले घाटा घटने या घटाने की बात कर रहीं हो लेकिन महंगाई के बढ़ते माहौल में यह नुकसान करेगा इसमें कोई संदेह नहीं।
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यह सही है कि अंतरराष्ट्रीय माहौल अच्छा नहीं है और सभी देश आत्मरक्षात्मक कदम उठा रहे हैं, उससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर असर हो रहा है। यह बात अच्छी है कि भारत एक अकेला देश है जिसकी विकास की पैठ अच्छी है और सभी लक्षण सकारात्मक हैं। लेकिन इससे भारतीय व्यवस्था का खतरा कम नहीं हो जाता। इसलिए वित्त मंत्री जो करना चाहती हैं, वैसा होगा ऐसा कहना मुश्किल है। यह जरूर है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर वापस लौट रही है और दुनिया के मुक़ाबले में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। सप्तर्षि का साथ मिलता रहा तो भविष्य की आशा भी बनी रहेगी।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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