जन्मदिन विशेष: आयरन लेडी इंदिरा ने बदला इतिहास-भूगोल

नयी दिल्ली। भारतीय राजनीति के फलक पर श्रीमती इंदिरा गांधी के हाथ में पीएम पद ऐसे समय में आया था जब देश नेतृत्व के संकट से जूझ रहा था। शुरू में गूंगी गुडि़या कहलाने वाली इंदिरा ने अपने चमत्कारिक नेतृत्व से न केवल देश को कुशल नेतृत्व प्रदान किया बल्कि विश्व मंच पर भी भारत की धाक जम दी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने बातचीत में बताया था इंदिरा एक कुशल प्रशासक थीं। उनके सक्रिय सहयोग से बांग्लादेश अस्तित्व में आया। जिससे इतिहास और भूगोल दोनों बदल गए। इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाये जाने पर पूछे गये सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि आपातकाल लगाना गलत था और अपनी इस भूल को उन्होंने भी बाद में स्वीकार किया था।

बचपन से ही इंदिरा में नेतृत्व के गुण मौजूद थे। भारत के आजादी के आंदोलन को गति प्रदान करने के लिए इंदिरा ने बचपन में ही वानर सेना का गठन किया था।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर कलीम बहादुर ने बताया कि इंदिरा का प्रधानमंत्रित्व काल बहुत अच्छा था। उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये जिससे विश्व में भारत का सम्मान बढ़ा। उन्होंने भारत की विदेश नीति को नए तेवर दिए बांग्लादेश का बनना उनमें से कुछ उदाहरण हैं। इससे उन्होंने विश्व मानचित्र पर देश का दबदबा कायम किया।

जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू के घर इंदिरा का जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ था। रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन में पढ़ाई करने वाली इंदिरा बचपन में काफी संकोची स्वभाव की थी। अपनी राजनीतिक पारी के शुरूआती दिनों में गूंगी गुडि़या के नाम से जानी जाने वाली इंदिरा बाद के दिनों में बहुत बड़ी जन नायक बन कर उभरी।

उनके व्यक्तित्व में अजीब सा जादू था जिससे लोग खुद ब खुद उनकी तरफ खिंचे चले आते थे। वह एक प्रभावी वक्ता भी थी जो अपने भाषणों से लोगों को मंत्रामुग्ध कर देती थी। प्रोफेसर बहादुर ने कहा कि इंदिरा गांधी कभी भी अमेरिका जैसे राष्‍ट्रों के सामने झुकी नहीं।

हाल ही में विकीलिक्स द्वारा किये गये खुलासों में यह बात सामने आयी है कि निक्सन जैसे शक्तिशाली राष्ट्रपति भी उनसे काफी नाराज थे। लेकिन उन्होंने इसकी कभी परवाह नहीं की।

कांग्रेस ने हमेशा कहा है हमारे देश में इंदिरा गांधी अंतिम जन नायक थी। उनके बाद कभी उन जैसे राजनेता नहीं हुआ। आपातकाल लगाने के बाद उन्हें चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा लेकिन फिर से चुनाव में वह विजयी होकर लौटीं और अकेले अपने दम पर सरकार का गठन किया।

उन्‍होनें कहा कि आज गठबंधन की सरकारें बन रही हैं। आज के किसी भी राजनेता में वह जादुई ताकत नहीं है कि अपने अकेले दल के दम पर सरकार बना सके। पंजाब में आतंकवाद का सामना करते हुए अपने प्राणों की आहूति देने वाली इंदिरा गांधी को अपने छोटे बेटे संजय गांधी के आक्समिक निधन से काफी दुख पहुंचा था।

इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में लगभग 10 सालों तक शामिल रहे कर्ण सिंह ने कहा कि संजय के निधन से उन्हें काफी दुख पहुंचा था लेकिन राजीव से उन्हें काफी संबल मिला। यह पूछे जाने पर कि क्या इंदिरा गांधी ने वंशवाद को बढ़ावा दिया, उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है। संजय हो या राजीव सभी लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीत कर आए थे।

उन्होंने इन नेताओं को राष्ट्र पर थोपा नहीं था। पंजाब में ब्लू स्टार आपरेशन से नाराज उनके दो अंगरक्षकों ने 31 अक्तूबर 1984 को उनकी गोली मार कर हत्या कर दी।

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