पुण्यतिथी विशेष: हिंदुस्तान को जरूरत है 'इंदिरा गांधी' जैसे कूटनीतिज्ञ पीएम की

पंडित नेहरू और कमला नेहरू की इकलौती पुत्री इंदिरा जी का जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ था। इन्दिरा को उनका 'गांधी' उपनाम फिरोज़ गाँधी से विवाह के पश्चात मिला था। इंदिरा जी ने अपनी शिक्षा शान्तिनिकेतन से पूरी की। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ही इन्हे 'प्रियदर्शिनी' नाम दिया था। 1971 के भारत-पाक युद्ध में एक निर्णायक जीत के बाद की अवधि में अस्थिरता की स्थिती में उन्होंने सन् 1975 में आपातकाल लागू किया। उन्होंने एवं कॉंग्रेस पार्टी ने 1977 के आम चुनाव में पहली बार हार का सामना किया। सन् 1980 में सत्ता में लौटने के बाद वह अधिकतर पंजाब के अलगाववादियों के साथ बढ़ते हुए द्वंद्व में उलझी रहीं जिसमे आगे चलकर सन् 1984 में अपने ही अंगरक्षकों द्वारा उनकी राजनैतिक हत्या हुई।
इंदिरा गांधी देश की उस बेटी का नाम है जिन्होंने भारत को अंतराष्ट्रीय नक्शे में एक मजबूत, सक्षम और निर्णय लेने के राष्ट्र के रूप में प्रसारित किया और कामयाब हुई। साल 1971 में बांग्लादेश को जन्म दिलवाकर इंदिरा ने अपनी सुलझी हुई सोच और कूटनीति का परिचय देकर अपने नाम के आगे 'आयरन लेडी' लिखवा लिया। जिंदगी औऱ देश के लिए कई अहम फैसले लेने वाली इंदिरा गांधी ने एक अंतिम जनसभा में कहा था कि वो अपने शरीर का एक-एक कतरा भारत के नाम कर देंगी जो कि उन्होंने कर भी दिखाया।
हिंदुस्तान की मिट्टी में कई नौनिहालों ने जन्म लिया और देश की सेवा की है लेकिन इंदिरा गांधी एक बेहतरीन राजनीतिज्ञ होने के साथ ही कूटनीति में माहिर थी जिसके कारण ही उन्होंने अपने जीतेजी अपने और अपने शासन के खिलाफ उठी विरोधियों की आवाज को कभी भी आगे आने नहीं दिया। हालांकि उनके कुछ फैसलों पर आज भी भयंकर बहस होती है और विरोधियों द्वारा गलत ठहराये जाते हैं लेकिन फिर भी इंदिरा गांधी का व्यक्तित्व एक शानदार राजनीतिज्ञ और मजबूत इरादों वाली महिला का रहा है।
जिसकी जरूरत आज देश के एक बार फिर से हैं। लोकसभा चुनावों की तैयारी जोरो पर हैं, देश आंतरिक और बाहरी समस्याओं से जूझ रहा है। देश की जनता देश के पीएम की कुर्सी को बड़ी ही आशाओं और उम्मीदों से निहार रही है जो कि उनकी मूलभूत जरूरतों को पूरा कर सके। आज देश को इंदिरा जैसी ही काबिल लेकिन निर्णय लेने वाले पीएम की जरूरत है जो कि देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब भी दे औऱ देश के आंतरिक कलह को भी अपने फैसलों से शांत करे।
सुगबुगाहट है कि इस बार के चुनावों में कांग्रेस प्रियंका गांधी को चुनावी मैदान में उतार सकती है। प्रियंका के अंदर लोगों को इंदिरा की छवि दिखती है लेकिन प्रियंका को अभी राजनैतिक पृष्ठभूमि पर अपने आप को दादी की तरह साबित करना बाकी है। तो वहीं भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की छवि में भी लोगों को इंदिरा जी जैसा आक्रामक रवैया दिखता है जिसकी वजह से राजनैतिक पंडितों की निगाहें मोदी पर लगी हुई हैं और उन्हें लगता है कि मोदी ही देश को गति और दिशा दे सकते हैं। कुल मिलाकर सार सिर्फ इतना है कि आज हिंदुस्तान को जरूरत है कूटनीति में माहिर पीएम की जैसे कि इंदिरा गांधी थीं।












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