Bagh Nakh Shivaji: लंदन से लाया जायेगा शिवाजी का बाघ नख, मोदी सरकार विदेशों से भारतीय धरोहर लाने में सबसे आगे
Bagh Nakh Shivaji: जिस बाघ नख (व्याघ्र नख या वाघ नख) से शिवाजी ने बीजापुर के सेनापति अफजल खान को मार डाला था, वह जल्दी ही भारत के पास होगा। महाराष्ट्र सरकार में संस्कृति मंत्री सुधीर मुगंटीवार इस महीने इसे लेने लंदन जा सकते हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी ट्वीट कर जानकारी दी है कि ब्रिटेन सरकार छत्रपति शिवाजी महाराज का बाघ नख वापस लौटाएगी। अभी यह 'बाघ नख' लंदन स्थित विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में है।
इस संग्रहालय के मुताबिक शिवाजी का यह हथियार ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जेम्स ग्रांट डफ को मराठा साम्राज्य के तत्कालीन पेशवा (प्रधानमंत्री) ने 1818 में दिया था। उल्लेखनीय है कि 1659 में शिवाजी ने बाघ के नाख़ून जैसे दिखने वाले हथियार से अफजल खान को मौत के घाट उतार दिया था। उल्लेखनीय है कि जब से मोदी सरकार केंद्र में आयी है, तब से भारतीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की जुडी विदेशों में पड़ी कई वस्तुएं भारत लायी जा चुकी हैं।

क्या है 'बाघ नख' और इसका इतिहास?
'बाघ नख' मजबूत धातु से बने चार पंजे होते हैं। जो एक पट्टी पर लगे होते हैं। पहली और चौथी उंगलियों के लिए दो छल्ले होते हैं जिन्हें पहना जाता है। इस खंजर के आगे का हिस्सा बेहद नुकीला होता है, जो देखने में बाघ के नाखूनों जैसा ही दिखता है। मराठा इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1659 में बीजापुर सल्तनत के खूंखार और निर्दयी सेनापति अफजल खान को 'बाघ नख' से मारने की कहानी यहां की लोककथाओं का एक हिस्सा है।
इतिहासकार जदुनाथ सरकार की किताब शिवाजी एंड हिज टाइम्स के अनुसार शिवाजी को मारने के लिए अफजल खान एक बड़ी सेना लेकर लेकर पहुंचा था। लेकिन, दूत भिजवाने के बाद भी शिवाजी से मिलने का मौका नहीं मिल पा रहा था, क्योंकि शिवाजी जानते थे कि अफजल खान एक बड़ी सेना के साथ है। आखिर 10 नवंबर 1659 को दोनों की मुलाकात तय हुई।
जब 6 फीट 7 इंच लंबे-चौड़े अफजल खान से मिलने शिवाजी पहुंचे तो अफजल खान ने उन्हें गले लगाने के लिए अपनी बांहें फैला दीं। गले मिलने के बहाने अफजल खान ने अचानक शिवाजी के गले को अपनी बाहों में जकड़ लिया और कटार से उन पर हमला कर दिया। तभी शिवाजी ने तेजी से प्रतिक्रिया दी और बाएं हाथ में छिपाकर रखे 'बाघ नख' को अफजल के पेट में भोंक दिया। साथ ही अपने दाहिने हाथ से अपने बिछुवे से प्रहार किया। अफजल खान घायल होकर गिर गया और बाद में उसकी मौत हो गयी।
मोदी सरकार विदेशों से भारतीय धरोहरों को स्वदेश लाने में सक्रिय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब जून, 2023 में अमेरिका दौरे पर थे, तब उन्होंने कहा था कि भारत की पुरानी मूर्तियां और अन्य धरोहरें चोरी हो गईं थीं, जिनकी संख्या 100 से भी ज्यादा है, उन्हें अमेरिकी सरकार ने लौटाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी मुझे बहुत सी ऐतिहासिक चीजें लौटाई गई थीं।
मई, 2023 में केंद्र सरकार ने जानकारी दी थी कि बीते 9 साल में दुनियाभर से करीब 240 प्राचीन धरोहरें भारत वापस लाईं गईं हैं और 72 धरोहरें देश वापस लाए जाने की प्रकिया चल रही है। आंकड़ों के अनुसार, 24 अप्रैल, 2023 तक भारतीय मूल की 251 कीमती वस्तुएं विभिन्न देशों से वापस आईं हैं। जिनमें से 238 वस्तुएं 2014 के बाद से वापस लाईं गईं हैं। इन कलाकृतियों में करीब 1100 साल पुरानी नटराज मूर्ति और नालंदा के संग्रहालय से करीब छह दशक पहले गायब बुद्ध की 12वीं सदी की कांस्य प्रतिमा शामिल है।
मोदी सरकार के कार्यकाल में जो प्राचीन धरोहर आईं हैं उनमें देवी अन्नापूर्णा, अर्द्धनारीश्वर, पैरट लेडी, दुर्गा, संत मणिक्कवाचकर की कांस्य प्रतिमा, धातु की गणेश प्रतिमा, धातु की भूदेवी, धातु का चक्क्रतलवार, आसन में बैठे भगवान बुद्ध, पत्थर की प्रत्यंगिरा देवी की प्रतिमा, बोधिसत्व का सिर, भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की धातु की प्रतिमा शामिल हैं। साथ ही कई महापुरुषों के प्रतीक चिन्ह भी विदेशों से वापस लाए जा रहे हैं। यूपीए के 10 सालों के शासन काल के दौरान सिर्फ एक ही कलाकृति वापस लाई जा सकी थी। यह कलाकृति भी साल 2013 में फ्रांस ने वापस लौटाई थी।












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