Andhra Pradesh Capital: महज 9 साल में आंध्र प्रदेश ने बदली चौथी बार राजधानी, क्या है विशाखापट्टनम का इतिहास?
आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी ने विशाखापट्टनम को नयी राजधानी घोषित किया है। जबकि तेलंगाना राज्य के अलग होने के बाद अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाया गया था।

Andhra Pradesh Capital: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल डिप्लोमेटिक अलायंस मीट में तेलंगाना के सीएम ने दक्षिण भारत के दूसरे सबसे बड़े तटीय महानगर विशाखापट्टनम को नयी राजधानी बनाए जाने की घोषणा की है। उन्होंने इस डिप्लोमेटिक अलायंस में शामिल होने आए निवेशकों और डिप्लोमेट्स को अपनी नयी राजधानी में आगामी 3 और 4 मार्च को होने वाले इन्वेस्टर समिट में भाग लेने का आमंत्रण दिया।
इस साल 28 और 29 मार्च को विशाखापट्टनम में G20 समिट वर्किंग ग्रुप कमिटी की मीटिंग होनी है, इसके लिए केन्द्र सरकार ने विशाखापट्टनम के सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इससे पहले 3 और 4 मार्च को आंध्र प्रदेश सरकार विशाखापट्टनम में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट आयोजित करने वाली है।
चौथी बार राजधानी में बदलाव
साल 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना को अलग करने के बाद अगले 10 साल तक हैदराबाद को ही इन दोनों राज्यों की राजधानी बनाए जाने का प्रावधान था। ऐसा न हो सका तो फिर पूर्व 2015 में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को राजधानी बनाने का निर्णय लिया था। चंद्रबाबू नायडू के बाद मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी बने तो उन्होंने तीन राजधानी वाले फॉर्मूला बनाया। वे राज्य की अलग-अलग लेजिसलेटिव, एग्जीक्यूटिव और ज्यूडिशियल कैपिटल चाहते हैं।
दरअसल, मुख्यमंत्री रेड्डी चाहते हैं कि आंध्र प्रदेश के विधानसभा और मंत्रालय जैसे काम अमरावती से हो। वहीं, हाईकोर्ट कुर्नूल में बने, जिसे कानून राजधानी के तौर पर विकसित करने की योजना है। इसके अलावा, कार्यपालिका का काम विशाखापट्टनम से चलाने की योजना थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार के तीन राजधानी वाले फॉर्मूला को खारिज कर दिया, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसलिए फिलहाल, मार्च 2023 से मुख्यमंत्री जगन रेड्डी समेत पूरी राज्य सरकार विशाखापट्टनम से ही काम करेगी।
विशाखापट्टनम क्यों बनी राजधानी?
अब सवाल यह उठता है कि महज 9 साल के अंतराल में कई योजनाओं के बाद, विशाखापट्टनम को राजधानी के तौर पर क्यों चुना गया? इसके पीछे आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक कारण भी है। विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश का सबसे बड़ा और विकसित शहर है। बंगाल की खाड़ी के तट पर बसा यह शहर शुरुआत से ही दक्षिण-पूर्व भारत के व्यापार का मुख्य केन्द्र रहा है। ऐसे में राज्य की राजधानी पहले से विकसित शहर में बनने से राज्य के अन्य शहरों का विकास करने में इसे एक मॉडल शहर के तौर पर दर्शाया जा सकता है।
कानूनी दांव-पेच में फंसा तीन राजधानी वाला बिल
विशाखापट्टनम को राजधानी बनाने के बाद भी जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने तीन राजधानी वाले बिल को वापस नहीं लिया है। इस बिल को आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन ऐक्ट 2014 के नाम से जनवरी 2020 में पास किया गया था। जगन रेड्डी की सरकार द्वारा लाए गए इस बिल के नियम 7 में आंध्र प्रदेश की तीन राजधानी बनाए जाने के बारे में लिखा है। पिछली सरकार में अमरावती के आस-पास के सैकड़ों किसानों ने राजधानी बनाने के लिए अपनी जमीन दान की थी। जगन सरकार द्वारा तीन राजधानी बनाए जाने वाले बिल के विरोध में इन किसानों ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में राजधानी रूथू परिरक्षण समिति के तहत याचिका दायर की थी।
तीन राजधानी का मामला कानूनी दांव-पेंच में फंसने के बाद जगन रेड्डी की सरकार ने नवंबर 2021 में परीसीमन कानून को रद्द करने का फैसला किया था और कहा था कि सरकार एक बेहतर बिल लेकर आएगी। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए 3 मार्च 2022 को सरकार को आदेश दिया कि वो अगले 6 महीने में कैपिटल रीजन डेवलपमेंट ऑथोरिटी के तहत विकसित करे। हालांकि, बाद में सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया। मार्च 2023 में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी समेत पूरी सरकार विशाखापट्टनम से ही काम करेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आंध्र प्रदेश की राजधानी विशाखापट्टनम बनी रहेगी या फिर अमरावती को एक बार फिर से राजधानी बनाया जाएगा।
विशाखापट्टनम का इतिहास
विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश का सबसे बड़ा और बंगाल की खाड़ी के तटीय इलाके का चेन्नई के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहर है। छठी शताब्दी तक यह कलिंग राज्य का हिस्सा हुआ करता था। विशाखापट्टनम शुरुआत में ही व्यापार का मुख्य केंद्र रहा है। यहां के बंदरगाह से पश्चिमी एशिया और यूरोप के शहरों से व्यापार किया जाता था। 11वीं और 12वीं शताब्दी के दौरान विशाखापट्टनम पर चोल और गजपति साम्राज्य का आधिपत्य रहा है। 15वीं शताब्दी में यह विजयनगर राज्य का हिस्सा बना। सन 1711 में अंग्रेजों के आगमन के समय यह जयपूर राज्य का हिस्सा था। जयपूर के महाराज को विशाखापट्टनम के महाराज के नाम से भी जाना जाता था।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1804 में विशाखापट्टनम की लड़ाई में इस पर कब्जा कर लिया। अंग्रेजों ने 1865 में इसे टाउनशिप का दर्जा दिया और आस-पास के क्षेत्रों का विकास किया। स्वाधीन भारत में विशाखापट्टनम को 21 नवंबर 2005 को नगर निगम बनाया गया, जिसका अधिकार क्षेत्र 682 स्कवायर किलोमीटर है।
क्या है भौगोलिक स्थिति?
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विशाखापट्टनम पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी पर बसा शहर है, जिसका क्षेत्र 682 स्कवायर किलोमीटर का है। यह शहर पश्चिम में सिम्हाचलम पहाड़ियों, दक्षिण पूर्व में यारडा पहाड़ियों और उत्तर-पूर्व में कंबालाकोंडा वाइल्डलाइफ सेंचुरी से घिरा है। यहां बोली जाने वाली भाषा की बात करें तो 92 प्रतिशत लोग यहां तेलुगू बोलते हैं। वहीं, 2 प्रतिशत लोग हिन्दी बोलते हैं, जिनमें ज्यादातर बिहार, झारखंड से आए लोग शामिल हैं।
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