जानिए क्‍या है लश्‍कर-ए-तैयबा और कैसे हुई इसकी शुरुआत

लाहौर। गुरुवार को एक बार फिर से कश्‍मीर के त्राल में आतं‍कवादियों के साथ सेना और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई। फिर से सेना और सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है।

वहीं इस एनकाउंटर से एक और बात फिर से साबित होती है कि कश्‍मीर घाटी में पाकिस्‍तान के आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा ने अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं।

हाफिज सईद की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें

हर हफ्ते कहीं न कहीं एनकाउंटर की खबरें आना अब मानों आम बात हो गई है।पिछले माह पंपोर में हुआ आतंकी हमला और अब त्राल एनकाउंटर, आतंकी हाफिज सईद अपने मंसूबों को अंजाम देने में लगा है।

उसने लश्‍कर-ए-तैयबा की शुरुआत ही इसी मकसर से की थी। लेकिन पाकिस्‍तान कभी भी इस बात को मानने को तैयार नहीं होता कि लश्‍कर आतंकी संगठन है और हाफिज सईद एक आतंकी है।

आइए आज आपको लश्‍कर-ए-तैयबा और भारत में इसकी गति‍विधियों के बारे में बताते हैं।

कब हुई शुरुआत

कब हुई शुरुआत

लश्‍कर-ए-तैयबा की शुरुआत अफगानिस्‍तान के कुन्‍नार प्रोविंस में वर्ष 1987में हुई थी। लश्‍कर-ए-तैयबा का मतलब होता है अच्‍छाई की सेना। इसे हाफिज सईद के अलावा इस संगठन को शुरू करने में अब्‍दुल्‍ला आजम और जफर इकबाल नामक दो और व्‍यक्ति शामिल थे।

लादेन की फंडिंग

लादेन की फंडिंग

अल कायदा के जिस आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्‍तान ने पनाह दी थी, उसी लादेन ने लश्‍कर के लिए फंडिंग की थी। इस आतंकी संगठन का हेडक्‍वार्टर लाहौर के पास पंजाब प्रांत के मु‍रीदके में स्थित है।

 फिर हुई जेयूडी की शुरुआत

फिर हुई जेयूडी की शुरुआत

लश्‍कर के अलावा हाफिज सईद ने जमात-उद-दावा की शुरुआत की। वर्ष 2008 में मुंबई आतंकी हमलों के बाद हाफिज सईद ने जमात-उद-दावा की शुरुआत की। इस संगठन को हाफिज और पाक दोनों ही चैरिटेबल ट्रस्‍ट बताते हैं। जबकि अमेरिका और यूनाइटेड नेशंस ने इसे बैन किया हुआ है।

अमेरिका ने कहा आतंकी संगठन

अमेरिका ने कहा आतंकी संगठन

पांच दिसंबर 2001 में अमेरिका ने इसे अपनी आतंकी लिस्‍ट में शामिल किया। भारत ने भी इसे एक कानून के तहत बैन कर दिया था। 26 दिसंबर 2001 को अमेरिका ने इसे एफटीओ यानी फॉरेन टे‍ररिस्‍ट ऑर्गनाइजेशन करार दिया।

ब्रिटेन ने भी किया बैन

ब्रिटेन ने भी किया बैन

30 मार्च 2001 को ब्रिटेन ने इसे प्रतिबंधित संगठन करार दिया।

यूएन का बैन

यूएन का बैन

अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिबंध के करीब चार वर्ष बाद यूनाइटेड नेशंस ने मई 2005 में इस पर बैन लगाया।

मुशर्रफ ने किया बैन

मुशर्रफ ने किया बैन

आज जो परवेज मुशर्रफ लश्‍कर और हाफिज का समर्थन करते हैं तख्‍तापलट के तीन वर्ष बाद यानी 12 जनवरी 2002 को इस संगठन को बैन कर दिया था।

 कश्‍मीर में पहली दस्‍तक

कश्‍मीर में पहली दस्‍तक

जम्‍मू कश्‍मीर में लश्‍कर की पहली दस्‍तक वर्ष 1993 में महसूस की गई जब पाकिस्‍तान के 12 आतंकियों ने अफगानिस्‍तान के नागरिकों के साथ मिलकर एलओसी पार की थी। इस्‍लामी इंकलाबी महाज इस नाम के आतंकी संगठन के साथ जम्‍मू के पुंछ में सक्रियता बढ़ा दी।

कश्‍मीर में जेहाद

कश्‍मीर में जेहाद

हाफिज सईद ने लश्‍कर की शुरुआत ही कश्‍मीर में जेहाद की शुरुआत के मकसद से की थी। लश्‍कर ने 90 के दशक में घाटी में पर्चे बांटे जिन पर लिखा था, 'आखिर क्‍यों हम जेहाद की शुरुआत करना चाहते हैं।' इन पर्चों में भारत के बाकी हिस्‍सों में इस्‍लामिक शासन बहाली की बात भी कही गई थी।

कैसे होती है फंडिंग

कैसे होती है फंडिंग

रिपोर्ट्स में जो बातें सामने आई हैं उनके मुताबिक पा‍क की ओर से 1990 और 1995 के मध्‍य इस संगठन को फंड भेजा जाता था। आईएसआई लश्‍कर की फंडिंग करती थी। वर्ष 2002 तक लश्‍कर ने चैरिटी के बहाने पैसा कलेक्‍ट करना शुरू कर दिया। लश्‍कर को पर्शियन गल्‍फ, यूनाइटेड किंगडम के साथ पाकिस्‍तान और कश्‍मीर के कुछ बिजनेसमैन से भी पैसा मिलता है।

मिलिट्र बजट

मिलिट्र बजट

संगठन का मिलिट्री बजट 2009 तक पांच मिलियन डॉलर तक बढ़ गया था।

आतंकी शिविर

आतंकी शिविर

लश्‍कर के आतंकी कैंप्‍स पाकिस्‍तान के कई हिस्‍सों में मौजूद हैं। लश्‍कर के बेस कैंप मरकज-ए-तैयबा के नाम से जाना जाता है। यह मुरीदके में ही है और इसके अलावा मनशेरा में एक ट्रे‍निंग कैंप नए आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए है।

अफगानिस्‍तान में भी कैंप

अफगानिस्‍तान में भी कैंप

लश्‍कर ने वर्ष 1987 में अफगानिस्‍तान में अपना पहला ट्रेनिंग कैंप शुरू किया था।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+