जानिए विजयी विश्व 'तिरंगे' के बारे में कुछ खास बातें..
नई दिल्ली। देश की आन बान शान का प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज आज केवल एक ध्वज नहीं बल्कि हमारी और आपकी पहचान है।
आईये जानते हैं देश के इस अजीमोशान पहचान के बारे में खास बातें..
- हमारे ध्वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां है जिसमें नीले रंग का अशोक चक्र अंकित है।
- इस ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी।
- इस तिरंगे की रचना 22 जुलाई 1947 में भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था।
- इसमें तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियाँ हैं, जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है।
- ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात 2:3 है।
- सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र है जिसमें 24 तीलियां होते हैं।
- इस चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है।
- इसे धर्म चक्र कहते हैं। इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है।
- इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गतिशील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है।
- तिंरगे के तीनों रंग केसरिया-सफेद-हरा का मतलब सुख-शांति-समृद्धि से है।
- भारतीय ध्वज के लिए हमेशा खादी के कपड़े का इस्तेमाल होता है।
- ध्वज को लेकर हमारे देश में भारतीय ध्वज संहिता के द्वारा कुछ मानक तय किये गये हैं।
- जिसके हिसाब से राष्ट्रीय ध्वज को शैक्षिक संस्थानों (विद्यालयों, महाविद्यालयों, खेल परिसरों, स्काउट शिविरों आदि) में ध्वज को सम्मान की प्रेरणा देने के लिए फहराया जा सकता है।
- विद्यालयों में ध्वज-आरोहण में निष्ठा की एक शपथ शामिल की गई है।
- किसी सार्वजनिक, निजी संगठन या एक शैक्षिक संस्थान के सदस्य द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अरोहण/प्रदर्शन सभी दिनों और अवसरों, आयोजनों पर अन्यथा राष्ट्रीय ध्वज के मान सम्मान और प्रतिष्ठा के अनुरूप अवसरों पर किया जा सकता है।
- इस ध्वज को सांप्रदायिक लाभ, पर्दे या वस्त्रों के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है।
- शाम पांच बजे के बाद ध्वजारोहण नहीं हो सकता है।
- इस ध्वज को आशय पूर्वक भूमि, फर्श या पानी से स्पर्श नहीं कराया जाना चाहिए।
- कुछ विशेष परिस्थितियों' में ध्वज को रात के समय सरकारी इमारत पर फहराया जा सकता है।













Click it and Unblock the Notifications