इतिहास के पन्नों से- जहां पढ़े मोतलीलाल नेहरु से चरण सिंह तक
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) एक बार फिल्म अभिनेता से राजनेता बने राज बब्बर कह रहे थे कि अगर वे आगरा के आगरा कालेज में न पढ़े होते तो वे जीवन में इस मुकाम पर नहीं पहुंचते। आगरा कालेज ने उनकी पर्सनेल्टी को निखारा। इसमें कोई शक नहीं है कि आगरा कालेज अपने आप में पूरा इतिहास समेटे है। इसकी हमेशा ही शानदार फैकल्टी रही है। उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र का इसे आप चाहें तो सबसे बेजोड़ कालेज मान सकते हैं।
मोतीलाल नेहरु से चरण सिंह
आगरा कालेज में कांग्रेस के नेता मोतीलाल नेहरु से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और शिखर किसान नेता चौधरी छोटू राम से लेकर मशहूर डिप्लोमेट भगवान सिंह को आगरा कालेज में पढ़ने का अवसर मिला।
स्थापना 1823 में
इसकी स्थापना साल 1823 में हुई थी। यानी कि अब कुछ सालों के बाद ये अपनी स्थापना के 200 बरस पूरे करेगा।
अंग्रेज प्रिंसिपल का दौर
देश की आजाद से दो साल पहले तक यानी 1945 तक आगरा कालेज का प्रिंसिपल कोई अंग्रेज ही होता था। इधर का आखिरी अंग्रेज प्रिंसिपल एच. स्क्रोल रहे। वे 1937 से लेकर 1945 तक इसके प्रिंसिपल रहे। इधर के पहले भारतीय प्रिंसिपल बनने का गौरव मिला डा. करम चंद मेहता को।
पाकिस्तान की मुताहिदा कौमी मूवमेंट नाम की पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ हुसैन ने एक बार इस लेखक को बताया था कि उनके ज्यादातर रिश्तेदार आगरा कालेज से पढ़े। वे खुद आगरा से संबंध रखते हैं। उनका परिवार देश के विभाजन के वक्त पाकिस्तान चला गया था। आगरा कालेज में हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीतिक शास्त्र, इतिहास, भूगोल, भौतिकी, गणित वगैरह के कोर्स पढ़ाए जाते हैं।
दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार पर अपने को आगरा वाला कहने पर फख्र महसूस करने वाले आर.वी.स्मिथ साहब कहते हैं कि इस कालेज को बुलंदियों पर ले जाने में डा. राजेश प्रसाद वर्मा और डा. एस.एन. सिन्हा का भी बहुत अहम रोल रहा।
इनके दौर में कालेज में नए-नए कोर्स चालू हुए। बेहतर शिक्षकों की नियुक्तियां हुई और आगरा कालेज ने सभी क्षेत्रो में नाम कमाया। अगर आपका ताज नगरी में जाना हो तो कम से कम बाहर से ही आगरा कालेज को देख लें।













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