आम आदमी पार्टी पाकिस्तान में भी!

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी पाकिस्तान में भी। यह हेडिंग पढ़कर आप चौंक जरूर गये होंगे। कहीं आप यह तो नहीं सोच रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल अब पाकिस्तान में भी भ्रष्टाचार का सफाया करने जा रहे हैं... ठह‍िरये। क्योंकि ऐसा कुछ नहीं है। असल में हम आपको रू-ब-रू कराने जा रहे हैं पाकिस्तान की ऐसी पार्टी से जो हू-ब-हू आम आदमी पार्टी की शक्ल है। नाम है तहरीक-ए-इंसाफ, जिसके वर्तमान अध्यक्ष पूर्व क्रिकेटर इमरान खान हैं।

भारत और पाकिस्तान दोनों की राजनीति में नेताओं ने समाज को धर्म, जाति, क्षेत्र, क्लास, आदि के आधार पर बांटने के प्रयास किये हैं और उसमें सफल भी हुए। दुर्भाग्यवश दोनों ही देश उन रास्तों पर नहीं चल रहे हैं, जो शहीदों ने अपने जीवनकाल में दिखाये थे। दोनों देशों को आजाद हुए 65 साल से ऊपर हो गये, लेकिन हालात दोनों के अच्छे नहीं हैं। पाकिस्तान जहां आतंकवाद, खराब अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार आदि से ज्यादा ग्रसित है, तो भारत नक्सलवाद, भ्रष्टाचार से प्रभावित है। दोनों देशों में ऐसा समय आया, जब सारी उम्मीदें खत्म हो गईं और दोनों देशों तभी ऐसी पार्टियों ने जन्म दिया, जिसने भ्रष्टाचार से लड़ने का बीड़ा उठाया।

पाकिस्तान में तहरीक-ए-इंसाफ तो भारत में आम आदमी पार्टी। दोनों पार्टियां लगभग एक समान हैं। दोनों के इरादे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के हैं। फर्क बस इतना है कि तहरीक एक पाकिस्तान की पार्टी को 17 साल हो गये और आम आदमी पार्टी को दो साल भी पूरे नहीं हुए।

स्लाइडर में देखें आम आदमी पार्टी की तस्वीरों के साथ दोनों पार्टियों में समानताएं

भ्रष्ट तंत्र का विकल्प

भ्रष्ट तंत्र का विकल्प

आप और तहरीक-ए-इंसाफ दोनों खुद को भ्रष्ट तंत्र का विकल्प मानती हैं। दोनों पार्टियों की नींव भ्रष्टाचार के ख‍िलाफ जंग के साथ शुरू हुई।

परिवर्तन

परिवर्तन

दोनों की प्राथमिकता है देश में परिवर्तन लाने की। राजनीत से भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म कर देने की। दोनों ही प्रत्येक व्यक्ति, जाति, धर्म को एक समान दृष्टि से देखती हैं।

युवाओं को उतारा

युवाओं को उतारा

दोनों पार्टियां मानती हैं कि देश को मजबूत करना है तो देश के आम आदमी के कंधों को मजबूत करना होगा। यही कारण है कि तहरीक-ए-इंसाफ ने 35 प्रतिशत सीटों पर युवाओं को उतारा और पाकिस्तान की राजनीति को 80 प्रतिशत नये चेहरे दिये। वहीं आम आदमी पार्टी ने 90 प्रतिशत युवाओं को उतारा और नये चेहरे लगातार पार्टी से जुड़ रहे हैं।

सोशल वर्क

सोशल वर्क

दोनों पार्टियों के प्रमुखों का बैकग्राउंड सोशल वर्क है। दोनों ही कभी भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं पाये गये।

फेसबुक-ट्विटर

फेसबुक-ट्विटर

पाकिस्तान में तहरीक-ए-इंसाफ ने तो भारत में आम आदमी पार्टी ने राजनीति को सोशल मीडिया (फेसबुक-ट्विटर) पर प्रखर बनाया।

धमाकेदार एंट्री

धमाकेदार एंट्री

दोनों ही पार्टियों ने पहली बार में ही धमाकेदार एंट्री की और बड़ी संख्या में वोट जुटाये। पाकिस्तान की पार्टी को 55 प्रतिशत वोट मिले, जबकि आप को 66 प्रतिशत।

जमकर आलोचना

जमकर आलोचना

राजनीति के पंडितों ने दोनों ही पार्टियों की जमकर आलोचना की। दोनों ही पार्टियां वन मैन आर्मी के रूप में उभरीं। पहली इमरान खान के नेतृत्व में तो दूसरी अरविंद केजरीवाल के। दोनों पार्टियों को पहली सफलताएं नहीं मिलने तक लोगों को विश्वास नहीं होता था कि ऐसा भी संभव है।

परफॉरमेंस से संतुष्ट

परफॉरमेंस से संतुष्ट

तहरीक-ए-इंसाफ और आम आदमी पार्टी दोनों ही अपने अब तक के चुनाव में परफॉरमेंस से संतुष्ट हैं। आप ने दिल्ली में 70 में से 28 सीटें जीतीं, जबकि पाकिस्तानी पार्टी ने नेशनल असेंबली में 36 सीटें जीतीं।

दोनों पार्टियों की विचारधारा

दोनों पार्टियों की विचारधारा

दोनों पार्टियां धर्म, जाति, क्षेत्र के आधार पर लोगों के बीच फर्क नहीं मानतीं। दोनों पार्टियों की विचारधारा हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई, पठान, बलोची, सिंधी, पंजाबी, आदि से ऊपर उठकर है।

विदेशों से समर्थन

विदेशों से समर्थन

दोनों पार्टियों को लोगों ने विदेश से आकर वोट दिये। क्योंकि विदेशों में रह रहे भारतीय और पाकिस्तानी भी अपने-अपने देशें में परिवर्तन चाहते हैं।

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