Pics: वायुसेना दिवस पर जानिए IAF के बारे में 10 खास बातें
बैंगलोर। भारतीय वायुसेना ने बुधवार को 82वां एयरफोर्स डे मनाया। कभी सिर्फ तीन लोगों के साथ शुरू हुआ वायुसेना का सफर आज 1,70,000 पर्सनल तक जा पहुंचा है।
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी भारतीय वायुसेना आज दुश्मन के छक्के छुड़ाने में सक्षम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था तो उस समय वायुसेना के पास रात में फ्लाई करने वाले एयरक्राफ्ट्स तक नहीं थे।
आज वायुसेना की ताकत के बारे में दुश्मन सोचता है तो उसे भी बुरे सपने आने लगते हैं।

1950 में बनी भारतीय वायुसेना
भारतीय वायुसेना के साथ वर्ष 1945 मेें सेकेंड वर्ल्ड वॉर में इसके योगदान की वजह से इसके साथ 'रॉयल' शब्द को जोड़ा गया था। लेकिन वर्ष 1950 में इसे रॉयल एयरफोर्स की जगह भारतीय वायुसेना के तौर पर पहचान दी गई।

सहायक सेना के तौर पर हुई थी स्थापना
भारतीय वायुसेना की स्थापना आठ अक्टूबर 1932 को सिर्फ एक ऑक्सलरी फोर्स या अतिरिक्त सेना के तौर पर हुई थी। लेकिन आज यह दुनिया की ताकतवर सेनाओं का हिस्सा है।

इंडियन एयरफोर्स नंबर 4 और पाक नंबर 7
दूसरे वर्ल्ड वॉर के समय दुनिया ने भारतीय वायुसेना की ताकत देखी थी। इसी वर्ष फरवरी में रिलीज हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक 1080 कॉम्बेट एयरक्राफ्ट्स के साथ भारतीय वायुसेना को चौथे नंबर पर रखा गया है। पाक की बात करें तो पाक नंबर सात पर आता है।

200 यूएवी वाली भारतीय वायुसेना
इस समय इंडियन एयर फोर्स के पास 3 बीराइव, ए-50 फॉल्कन, एईडब्ल्यू एंड सी (एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल) एयरक्राफ्ट, 700 कॉम्बेट जेट्स, सात मिड एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट्स, टैंकर एयरक्राफ्ट्स, 133 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स, 158 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट्स, 155 यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स और करीब 200 यूएवीज हैं।

बादशाह है सुखोई एमकेआई-30
सुखोई एमकेआई-30 इंडियन एयरफोर्स का प्राइमरी फाइटर जेट है। इस फाइटर जेट को यूरोफाइटर टायफून, डसॉल्ट राफेल और अमेरिका के बेस्ट एफ सीरिज के फाइटर जेट्स के साथ रखा जाता है।

दुश्मनों को चित करते गरुड़ कमांडो
इंडियन एयरफोर्स ने सितंबर, 2009 में एक विशेष ऑपरेशनल यूनिट की स्थापना की। जिसे आज गरुड़ कमांडो फोर्स के नाम से जाना जाता है। 1500 पर्सनल वाली यह कमांडो फाेर्स दुश्मनों के द्वारा छुपा कर रखे गए हथियारों की खोज, रेस्क्यू ऑपरेशन में अग्रिम मोर्चे पर काम करना, दुश्मनों के मिसाइल और रडार पर नजर रखनाे जैसे कामों को अंजाम देती है।

पहले कमांडर इन चीफ
एयर मार्शल सर थॉमस वाकर इल्महर्स्ट इंडियन एयर फोर्स के पहले कमांडर-इन-चीफ थे। 15 अगस्त 1947 से लेकर 21 फरवरी 1950 तक उनका कार्यकाल था। यह थॉमस की कोशिशों का ही नतीजा है कि अधूरी वायु सेना आज एक फाइटर के तौर पर नजर आती है।

इंडियन एयरफोर्स के पहले प्रमुख
एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी इंडियन एयर फोर्स के पहले भारतीय चीफ थे।

कारगिल वॉर का ऑपरेशन सफेद सागर
1999 में जब कारगिल वॉर हुआ तो इंडियन एयरफोर्स के नाम 14,000 से 18,000 फिट ऊंचाई पर छिपे दुश्मनों को खत्म करने का नया रिकॉर्ड दर्ज हुआ।

जब बेस्ट एयरक्राफ्ट्स भी आईएएफ के आगे हो गए फेल
सन 65 में जब भारत और पाक के बीच युद्ध हुआ तो उस समय पाकिस्तान के पास अमेरिका से बेहतर फाइटर जेट्स थे लेकिन इन सबके बावजूद इंडियन एयर फोर्स के सामने पाक टिक नहीं सका।












Click it and Unblock the Notifications