क्या कोविड महामारी खत्म हो रही है? वैज्ञानिक बोले, नहीं

कोविड कब तक रहेगा

नई दिल्ली, 07 सितंबर। चीजें सामान्य दिखाई जरूर देने लगी हैं लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि पहले ही 1918 की फ्लू महामारी से लंबा खिंच चुका कोविड भविष्य में अभी और कुछ समय तक बना रहेगा. और इसकी वजह क्या है? विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोनावायरस अपने आपको बदलने में और बढ़ाने में बेहतर साबित हुआ है. वैक्सीन के असर को पार कर अपने आपको कई गुणा बढ़ाने की इसकी क्षमता को वैज्ञानिकों ने भी हैरान किया है.

यही वजह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कोविड के मरीजों की संख्या यदा-कदा बढ़ती जाती है. पिछले दिनों दिल्ली में अचानक कोविड मरीजों की संख्या बढ़ गई थी तो राज्य सरकार ने मास्क अनिवार्य कर दिया था. इसी तरह अमेरिका में नया ओमिक्रोन बीए.4.6 वायरस पांव पसार रहा है. पिछले हफ्ते ही अमेरिका के कुल संक्रमणों में से आठ फीसदी के लिए यही जिम्मेदार था. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह वेरिएंट पहले के मुकाबले इम्यून सिस्टम को और ज्यादा तेजी से काबू करता है. इन्हीं वजहों से वैज्ञानिकों को लगता है कि वायरस अपने आपको लगातार बदलता रहेगा और भविष्य में लंबे समय तक बना रहेगा.

कब तक रहेगा कोरोनावायरस?

अमेरिका के कोविड-19 संयोजक डॉ. आशीष झा कहते हैं कि हमारी जिंदगियों में तो शायद अब कोविड कहीं नहीं जाने वाला. विज्ञान जगत में यह बात कही जा रही है कि कोविड-19 एंडेमिक बन जाएगा यानी कहीं कहीं किसी खास क्षेत्र में अचानक फैलेगा और फिर दब जाएगा. लेकिन ऐसा होना भी निकट भविष्य की बात नहीं लगता.

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वैसे झा ने यह भी कहा कि "कोविड के साथ जीना कोई बहुत डरावनी बात हो" ऐसा भी नहीं है क्योंकि लोग अब "कोविड से लड़ने में बेहतर हो रहे हैं." अमेरिकी सांसद सेनेटर बर्नी सैंडर्स के साथ सवाल-जवाब के एक कार्यक्रम में झा ने कहा, "बेशक, अगर हम एक्सलरेसटर से अपना पांव हटा दें, हम वैक्सीन अपडेट नहीं करेंगे और नए इलाज नहीं खोजेंगे तो वापस भी जा सकते हैं."

विशेषज्ञ कहते हैं कि कोविड कुछ लोगों के लिए गंभीर बीमारी बना रहेगा. 'कोविड-19 सिनैरियो मॉडलिंग हब' नामक संस्था ने अगस्त 2022 से मई 2023 के बीच कोविड की स्थिति को लेकर अनुमान जाहिर किए हैं. इन अनुमानों को इस आधार पर जारी किया गया है कि बूस्टर डोज ओमिक्रोन के नए वेरिएंट आने पर भी कारगर साबित होंगी.

इन अनुमानों के मुताबिक खराब से खराब स्थिति में भी जबकि एक नया वेरिएंट आ जाए और बूस्टर उपलब्ध ना हो पाए, तो अमेरिका में 13 लाख लोगों को अस्पताल जाना पड़ सकता है. इस दौरान 181,000 लोगों की मौत का अनुमान भी जाहिर किया गया है. अगर नया वेरिएंट नहीं आया और बूस्टर लोगों को समय पर मिला तो भी एक लाख 10 हजार से ज्यादा मौतें हो सकती हैं.

बढ़ता रहेगा वायरस

स्क्रिप्ट रिसर्च ट्रांसलेशनल इंस्टिट्यूट के प्रमुख एरिक टोपोल कहते हैं कि जब तक कि हम कुछ जरूरी कदम नहीं उठाते, जैसे कि नई पीढ़ी की वैक्सीन तैयार कर लें और उन्हें सबके बीच बराबर बांटें, "दुनिया इसी तरह कोविड का उभार देखती रहेगी."

टोपोल कहते हैं कि वायरस के पास मौजूदा रणनीतियों को मात देकर फिर उभर जाने के कई तरीके हैं और यह लोगों को एक के बाद खोजता रहेगा व अपने आपको कई गुना बढ़ाता रहेगा. टोपोल कहते हैं, "जब भी हमें लगता है कि अब हमने कोरोनावायरस का सर्वोच्च स्तर देख लिया है, वायरस उसे तोड़कर ऊपर निकल जाता है."

वैसेसे वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि संभवतया यह वायरस अब और ज्यादा संक्रामक नहीं होगा. मिनेसोटा के मायो क्लीनिक में क्लीनिकल वायरोलॉजी के निदेशक मैथ्यू बिनिकर कहते हैं, "मुझे लगता है कि कहीं तो एक सीमा है. जिस समस्या का सामना हम कर रहे हैं वो ये है कि अब भी दुनिया में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनमें सही इम्युनिटी नहीं है. या तो वे अब तक संक्रमित नहीं हुए हैं या फिर उन्हें वैक्सीन नहीं मिली है."

बिनिकर स्पष्ट करते हैं कि यदि पूरी मानवजाति की इम्यूनिटी का स्तर बढ़ता है तो फिर संक्रमण दर कम हो जाएगी और ऐसे और ज्यादा संक्रामक वायरसों का फैलना भी धीमा हो जाएगा.

वीके/सीके (एपी)

Source: DW

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