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लॉकडाउन से साफ हुई यमुना में बड़ी संख्या में लौटे चंबल के घड़ियाल, बढ़ा रहे अपनी आबादी

इटावा। लॉकडाउन की वजह से यमुना में प्रदूषण कम हुआ है और इसके साफ पानी में चंबल नदी के घड़ियाल अपनी आबादी बढ़ाने के लिए लौटने लगे हैं। यमुना नदी में घड़ियालों के बच्चे देखे जा रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पहले 2011 में ऐसा देखा गया था। अंडा देने के लिए यमुना नदी को फिर से घड़ियालों ने चुना है, इसको लेकर वन अधिकारी खुशी जाहिर कर रहे हैं। घड़ियालों को देखने के लिए गांव के लोग उमड़ रहे हैं।

Alligators of chambal came in Yamuna river to breed

इटावा के पास दिखे घड़ियालों के बच्चे
इटावा में भाऊपुर के पास यमुना नदी में घड़ियालों के करीब 43 बच्चे 15 जून को दिखाई दिए। वे बड़े घड़ियालों के साथ नदी में तैर रहे थे। उनको देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। इस बारे में क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि यमुना में घड़ियालों का लौटना बहुत अच्छा संकेत है। घड़ियालों की सुरक्षा के लिए गार्ड और ग्रामीणों के बीच से वॉलंटियर्स को चुनकर लगाया गया है जो उनकी लगातार निगरानी करते हैं।

2011 के बाद यमुना में लौटे घड़ियाल
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में कंजर्वेशन ऑफिसर राजीव चौहान ने कहा कि यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि यमुना में घड़ियाल प्रजनन के लिए आए हैं। इससे पहले यमुना में घड़ियाल 2011 में दिखे थे। इसके बाद वे अब तक चंबल नदी में ही रहे जहां वे पहले से रहते आए हैं। उन्होंने कहा कि इतने सालों बाद चंबल से निकलकर यमुना में इतनी बड़ी संख्या में घड़ियालों के दिखने की एक वजह यह लग रही है कि लॉकडाउन से इस प्रदूषित नदी का पानी साफ हुआ है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर यमुना इसी तरह साफ होती रही तो यह जैव विविधता के संरक्षण के लिए बहुत बड़ी बात होगी।

घड़ियालों की हो रही है निगरानी
इटावा ही नहीं, कानपुर देहात इलाके की यमुना में भी घड़ियालों को देखा गया है। इसके बाद वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों ने इस तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया है। इसकी स्टडी करने में वे लग गए हैं। वे ग्रामीणों और वॉलंटियर्स से घड़ियालों के बारे में जानकारी ले रहे हैं। 2007 में यमुना में 100 से ज्यादा मृत घड़ियाल मिले थे। एक स्टडी में यह कहा गया कि यमुना में प्रदूषण से इन घड़ियालों में लिवर सिरोसिस की बीमारी हो गई जिससे वे जिंदा नहीं बचे। यमुना के साफ होने से अब घड़ियाल नई जिंदगी पा गए हैं।

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