Zubeen Garg: कौन थे जुबीन गर्ग? उनके बारे में ये 5 बातें नहीं जानते होंगे आप, चक्कर में महिला जवान हुई सस्पेंड

Zubeen Garg Lesser known Facts: भारत के पूर्वोत्तर से निकलकर पूरे देश और फिर विदेश तक अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाले गायक जुबीन गर्ग (Zubeen Garg) अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी मौत की खबर ने संगीत प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। 52 साल की उम्र में सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग हादसे में उनकी जान चली गई।

जुबीन गर्ग का सफर एक प्रेरणा है कि कैसे असम के एक छोटे से शहर से निकलकर कोई कलाकार दुनिया भर में अपनी आवाज का जादू फैला सकता है। उनकी 'या अली' जैसी धुनें आज भी हर किसी की यादों में ताजा हैं। उनकी मौत भले अचानक हुई, लेकिन उनकी कला और फैन-फॉलोइंग उन्हें हमेशा अमर बनाए रखेगी। लेकिन जुबीन सिर्फ एक गायक नहीं थे, वो असम और पूर्वोत्तर के लिए एक संस्कृति, पहचान और जुनून थे। आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें, जो शायद बहुत कम लोग जानते हैं।

Zubeen Garg Lesser known Facts

आज जब जुबीन गर्ग हमारे बीच नहीं हैं, तब भी उनकी आवाज और उनका संगीत हमेशा जिंदा रहेगा। पूर्वोत्तर से लेकर बॉलीवुड तक, उन्होंने अपनी कला से एक ऐसी छाप छोड़ी है, जिसे मिटाना नामुमकिन है। उनकी मौत एक कलाकार की असमय विदाई है, लेकिन उनकी गायकी, उनकी कहानियां और उनका संघर्ष हमेशा लोगों के दिलों में गूंजते रहेंगे।

🔵 पिता मजिस्ट्रेट और मां गायिका-अभिनेत्री थी

जुबीन गर्ग का असली नाम जिबोन बोरठाकुर था। उनका जन्म 18 नवंबर 1972 को असम में हुआ। परिवार कला और शिक्षा से जुड़ा हुआ था-पिता मजिस्ट्रेट थे, जबकि मां गायिका, नृत्यांगना और अभिनेत्री। उनका नाम मशहूर भारतीय म्यूजिक कंडक्टर जुबिन मेहता से प्रेरित होकर रखा गया।

🔵 19 साल की उम्र में पहला एल्बम और धमाकेदार एंट्री

सिर्फ 19 साल की उम्र में जुबीन ने संगीत की दुनिया में कदम रख दिया। 1992 में उनका पहला एल्बम 'अनामिका' आया, जिसने पूरे नॉर्थ-ईस्ट को हिला दिया। इसके बाद उन्होंने 'माया', 'आशा' और 'पाखी' जैसे एल्बम दिए, जिनसे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी।

🔵 मुंबई का सफर और बॉलीवुड में बड़ा ब्रेक

संगीत के सपनों को बड़ा बनाने के लिए जुबीन मुंबई चले आए। शुरुआत में उन्होंने छोटे-छोटे एल्बमऔर फिल्मों के लिए गाने गाए। 'चांदनी रात', 'युहीं कभी', 'फिजा', और 'कांटे' जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया। लेकिन उनकी किस्मत बदली साल 2006 में, जब फिल्म 'गैंगस्टर' का गाना 'या अली' आया। इस गाने ने जुबीन गर्ग को पूरे देश में स्टार बना दिया।

🔵 30 हजार से ज्यादा गाने और 40 भाषाओं में योगदान

इंटरनेट मूवी डाटाबेस (IMDb) के मुताबिक, जुबीन ने अपने करियर में अब तक 32,000 से ज्यादा गाने गाए हैं। ये गाने लगभग 40 भाषाओं में रिकॉर्ड हुए हैं-हिंदी, असमी, बंगाली, उड़िया, मराठी, पंजाबी, कन्नड़ और यहां तक कि नेपाली में भी। इतने बड़े स्तर पर काम करने वाले गायक भारत में बहुत कम हुए हैं।

🔵 फिल्मों से भी रहा नाता, जीता नेशनल अवॉर्ड

गायकी के साथ-साथ जुबीन फिल्मों में भी उतरे। साल 2000 में उन्होंने 'तुमी मोर माथो मोर' नाम की असमी फिल्म बनाई और उसमें एक्टिंग भी की। इसके अलावा 'दिनबंधु' जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया और संगीत भी दिया। 2005 में उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला, जो उनकी कला के लिए बड़ी पहचान थी।

🔵 जब महिला पुलिस जुबीन की वजह से हो गई थी सस्पेंड

जुबीन का करियर जितना शानदार था, उतना ही उनके साथ विवाद भी जुड़े। पिछले साल उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें स्टेज शो के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी ने उन्हें गले लगाया और किस किया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला और महिला कॉप को सस्पेंड कर दिया गया।

इस फैसले से खुद जुबीन काफी नाराज हुए थे। उन्होंने मीडिया से कहा था कि "ये कोई गलत काम नहीं था, वो मुझे पसंद करती हैं और भावुक हो गईं। उन्हें सस्पेंड नहीं करना चाहिए था।" उन्होंने यहां तक कहा कि वो इस मामले में महिला कॉप के समर्थन में कार्रवाई करेंगे।

🔵 जुबीन गर्ग को तीन महीने की सजा और जुर्माना

जुबीन गर्ग को एक पुराने मामले में 3 महीने की सख्त कैद और ₹5,000 का जुर्माना लगाया गया था। मामला साल 2013 का है, जब उन्होंने एक नाबालिग लड़के को सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करने पर थप्पड़ मार दिया था। पीड़ित के पिता, अधिवक्ता अरुप बोरबोरा ने FIR दर्ज कराई थी। बाद में गर्ग पर बच्चे का नाम मीडिया में उजागर करने का भी आरोप लगा। गुवाहाटी की CJM कोर्ट ने उन्हें IPC की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, गर्ग की ओर से कहा गया है कि वे इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।

🔵 आखिरी सफर और दर्दनाक हादसा

जुबीन इन दिनों सिंगापुर में थे, जहां वे 4th North East India Festival में परफॉर्म करने वाले थे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लोगों को इस फेस्टिवल में आने का न्योता दिया था।

लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। 18 सितंबर 2025 को स्कूबा डाइविंग करते समय हादसा हुआ। उन्हें तुरंत समुद्र से निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

🔵 जुबीन का आखिरी वीडियो

अपने आखिरी वीडियो में जुबीन ने मुस्कुराते हुए कहा था कि वे सिंगापुर में अपने हिंदी, बंगाली और असमी गाने गाने वाले हैं। उन्होंने लिखा था कि "सभी लोग आइए और सपोर्ट कीजिए, एंट्री फ्री है।" किसी ने नहीं सोचा था कि यही उनका आखिरी संदेश होगा।

आज जब जुबीन गर्ग हमारे बीच नहीं हैं, तब भी उनकी आवाज और उनका संगीत हमेशा जिंदा रहेगा। पूर्वोत्तर से लेकर बॉलीवुड तक, उन्होंने अपनी कला से एक ऐसी छाप छोड़ी है, जिसे मिटाना नामुमकिन है। उनकी मौत एक कलाकार की असमय विदाई है, लेकिन उनकी गायकी, उनकी कहानियां और उनका संघर्ष हमेशा लोगों के दिलों में गूंजते रहेंगे।

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