Zakir Hussain: तबला 'उस्ताद' की IPF ने ली जान! पद्मश्री से पद्मविभूषण तक का सफर, परिवार ने बयां किया भावुक पल
Zakir Hussain Death Reason: विश्वविख्यात तबला वादक और पद्म विभूषण से सम्मानित उस्ताद जाकिर हुसैन का 15 दिसंबर 2024 को 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। परिवार ने बताया कि वे इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) नामक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। दो हफ्ते से सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
जाकिर हुसैन के परिवार में उनकी पत्नी एंटोनिया मिन्नेकोला, बेटियां अनीसा कुरैशी और इजाबेला कुरैशी, भाई तौफीक कुरैशी और फजल कुरैशी, और बहन खुर्शीद औलिया शामिल हैं। परिवार ने उनके निधन पर कहा कि वे एक मार्गदर्शक, शिक्षक और सांस्कृतिक राजदूत थे। उन्होंने संगीत के जरिए लाखों लोगों को प्रेरित किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमिट विरासत छोड़ गए।

महान संगीतकार की विरासत
उस्ताद जाकिर हुसैन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और तबला वादन को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। उनका संगीत प्रेम, सहयोग और संस्कृति को जोड़ने का माध्यम बना। उनके बैंड 'शक्ति', 'प्लेनेट ड्रम', और 'ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट' ने दुनियाभर में संगीत प्रेमियों के दिलों में जगह बनाई।
ये भी पढ़ें- जब जाकिर हुसैन के साथ सचिन ने स्टेज पर की थी जुगलबंदी, हर किसी के मुंह से निकला था- 'वाह उस्ताद वाह'
मुंबई में जन्म, 11 साल की उम्र में US में पहला कॉन्सर्ट
उस्ताद जाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता, उस्ताद अल्ला रक्खा कुरैशी, स्वयं एक महान तबला वादक थे। बचपन से ही संगीत की ओर झुकाव रखने वाले जाकिर ने 3 साल की उम्र में तबला बजाना शुरू किया और 11 साल की उम्र में अमेरिका में पहला कॉन्सर्ट किया। 1973 में उन्होंने अपना पहला एल्बम 'लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड' लॉन्च किया। उनके संगीत ने भारतीय शास्त्रीय वादन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) क्या है?
इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें फेफड़ों के ऊतकों में घाव बन जाते हैं। इससे सांस लेने में कठिनाई होती है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। यह बीमारी अधिकतर 70-75 साल की उम्र में होती है। फेफड़ों की छोटी वायु थैलियां (एल्वियोली) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित हो जाता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसके बिगड़ने की गति को धीमा किया जा सकता है।
कारण: धूल, धूम्रपान, वायरल संक्रमण, और पारिवारिक इतिहास।
ये भी पढ़ें - Zakir Hussain News: तबला की दुनिया का 'नाद' शांत, जानें वादक से 'उस्ताद' तक का सफर, परिवार में कौन-कौन?












Click it and Unblock the Notifications